स्कूल में फेल होने वाली लड़की कैसे बनी UPSC Topper
भारत
चेतना मंच
28 Nov 2025 04:11 AM
UPSC Success Story : यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा जिसे देश की सबसे मुश्किल परीक्षाओं में से एक माना जाता है। UPSC परीक्षा में सफलता पाने का सपना देश का हर युवा एक न एक बार जरूर देखता है। UPSC को लेकर कई गलतफहमियां भी बहुत फैलाई जाती है। जिसमें सबसे बड़ी अफवाह यह है कि इस परीक्षा में केवल अच्छे एकेडमिक्स वाले उम्मीदवार ही सफल हो सकते हैं। लेकिन हर साल कई उम्मीदवार इस अफवाह को गलत साबित करते हैं। और औसत एकेडमिक्स के साथ यूपीएससी परीक्षा में अच्छे नंबरों से सफल होते हैं। इन्हीं उम्मीदवारों में से एक है रुक्मिणी रियार। जिन्होंने औसत एकेडमिक्स के साथ अपनी मेहनत के दम पर यूपीएससी में न केवल सफलता हासिल की बल्कि आईएएस बनने में भी सफल रही।
बचपन से रही औसत स्टूडेंट
साल 1987 में पंजाब के गुरुदासपुर में जन्मी रुक्मिणी रियार बचपन से ही एक औसत स्टूडेंट थी। उनके पिता बलजिंदर सिंह रियार होशियारपुर के रिटायर्ड डिप्टी डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी हैं। वहीं उनकी मां एक हाउस वाइफ हैं। अपने स्कूली दिनों में रुक्मिणी पढ़ने में एक औसत छात्रा थी। इस बात का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि वह एक बार छठवीं कक्षा में फेल भी हो गई थी। इस असफलता ने रुक्मिणी को काफी परेशान कर दिया था। जिस वजह से वह काफी तनाव में रहने लगी। लेकिन एक दिन उन्होंने इससे छुटकारा पाने का सोचा और ठान लिया कि अब वह अपनी इस असफलता को सफलता में बदल कर रहेंगी। जिसके बाद वह जी-तोड़ से मेहनत करने में लग गई।
मास्टर डिग्री के बाद शुरू की यूपीएससी की तैयारी
अपनी स्कूली शिक्षा रुक्मिणी ने गुरुदासपुरम और फिर स्केयर्ड हर्ट स्कूल, डलहौजी से पूरी की। अपनी ग्रेजुएशन उन्होंने अमृतसर के गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी से पूरी की। जिसके बाद उन्होंने मास्टर करने का फैसला किया और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) से मास्टर्स की डिग्री हासिल की। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद रुक्मिणी ने मैसूर के अशोद्या और मुंबई के अन्नपूर्णा महिला मंडल जैसे एनजीओ (NGO) के साथ इंटर्नशिप की। एनजीओ के साथ काम करते हुए उनका दिल -दिमाग सिविल सेवा की तरफ आकर्षित होने लगा। जिसके बाद उन्होंने इस परीक्षा में हिस्सा लेने का मन बना लिया। इस फैसले के बाद वह यूपीएससी की तैयारी में जुट गई। जिसके लिए सबसे पहले उन्होंने इस परीक्षा से जुड़ी सारी जानकारी जुटाई और परीक्षा के लिए सभी जरूरी स्टडी मैटेरियल कलेक्ट किया।
बिना कोचिंग पाई सफलता
जहां कई उम्मीदवार इस परीक्षा में सफल होने के लिए लाखों की कोचिंग का सहारा लेते हैं, वहीं रुक्मिणी ने बिना किसी कोचिंग की मदद लिए घर से ही यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। इसके लिए उन्होंने सबसे पहले एक अच्छी रणनीति बनाई और उसी को फॉलो करते हुए पढ़ाई करनी शुरू कर दी। जिसका फल उन्हें उनके पहले ही प्रयास में मिल गया उन्होंने साल 2011 में अपना पहला प्रयास दिया और रुक्मिणी ने ऑल इंडिया में दूसरी रैंक हासिल कर आईएएस बनने में सफलता हासिल की।
यूपीएससी के उम्मदवारों को आईएएस रुक्मिणी के टिप्स
आईएएस रुक्मिणी रियार यूपीएससी की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों को सलाह देते हुए बताती हैं कि उन्होंने एनसीईआरटी (NCERT) की छठवीं से 12वीं कक्षा तक की किताबों पर भरोसा किया और उन्हें पढ़ती रही। साथ ही वह न्यूजपेपर और मैगजीन नियमित तौर पर पढ़ती थीं। वह कहती हैं कि अगर कोई यह दो काम करता है तो यूपीएससी में वह सफल जरूर होगा।
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