इन गांवों के लोगों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में शादी-ब्याह तेजी से ‘शो ऑफ’ की होड़ का हिस्सा बनते जा रहे थे, जिससे आम परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था। नए फैसलों के जरिए समाज उसी दबाव को कम करना चाहता है।

Uttarakhand News : पहाड़ी राज्य उत्तराखंड का जौनसार बावर इलाका एक बार फिर अपनी अनोखी सामाजिक सोच और भाईचारे के कारण सुर्खियों में है। यहां खत शैली में आने वाले 25 गांवों ने मिलकर तय किया है कि अब शादियां दिखावे, नशे और फिजूलखर्ची नहीं, बल्कि सादगी और सामूहिक जिम्मेदारी की मिसाल बनेंगी। इसी के तहत इन गांवों में अब से ‘सूखी शादी’ होगी, जिसमें शराब और फास्ट फूड पूरी तरह प्रतिबंधित रहेंगे और महिलाएं भी सिर्फ तीन पारंपरिक गहनों तक सीमित रहेंगी।
देहरादून जनपद के जनजातीय क्षेत्र जौनसार बावर के 25 गांवों ने हाल ही में एक खुली सामूहिक बैठक की। इस बैठक में समाज सुधार के लिए कुल 9 कड़े लेकिन सर्वसम्मत फैसले लिए गए। उत्तराखंड के इस दुर्गम इलाके में पंचायतनुमा इस बैठक में तय किया गया कि अब किसी भी वैवाहिक समारोह में विदेशी शराब, बियर या फास्ट फूड जैसी चीजें परोसी नहीं जाएंगी।
इन गांवों के लोगों का मानना है कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में शादी-ब्याह तेजी से ‘शो ऑफ’ की होड़ का हिस्सा बनते जा रहे थे, जिससे आम परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा था। नए फैसलों के जरिए समाज उसी दबाव को कम करना चाहता है।
जौनसार-बावर समाज की सांस्कृतिक गरिमा को संजोने के लिए बैठक में एक बेहद अहम निर्णय लिया गया। अब शादी-ब्याह या किसी भी बड़े समारोह में महिलाएँ परंपरागत भारी-भरकम सोने के गहनों से लदी नहीं दिखेंगी। समुदाय ने सर्वसम्मति से तय किया कि ‘सम्मानजनक मर्यादा’ के तहत महिलाएँ केवल तीन पारंपरिक आभूषण ही पहनेंगी
इस फैसले ने न केवल पुराने रीति-रिवाजों को नई मजबूती दी है, बल्कि महिलाओं पर सामाजिक दिखावे और महंगे गहने खरीदने के दबाव को भी काफी हद तक कम कर दिया है। दिलचस्प यह है कि स्थानीय महिलाओं ने इस पहल का दिल से स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे परंपरा की सुंदरता तो बरकरार रहेगी ही, साथ ही अनावश्यक खर्च और प्रतिस्पर्धा से भी मुक्ति मिलेगी।
जौनसार-बावर के इन गांवों ने सिर्फ अपील तक बात सीमित नहीं रखी, बल्कि इसे ज़मीन पर उतारने के लिए कड़ा सामाजिक अनुशासन भी तय कर दिया है। फैसला लिया गया कि यदि कोई परिवार इन नियमों की अनदेखी करता है शादी या किसी भी कार्यक्रम में शराब परोसता है, फास्ट फूड का इंतज़ाम करता है या तय मर्यादा से ज्यादा गहने पहनने पर ज़ोर देता हैतो ऐसे परिवार के समारोह में खतवासी (खत क्षेत्र के लोग/समाज) शरीक नहीं होंगे। यही नहीं, उल्लंघन करने वाले परिवार से एक लाख रुपये तक का जुर्माना वसूलने का प्रावधान भी रखा गया है। यानी उत्तराखंड के इन गांवों ने बिना किसी सरकारी कानून के, समाज की सामूहिक राय और दबाव को ही सबसे मजबूत ‘नियंत्रक व्यवस्था’ बना दिया है। बैठक में लिए गए अन्य फैसले भी दिखावे और फ़िजूलखर्ची पर सीधे प्रहार करने वाले हैं। यह स्पष्ट कर दिया गया कि रहिणी भोज (पारंपरिक सामूहिक भोजन) में केवल सामान्य भोज के साथ मिठाई और फल ही दिए जाएंगे, महंगे ड्राई फ्रूट और कीमती गिफ्ट पर पूरी तरह अंकुश रहेगा और उपहार के रूप में चांदी का सिक्का देने पर भी पूरी तरह पाबंदी होगी। इन सब नियमों के पीछे मूल सोच यह है कि पहाड़ी इलाकों के साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार भी बिना किसी हीनभावना या सामाजिक शर्मिंदगी के, अपनी सामर्थ्य के अनुसार सादगी से कार्यक्रम कर सकें और शादी-ब्याह जैसे मौकों पर दिखावे की होड़ से मुक्त हो सकें।
इससे पहले भी उत्तराखंड के चकराता तहसील क्षेत्र की ग्राम पंचायत खारसी, मानुवा, गेहरी, कंदाड़ आदि गांवों में महिलाओं के अधिक आभूषण पहनने पर रोक से जुड़े फैसले लिए जा चुके हैं। उन पंचायतों में भी यह व्यवस्था लागू है कि महिलाएं केवल सोने के तीन गहने ही पहन सकती हैं। अब जौनसार बावर के 25 गांवों ने संगठित होकर इसे और व्यवस्थित और कड़ाई से लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। Uttarakhand News