राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की मंजूरी के बाद यह अध्यादेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। उत्तराखंड सरकार का कहना है कि संशोधनों का मकसद कानून की भाषा व प्रक्रिया को ज्यादा व्यावहारिक, स्पष्ट और कठोर कार्रवाई-क्षम बनाना है।

Uttarakhand News : उत्तराखंड सरकार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) 2024 को और स्पष्ट व प्रभावी बनाने के लिए उत्तराखंड यूनिफॉर्म सिविल कोड (संशोधन) अध्यादेश, 2026 लागू कर दिया है। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) गुरमीत सिंह की मंजूरी के बाद यह अध्यादेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया। उत्तराखंड सरकार का कहना है कि संशोधनों का मकसद कानून की भाषा व प्रक्रिया को ज्यादा व्यावहारिक, स्पष्ट और कठोर कार्रवाई-क्षम बनाना है।
यह अध्यादेश रिश्तों की कानूनी शुचिता और सहमति की सुरक्षा को केंद्र में रखकर नियमों को और धार देता है। अब शादी के वक्त पहचान छिपाना सिर्फ नैतिक नहीं, कानूनी तौर पर भी गंभीर आधार माना जाएगा और इसके चलते विवाह रद्द होने तक की कार्रवाई संभव होगी। वहीं शादी या लिव-इन में जबरदस्ती, दबाव, धोखाधड़ी या किसी गैर-कानूनी मकसद से संबंध बनवाने/बनाने पर कड़ी सजा के प्रावधान तय किए गए हैं। खासतौर पर शादीशुदा होकर लिव-इन में रहने के मामलों में दंड को 7 साल तक बढ़ाने का प्रावधान चर्चा में है। धोखे या दबाव से किसी को रिलेशनशिप में फंसाने पर भी सख्त कार्रवाई का रास्ता खोला गया है। इसके साथ ही अध्यादेश में नई धारा 390-A जोड़कर इन मामलों पर कानून की पकड़ और मजबूत करने की बात कही गई है।
संशोधन अध्यादेश ने UCC के रजिस्ट्रेशन ढांचे को भी नई धार दी है, ताकि व्यवस्था सिर्फ कागजी प्रक्रिया न रह जाए, बल्कि जवाबदेह और समयबद्ध सिस्टम के रूप में काम करे। अब लिव-इन रिलेशनशिप खत्म होने पर रजिस्ट्रार को टर्मिनेशन सर्टिफिकेट जारी करना होगा, वहीं कानून की भाषा में मानवीय संवेदनशीलता जोड़ते हुए “विधवा” शब्द को जीवनसाथी से बदलने का प्रावधान किया गया है। सबसे अहम बदलावों में रजिस्ट्रार जनरल को सेक्शन 12 के तहत शादी, तलाक, लिव-इन और विरासत से जुड़े रजिस्ट्रेशन रद्द करने का अधिकार देना शामिल है। समय-सीमा के उल्लंघन पर भी सिस्टम सख्त होगा। यदि सब-रजिस्ट्रार तय समय में कार्रवाई नहीं करता, तो मामला अपने आप ऊपरी स्तर (रजिस्ट्रार/रजिस्ट्रार जनरल) तक चला जाएगा। साथ ही सब-रजिस्ट्रार पर लगे जुर्माने के खिलाफ अपील का अधिकार, और जुर्माने की वसूली को भूमि राजस्व की तरह करने की व्यवस्था भी जोड़ी गई है। कानूनी ढांचे को अपडेट करते हुए प्रक्रियात्मक मामलों में दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 और दंडात्मक प्रावधानों के लिए भारतीय दंड संहिता, 2023 का संदर्भ लागू करने का भी उल्लेख किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि उत्तराखंड में UCC लागू होने की पहली वर्षगांठ मंगलवार को UCC दिवस के रूप में मनाई जाएगी। राज्य में UCC 27 जनवरी 2025 से लागू है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। तैयारियों को लेकर गृह सचिव शैलेश बगोली, आईजी निवेदिता कुकरेती और डीएम सविन बंसल ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। अधिकारियों का कहना है कि UCC लागू होने से सभी नागरिकों के लिए समान कानून, और व्यवस्था में एकरूपता व पारदर्शिता को बढ़ावा मिला है।
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में 2018 से धर्मांतरण विरोधी कानून लागू है, जिसमें सरकार ने 2022 और फिर 2025 में संशोधन किए। इस बार प्रस्तावित सख्ती के तहत जबरन धर्मांतरण के दोषियों के लिए 3 साल से लेकर उम्रकैद तक सजा का प्रावधान बताने की बात कही गई है, जबकि पहले अधिकतम सजा 10 साल तक थी। Uttarakhand News