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Vegetable Price: पिछले कुछ हफ्तों में टमाटर की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई है। कई शहरों में इसकी कीमत लगभग दोगुनी हो गई है जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी टमाटर पहले के मुकाबले काफी महंगा बिक रहा है।

Vegetables Latest Price: रसोई का बजट एक बार फिर बिगड़ता नजर आ रहा है। मानसून पूरी तरह सक्रिय होने से पहले ही देश के कई हिस्सों में टमाटर, प्याज और आलू की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। सबसे ज्यादा बढ़ोतरी टमाटर के दाम में हुई है जबकि प्याज भी लगातार महंगा हो रहा है। आलू की कीमतों में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम है लेकिन बाजार के जानकार मान रहे हैं कि अगर मौसम और सप्लाई की स्थिति में जल्द सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में इनकी कीमतों में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। सब्जियों की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ता है क्योंकि लगभग हर घर में रोजाना टमाटर, प्याज और आलू का इस्तेमाल होता है। ऐसे में लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर इन सब्जियों के दाम अचानक क्यों बढ़ गए और क्या आने वाले समय में राहत मिलने की उम्मीद है।
पिछले कुछ हफ्तों में टमाटर की कीमतों में सबसे ज्यादा तेजी दर्ज की गई है। कई शहरों में इसकी कीमत लगभग दोगुनी हो गई है जबकि उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी टमाटर पहले के मुकाबले काफी महंगा बिक रहा है। बाजार में टमाटर की आवक कम होने और मांग लगातार बनी रहने के कारण कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार पिछले एक महीने के दौरान टमाटर की औसत खुदरा कीमत में करीब 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। अगर पिछले साल की तुलना करें तो इसकी कीमत लगभग 25 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है। यही वजह है कि आम लोगों को रोजमर्रा की खरीदारी के दौरान पहले से ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
टमाटर के साथ-साथ प्याज की कीमतों में भी लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पिछले एक महीने में प्याज की औसत खुदरा कीमत करीब 11 प्रतिशत बढ़ी है। कई मंडियों में अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज की उपलब्धता कम होने के कारण खुदरा बाजार में इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। पिछले साल की तुलना में प्याज की कीमत में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि यह बढ़ोतरी टमाटर जितनी तेज नहीं है लेकिन घरेलू बजट पर इसका असर जरूर पड़ रहा है क्योंकि प्याज लगभग हर सब्जी और खाने की डिश का जरूरी हिस्सा होता है।
आलू की कीमतों में फिलहाल बहुत ज्यादा उछाल नहीं आया है। पिछले एक महीने में इसकी औसत कीमत में करीब 1.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि अच्छी बात यह है कि पिछले साल की तुलना में आलू अभी भी सस्ता बिक रहा है।
इस बार भीषण गर्मी ने सबसे ज्यादा नुकसान टमाटर की फसल को पहुंचाया है। लंबे समय तक अधिक तापमान रहने से कई इलाकों में उत्पादन प्रभावित हुआ। जहां फसल तैयार थी वहां गर्मी के कारण गुणवत्ता भी प्रभावित हुई। इसका सीधा असर बाजार में सप्लाई पर पड़ा। इसके अलावा कई राज्यों में बेमौसम बारिश ने भी किसानों की मुश्किलें बढ़ा दीं। खासकर प्याज के भंडारण पर इसका असर पड़ा जिससे अच्छी गुणवत्ता वाला स्टॉक कम हो गया। जब बाजार में सप्लाई घटती है और मांग बनी रहती है तब कीमतें तेजी से बढ़ने लगती हैं।
व्यापारियों का कहना है कि इस बार केवल उत्पादन ही नहीं बल्कि सब्जियों को एक राज्य से दूसरे राज्य तक पहुंचाना भी मुश्किल हो गया है। तेज गर्मी की वजह से टमाटर जल्दी खराब होने लगते हैं। ऐसे में लंबी दूरी तक ट्रांसपोर्ट के दौरान काफी मात्रा में माल खराब हो जाता है। दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में राजस्थान और हरियाणा से आने वाले टमाटर की सप्लाई कम हुई है। जब बाजार में माल कम पहुंचता है तो दुकानदारों को ऊंचे दाम पर खरीदना पड़ता है और उसका असर सीधे ग्राहकों तक पहुंचता है।
टमाटर, प्याज और आलू केवल रसोई की जरूरी सब्जियां ही नहीं हैं, बल्कि इनका असर देश की महंगाई दर पर भी पड़ता है। कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में इन तीनों सब्जियों की कुल हिस्सेदारी लगभग 1.75 प्रतिशत है। इसलिए जब इनके दाम तेजी से बढ़ते हैं तो खाद्य महंगाई बढ़ने की संभावना भी बढ़ जाती है। यदि आने वाले हफ्तों में इनकी कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहती हैं तो इसका असर आम लोगों के मासिक खर्च के साथ-साथ महंगाई के आंकड़ों में भी दिखाई दे सकता है।
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