
देश के संवैधानिक क्रम में दूसरे नंबर की कुर्सी यानी उपराष्ट्रपति का चुनाव आज बस किसी प्रतियोगिता से बढ़कर एक राजनीतिक और वैचारिक युद्ध के रूप में देखा जा रहा है। सिर्फ उम्मीदवारों के नामों का खेल नहीं, बल्कि संख्या और विचारधारा की ताकत का सीधा टकराव है। लोकसभा और राज्यसभा के कुल 782 सांसद अपने मतों के जरिए इस लड़ाई का फैसला करेंगे, और जीत दर्ज करने के लिए किसी भी दावेदार को 391 वोटों का आवश्यक बहुमत हासिल करना होगा। Vice Presidential Election 2025
राजनीतिक गणित साफ़ संकेत दे रहा है कि एनडीए उम्मीदवार सीपी राधाकृष्णन की जीत लगभग तय नजर आ रही है। भाजपा के 240 लोकसभा और लगभग 100 राज्यसभा सांसदों के साथ-साथ टीडीपी, जेडीयू, लोजपा (रामविलास), शिवसेना (शिंदे गुट), जद (सेक्युलर), आरएलडी और कई छोटे सहयोगी दलों के समर्थन से एनडीए का आधार पहले ही करीब 427 सांसदों का मजबूत खाका पेश करता है। इस ताकत को और बढ़ाते हुए वाईएसआर कांग्रेस ने भी राधाकृष्णन के पक्ष में मतदान का ऐलान किया है। दूसरी तरफ, बीजेडी, बीआरएस और अकाली दल ने मतदान से दूरी बनाए रखी है। ऐसे में सत्ता पक्ष का गणित विपक्ष पर स्पष्ट रूप से भारी दिखाई दे रहा है, और राधाकृष्णन के विजयी होने की संभावनाएं और मजबूत हो गई हैं।
वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस, तृणमूल, डीएमके, समाजवादी पार्टी, शिवसेना (उद्धव गुट), एनसीपी (शरद गुट), राजद, वामपंथी दल और कुछ अन्य सहयोगी मिलकर विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक का निर्माण करते हैं, जिनके पास करीब 324 सांसदों का समर्थन है। इस चुनाव में विपक्ष ने बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाकर केवल संख्यात्मक मुकाबले से परे, इसे एक “वैचारिक जंग” के रूप में पेश करने की रणनीति अपनाई है। वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य साफ़ तौर पर दिखा रहा है कि उपराष्ट्रपति की कुर्सी एनडीए के पाले में जाने की राह पर है। विपक्षी उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी भले ही संख्याबल में कमजोर पड़ रहे हों, लेकिन उन्होंने इस चुनाव को केवल मतों का मुकाबला नहीं बल्कि “सत्ता बनाम विचारधारा” की जंग के रूप में ढालने का भरसक प्रयास किया है। Vice Presidential Election 2025