
उपराष्ट्रपति चुनाव इस बार केवल पद की लड़ाई नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति की नई जटिल पहेली बन गया है। बीजेपी ने सीपी राधाकृष्णन को मैदान में उतारकर दक्षिण भारत में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत की, तो इंडिया ब्लॉक ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश बी. सुदर्शन रेड्डी को साझा उम्मीदवार घोषित कर विपक्ष को एकजुट होने का संदेश दिया। इस मुकाबले ने न केवल दोनों नेताओं की सियासी छवि को हाईलाइट किया है, बल्कि चंद्रबाबू नायडू, जगन मोहन रेड्डी और केसीआर जैसे दिग्गज नेताओं को भी रणनीतिक उलझनों में फंसा दिया है। Hindi India News
NDA की ओर से सीपी राधाकृष्णन का नाम सामने आया, जो तमिलनाडु से हैं, जबकि इंडिया ब्लॉक ने बी. सुदर्शन रेड्डी को साझा उम्मीदवार बनाया। उनका किसी भी राजनीतिक दल से कोई नाता नहीं है, जिससे विपक्ष एकजुटता की ताकत के साथ चुनावी मैदान में खड़ा नजर आता है। इंडिया ब्लॉक के प्रमुख नेताओं ने सुदर्शन को विरोधी दलों का साझा चेहरा घोषित किया है। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, एनसीपी के शरद पवार, सपा सांसद धर्मेंद्र यादव, डीएमके सांसद कनिमोझी और टीएमसी की शताब्दी रॉय शामिल हैं।
TMC और आम आदमी पार्टी भी सुदर्शन रेड्डी के साथ खड़ी हैं। आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इसे केवल उपराष्ट्रपति चुनाव तक सीमित लड़ाई न मानते हुए इसे संविधान और आरएसएस के बीच वैचारिक संघर्ष बताया। उनका कहना है कि बीजेपी के उम्मीदवार आरएसएस से जुड़े हुए हैं, जबकि विपक्ष के साझा उम्मीदवार बी. सुदर्शन रेड्डी कभी किसी राजनीतिक दल या विचारधारा से नहीं जुड़े।
बी. सुदर्शन रेड्डी को उम्मीदवार बनाने के बाद तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के राजनीतिक दलों के लिए रणनीतिक उलझन पैदा हो गई है। आंध्र प्रदेश में टीडीपी सत्ता में है और वाईएसआर कांग्रेस मुख्य विपक्षी दल है, जबकि तेलंगाना में बीआरएस विपक्ष में है। ये दल न तो एनडीए के साथ हैं और न ही इंडिया ब्लॉक के साथ। इसी तरह बीजेडी ने भी अभी तक अपने समर्थन का निर्णय नहीं लिया है। इंडिया ब्लॉक ने सुदर्शन रेड्डी के नाम पर विपक्ष की ताकत और नैरेटिव को मजबूत करने की कोशिश की है। वे सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश रह चुके हैं और सामाजिक न्याय एवं निष्पक्षता के प्रतीक माने जाते हैं। तेलंगाना और कर्नाटक में जाति सर्वेक्षणों में उनके अनुभव का लाभ विपक्ष सुदर्शन रेड्डी को सामाजिक न्याय का प्रतीक बनाकर चुनावी रणनीति में उठा सकता है।
उपराष्ट्रपति चुनाव में संसद के दोनों सदनों के कुल 782 सदस्य वोट डालते हैं। NDA के पास फिलहाल 418 सांसदों का समर्थन है, जबकि जीत के लिए 392 वोटों की आवश्यकता है। हालांकि 2024 के बाद बीजेपी के गठबंधन संबंधों में बदलाव, विपक्ष की बढ़ी ताकत और सुदर्शन रेड्डी जैसे गैर-राजनीतिक चेहरे के सामने आने से चुनावी समीकरण पहले से अधिक रोचक और अनिश्चित हो गए हैं। Hindi India News