Vijay Diwas : जब भारत के आगे पाकिस्तान ने टेक दिये थे घुटने
भारत
RP Raghuvanshi
30 Nov 2025 11:36 PM
नई दिल्ली (एजेंसी) । देश आज 1971 की महाविजय का जश्न मना रहा है। शहीदों को देश नमन कर रहा है। इस खास मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी(PM Narendra Modi) दिल्ली में स्थित वार मेमोरियल पहुंचे। उनके साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘स्वर्णिम विजय मशालों’ के सम्मान और स्वागत समारोह में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने 1971 की जंग के शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने वार मेमोरियल पर आगंतुक पुस्तिका पर हस्ताक्षर किए। उन्होंने लिखा, ‘पूरे राष्ट्र की ओर से, मैं 1971 के युद्ध के योद्धाओं को सलाम करता हूं। नागरिकों को उन वीर योद्धाओं पर गर्व है, जिन्होंने वीरता की अनूठी दास्तां लिखी।’
बांग्लादेश के अस्तिव में आने के आज 50 साल पूरे हो चुके हैं। 1971 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध को बांग्लादेश मुक्ति संग्राम भी कहा जाता है। इस दौरान पाकिस्तान पर भारतीय सशस्त्र बलों को जीत मिली थी। इस उपलक्ष्य में हर साल 16 दिसंबर को भारत में ‘विजय दिवस’ मनाया जाता है। इस खास अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गृह मंत्री अमित शाह रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से लेकर तमाम नेताओं ने देश के वीर जवानों को नमन किया है, जिन्होंने पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 50वें विजय पर कहाकि मैं मुक्तिजोद्धों, वीरांगनाओं और भारतीय सशस्त्र बलों के वीरों द्वारा महान वीरता और बलिदान को याद करता हूं। हमने साथ मिलकर दमनकारी ताकतों से लड़ाई लड़ी और उन्हें हराया। ढाका में भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द की उपस्थिति प्रत्येक भारतीय के लिए विशेष महत्व रखती है।
गृह मंत्री अमित शाह (Home Minister Amit Shah)ने कहा कि भारतीय सैनिकों के अद्भुत साहस व पराक्रम के प्रतीक ‘विजय दिवस’ की स्वर्ण जयंती पर वीर सैनिकों को नमन करता हूं। 1971 में आज ही के दिन भारतीय सेना ने दुश्मनों पर विजय कर मानवीय मूल्यों के संरक्षण की परंपरा के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय जोड़ा था। सभी को विजय दिवस की शुभकामनाएं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह(Defense Minister Raj Nath Singh) ने कहा कि स्वर्णिम विजय दिवस के अवसर पर हम 1971 के युद्ध के दौरान अपने सशस्त्र बलों के साहस और बलिदान को याद करते हैं। 1971 का युद्ध भारत के सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय है। हमें अपने सशस्त्र बलों और उनकी उपलब्धियों पर गर्व है।