
Vijaypat Singhania : दुनिया के टॉप अमीरों की बात की जाए तो रिलायंस ग्रुप के मालिक मुकेश अंबानी का नाम आता है। भारत में मुकेश अंबानी सबसे अमीर लोगों की सूची में टॉप पर हैं। अरबों रुपये की संपत्ति और दर्जनों कंपनियों के मालिक मुकेश अंबानी का कोई सानी नहीं है। लेकिन हम आज आपको बताते हैं कि भारत में एक ऐसा व्यक्ति भी है, जो कभी मुकेश अंबानी से भी अमीर था। आज वह एक एक रुपये को तरस रहा है। आखिर कौन है वो व्यक्ति जो मुकेश अंबानी से कहीं ज्यादा अमीर था, आइए जानते हैं....
आप सभी ने कभी ना कभी भारत की सबसे फैमस कपड़ा कंपनी रेमंड का नाम तो सुना ही होगा। देश-विदेश में मशहूर रेमंड रेमंड इन दिनों मीडिया की सुर्खियों में है। इस कंपनी के सुर्खियों में आने का कारण इस कंपनी मालिक रहे विजयपत सिंघानिया और उनके पुत्र गौतम सिंघानिया के बीच चल रही तकरार है। 12 हजार करोड़ रुपये की संपत्ति के मालिक रहे विजयपत सिंघानिया इन दिनों बेहद परेशानियों से भरा जीवन गुजार रहे हैं। एक समय में उनके आगे पीछे लग्जरी गाडियों का काफिला चलता था, लेकिन आज वह एक एक रुपये के मोहताज हो गए हैं। फिलहाल उनके पास न रहने को घर और न ही कार। मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में विजयपत यह स्वीकार कर चुके हैं कि आज के वक्त् में उनके पास कुछ भी नहीं है।
दरअसल, विजयपत ने अपनी सारी संपत्ति और रेमंड कंपनी के सभी अधिकार अपने बेटे गौतम सिंघानिया को सौंप दिए थे। कभी 12000 करोड़ की कंपनी के मालिक आज दक्षिणी मुंबई की ग्रैंड पराडी सोसायटी में किराए के घर में रहने को मजबूर है। बेटे ने उनसे कार और ड्राइवर तक छीन लिया। मुंबई मिरर की रिपोर्ट के मुताबिक फ्लैट विवाद को लेकर बाप-बेटे का रिश्ता इतना बिगड़ गया कि बेटे ने बाप को घर से बाहर कर दिया। पिता विजयपत सिंघानिया ने मालाबार हिल्स में अपने ड्यूपलेक्स घर पर अधिकार मांगा था। इसी को लेकर बाप-बेटे में विवाद बढ़ता चला गया।
एक इंटरव्यू में विजयपत सिंघानिया ने कहा कि उन्होंने अपना सबकुछ अपने बेटे को सौंप दिया, लेकिन उनके बेटे ने उनसे ही सब कुछ छीन लिया। विजयपत सिंघानिया ने कहा कि उसने मुझे कंपनी का कुछ हिस्सा देने का वादा किया था, लेकिन बाद में उससे भी मुकर गया। उन्होंने कहा कि उनका बेटा उन्हें सड़क पर देखकर बहुत खुश होता। उन्होंने अपने बेटे गौतम सिंघानिया को गुस्सैल, लालची और घमंडी इंसान बताया। उन्होंने कहा कि बेटे को अपनी सारी संपत्ति सौंपना उनकी सबसे बड़ी गलती थी।
रेमंड कंपनी की शुरुआत करीब 100 पहले मुंबई से हुई। वर्ष 1900 में महाराष्ट्र के ठाणे में एक वुलन मिल था, जहां कंबल बनाया जाता था। बाद में वहां सेना के जवानों के लिए यूनिफॉर्म तैयार होने लगी। 1925 में मुंबई के एक कारोबारी ने इस मिल को खरीदा, लेकिन कुछ साल बाद ही साल 1940 में कैलाशपत सिंघानिया ने उनसे वो मिल खरीद लिया। उन्होंने मिल का नाम वाडिया मिल से बदलकर रेमंड मिल रखा। सिंघानिया परिवार, जो राजस्थान से पलायन कर कानपुर आए थे, वहां जेके कॉटन स्पिनिंग और वीविंग मिल्स कंपनी चलाते थे। उन्होंने अब रेमंड मिल का इस्तेमाल ब्रिटेन से आने वाले कपड़ों को टक्कर देने के लिए किया।
कैलाश सिंघानिया ने फैब्रिक पर फोकस किया और सस्ते कपड़े बनाने शुरू किए। उन्होंने 1958 में मुंबई में सबसे पहला रेमंड शोरूम खोला। 1960 में उन्होंने विदेशी मशीने मंगाई और उनसे कपड़ा उत्पादन शुरू किया। 1980 में विजयपत सिंघानिया के हाथों में रेमंड की कमान सौंपी गई। उन्होंने कंपनी की जिम्मेदारी बखूबी संभाली और रेमंड का विस्तार करते रहे। 1986 में सिंघानिया ने फैब्रिक बिजनेस के साथ-साथ परफ्यूम ब्रांड पार्क एवेन्यू लॉन्च किया। उन्होंने देश के साथ-साथ विदेशों में भी भी विस्तार पर फोकस किया। साल 1990 में विजयपत सिंघानिया ने भारत के बाहर पहला शोरूम खोला था।