
बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सीट शेयरिंग की चर्चाएँ जोरों पर हैं। बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सीट शेयरिंग को लेकर सियासी हलचल चरम पर है। एनडीए और महागठबंधन दोनों ही गठबंधन को मजबूत करने के लिए रणनीतियों में उलझे हैं, लेकिन इस बीच विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) के अध्यक्ष मुकेश सहनी ने राजनीतिक समीकरण को पूरी तरह पलटने की तैयारी कर दी है। सहनी की 30 सीटों की मांग ने महागठबंधन के शीर्ष नेताओं की नींद उड़ा दी है और अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या बिहार की राजनीति में चुनाव से पहले एक बड़ा खेल होने वाला है, जो पूरे चुनावी समीकरण को बदल सकता है। Bihar Election 2025
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मुकेश सहनी महागठबंधन से लगभग 30 सीटों की डिमांड कर रहे हैं, जबकि गठबंधन उन्हें सिर्फ 10-15 सीटें देने पर विचार कर रहा है। दूसरी तरफ एनडीए उन्हें ‘विनिंग सीट्स’ का लालच दे रहा है। अगर सहनी इस बार एनडीए का साथ देते हैं, तो 2020 की तरह बिहार की राजनीतिक कहानी एक बार फिर बदल सकती है। उस साल, आरजेडी से नाराज़ होकर सहनी ने बीजेपी का दामन थामा और 11 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की।
लेकिन बाद में बीजेपी और वीआईपी के रिश्ते खटपट भरे हो गए; तीन विधायक बीजेपी में शामिल हो गए और सहनी को गठबंधन छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने महागठबंधन का साथ लिया, लेकिन वहां भी उम्मीद के मुताबिक नतीजे नहीं मिल पाए। इस बार सवाल यही है: क्या सहनी फिर से चुनावी समीकरण बदलने वाले किंगमेकर बनेंगे, या उनका असर सीमित रह जाएगा?
दरभंगा के मूल निवासी मुकेश सहनी कभी मुंबई में बॉलीवुड सेट डिजाइनर के रूप में अपनी पहचान बना चुके थे। 2013 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और 2018 में अपनी पार्टी विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) की नींव रखी। सहनी का सबसे मजबूत आधार मल्लाह और निषाद समुदाय हैं, जो बिहार की आबादी का लगभग 9.6% हिस्सा बनाते हैं। यही समुदाय किसी भी गठबंधन की चुनावी किस्मत तय कर सकता है। इस वजह से आरजेडी और बीजेपी दोनों ही उन्हें अपने पाले में करने के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं, ताकि आगामी चुनाव में निर्णायक बढ़त हासिल की जा सके।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भले ही वीआईपी की पार्टी आकार में छोटी हो, लेकिन उसका प्रभाव उत्तर बिहार के दरभंगा, मधुबनी, वैशाली, पूर्वी चंपारण और खगड़िया जैसे जिलों में निर्णायक हो सकता है। यही वजह है कि मुकेश सहनी का पलड़ा चुनावी समीकरण में भारी प्रभाव डाल सकता है। बिहार की सियासत में सहनी की चाल ने सिर्फ महागठबंधन और एनडीए की रणनीतियों को चुनौती नहीं दी है, बल्कि आने वाले चुनाव की दिशा ही बदलने की क्षमता रखती है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सहनी किस तरफ झुकेंगे—क्या वह एनडीए का दामन थामेंगे, या महागठबंधन के साथ निर्णायक खेल करेंगे। इस चुनावी मोड़ पर होने वाला उनका निर्णय पूरे राज्य की सियासत में बड़ा खेल साबित हो सकता है। Bihar Election 2025