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Vishnu Dev Sai : छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री के चेहरे के लिए भले ही भाजपा हाईकमान ने आज मोहर लगाई हो, लेकिन छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री कौन बनेंगे, इसके संकेत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई दिन पहले ही दे दिए थे। तीन दिसंबर को चुनाव परिणाम आने के बाद जब दिल्ली में भाजपा मुख्यालय पर विजयी समारोह आयोजित किया गया था, तभी पीएम मोदी ने अपने भाषण में यह संकेत दे दिए थे कि छत्तीसगढ़ के नए सीएम कौन होंगे।
पांच राज्यों के चुनाव परिणाम आने के बाद जब तीन दिसंबर को दिल्ली में स्थित भाजपा मुख्यालय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया था और पीएम मोदी ने इस कार्यक्रम को संबोधित किया था, तभी पीएम मोदी ने विष्णुदेव साय के सीएम बनाए जाने के संकेत दे दिए थे। उस दौरान पीएम मोदी ने कहा था कि, 'आदिवासी समुदाय ने गुजरात में कांग्रेस को हराने में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी; और मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी कांग्रेस के खिलाफ जनादेश में यही दिखा है।'
59 वर्षीय विष्णु देव साय के छत्तीसगढ़ के नए सीएम बनने की रेस में सबसे आगे निकलने के पीछे यही वजह रही है कि वह जशपुर जिले की जिस आरक्षित-अनुसूचित जनजाति कुनकरी सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं, उस उत्तर छत्तीसगढ़ इलाके में इस बार भाजपा की ऐसी लहर चली है कि पूरा भगवा ही भगवा नजर आ रहा है।
राज्य में आदिवासियों की आबादी करीब 32 प्रतिशत है और वे सबसे ज्यादा इसी इलाके से आते हैं। इससे पहले छत्तीसगढ़ को एक ही आदिवासी सीएम अजीत जोगी के रूप में मिला था और उनका चुनाव क्षेत्र भी इसी इलाके की मरवाही सीट थी।
विष्णु देव साय ने 16वीं लोकसभा चुनाव में छत्तीसगढ़ की रायगढ़ सीट से जीत दर्ज की थी और पीएम मोदी के पहले कार्यकाल में इस्पात मंत्रालय में जूनियर मंत्री बनाए गए थे। 2020 से लेकर 2022 तक वे प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष रह चुके हैं।
राज्य में भाजपा को रमन सिंह के मुकाबले तुलनात्मक रूप से एक ज्यादा नया नेता चाहिए था और इस तरह से अभी साय के रूप में पार्टी को लंबे समय के लिए एक चेहरा मिल गया है। इस बार छत्तीसगढ़ में अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित कुल 29 सीटों में बीजेपी का वोटर शेयर 11 प्रतिशत बढ़ा है। यह प्रमाण है कि आदिवासी वोटरों ने कमल खिलाने में क्या रोल निभाया है।
पिछली बार इनमें से बीजेपी सिर्फ 3 सीटों पर जीती थी और अबकी बार 17 पर पहुंच गई है। जबकि, कांग्रेस की संख्या 25 से घटकर 11 रह गई है।
पहले देश में प्रथम आदिवासी राष्ट्रपति और फिर अनुसूचित जनजाति के नेता को सीएम पद पर बैठाकर भाजपा ने बहुत बड़ा चुनावी कार्ड चलने की कोशिश की है। अगले साल झारखंड विधानसभा चुनाव भी होने हैं। पिछली बार गैर-आदिवासी नेता रघुबर दास के नेतृत्व में बीजेपी को हार मिली थी। इसलिए पार्टी ने इस बार पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी को वहां चेहरा बनाया है। छत्तीसगढ़ जैसे पड़ोसी राज्य में भाजपा ने अपना जो चेहरा बनाया है, उसका फायदा पार्टी को वहां भी मिलने की संभावना है।
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