
Wagh Nakh News / नई दिल्ली। मराठा यौद्धा छत्रपति शिवाजी को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। यह खबर छत्रपति के शस्त्रों (Wagh Nakh ) से जुड़ी हुई है। मराठा योद्धा छत्रपति शिवाजी ने जिस ‘वाघ नख’ (Wagh Nakh) ने मुगल सेनापति अफजल खान को मौत के घाट उतारा था, उसे ब्रिटेन से देश वापस लाया जाएगा। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने यह जानकारी दी। (Wagh Nakh ) मंत्रालय ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर शनिवार को कहा कि हमारी बहुमूल्य कलाकृतियों की वापसी भारत के राजनयिक प्रयासों की एक बड़ी जीत है।
यह घोषणा ऐसे समय में की गई है, जब नयी दिल्ली में जी20 नेताओं का दो दिवसीय शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है। मंत्रालय ने कहा कि हमारी गौरवशाली विरासत लौट रही है। इतिहास बनते देखने के लिए तैयार हो जाइए, क्योंकि छत्रपति शिवाजी महाराज का प्रसिद्ध ‘वाघ नख’ उस जगह पर अपनी विजयी वापसी के लिए तैयार है, जिससे वह वास्वत में संबंध रखता है।
मंत्रालय ने पोस्ट के साथ ‘कल्चर यूनाइट्स ऑल’ (संस्कृति सभी को जोड़ती है) और ‘जी20इंडिया’ हैशटैग का इस्तेमाल किया। मंत्रालय ने एक पोस्टर भी साझा किया, जिस पर लिखा था, ‘‘भारत ने अपनी ऐतिहासिक विरासत पुन: प्राप्त की।’’ पोस्टर में बताया गया है कि इस ‘वाघ नख’ का इस्तेमाल अफजल खान को मारने के लिए किया गया था।
छत्रपति शिवाजी पर लिखी गई किताब 'शिवाजी एंड हिज टाइम्स' के मुताबिक यह घटना साल 1659 की है। बीजापुर सल्तनत के राजा आदिल शाह ने अफजाल खान को गुलामी स्वीकार करवाने के लिए शिवाजी के पास भेजा था। शिवाजी इस मुलाकात में अपने दो वफादारों के साथ पहुंचे थे। वहीं अफजाल खान पांच लोगों के साथ वहां आया था।
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शिवाजी को अफजाल खान की मंशा पर पहले से ही शक था और वो पूरी तैयारी करके आए थे। अफजाल खान ने गले लगाने के बहाने शिवाजी की हत्या करने की कोशिश की, हालांकि शिवाजी ऐसे किसी संभावित हमले को लेकर पहले से ही सावधान थे। जैसे ही अफजाल ने गले लगाने के बहाने शिवाजी पर वार किया, शिवाजी ने फौरन अपना विशेष हथियार बाघ नख निकाला और अफजाल खान को मौत के घाट उतार दिया।
बाघ नख स्टील का बना एक हथियार है जिसमें बाघ के पंजों के नाखून की तरह नुकीली छड़ें लगी होती हैं। यह व्यक्ति के हाथ की मुट्टी में फिट बैठ जाता है। इसके दोनों तरफ रिंग होता है जिसे हाथ की पहली और चौथी उंगली में पहन लिया जाता है। इससे यह हाथ में फिट बैठ जाता है। इसके बाद हमला करने पर यह सामने वाले व्यक्ति को लहूलुहान कर देता है। इससे किसी की हत्या भी की जा सकती है। बताया जाता है कि वीर शिवाजी अपनी सुरक्षा के लिए इस विशेष हथियार को हमेशा अपने साथ रखा करते थे।
एक रिपोर्ट के मुताबिक शिवाजी महाराज का ये विशेष हथियार आजादी से पहले मराठा राज्य की राजधानी सतारा में ही था। अंग्रेजों के भारत आने के बाद मराठा पेशवा के प्रधानमंत्री ने इसे ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकारी जेम्स ग्रांट डप को बतौर तोहफा दे दिया था। इसके बाद जब अधिकारी 1824 में अपने देश ब्रिटेन पहुंचे थे तो उन्होंने इस वहां के विक्टोरिया और अल्बर्ट म्यूजियम को दान कर दिया था। ये उस वक्त से वहीं था। Wagh Nakh