गुरुग्राम क्यों पानी-पानी हो जाता है बारिश में? नोएडा में फरक नहीं, जानिए वजहें
भारत
चेतना मंच
30 Nov 2025 01:04 PM
Waterlogging in Rain : गुरुग्राम, जो कभी शांत और हरा-भरा शहर था, अब भारी बारिश में जलभराव और अव्यवस्था से जूझ रहा है। तेजी से हुए अनियंत्रित शहरीकरण ने साहिबी नदी और आसपास के तालाबों को नुकसान पहुँचाया, जिससे प्राकृतिक जल निकासी प्रणाली तहस-नहस हो गई है। अरावली की पहाड़ियों से आने वाला पानी अब कंक्रीट और असफाल्ट के जाल में फंस जाता है, और तेजी से भरते पानी का कोई मार्ग नहीं बचता जिससे जलभराव होता है। दशकों पहले साहिबी नदी पूरे गुरुग्राम की प्यास बुझाती थी। इसके किनारे बने तालाब और वेटलैंड्स बारिश के पानी को सोखते और इलाके में खेती होती थी। लेकिन अब शहर के विकास ने इन जलाशयों को खत्म कर दिया है, और नदी भी नजफगढ़ नाले में तब्दील हो चुकी है। दूसरी ओर नोएडा में बारिश से गुड़गांव जैसी समस्या कहीं भी देखने को नहीं मिलती है।
अनियंत्रित निर्माण के कारण जलभराव
अरावली पहाड़ियों से उतरता पानी पहले प्राकृतिक ढलान से साहिबी नदी तक पहुंचता था। लेकिन अब कंक्रीट जाल और बेतरतीब निर्माण के कारण पानी कहीं रुक जाता है। 19वीं सदी में बनाए गए बांध भी अब अधिकांश टूट चुके हैं। इस वजह से गुरुग्राम में 50 मिमी से ज्यादा बारिश भी कई सेक्टर में जलभराव पैदा कर देती है।
शहर में नाले और सीवर नेटवर्क भी अपर्याप्त
शहर में नाले और सीवर नेटवर्क भी अपर्याप्त हैं। गुरुग्राम 732 वर्ग किलोमीटर में फैला है और जनसंख्या लगभग 26 लाख है, लेकिन केवल 40 किलोमीटर नालों की पहुंच है। पुराने सीवर सिस्टम अब भी बढ़ती आबादी और बारिश को संभालने में असमर्थ हैं। इसके साथ ही गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और नगर निगम के बीच तनातनी ने समस्या और बढ़ा दी है।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा की स्थिति बेहतर
इसके विपरीत नोएडा-ग्रेटर नोएडा की स्थिति बेहतर है। वहां की योजना पहले से तैयार थी, जहां बिजली, सड़क और सीवर जैसी बुनियादी सुविधाओं के बाद ही आवासीय और वाणिज्यिक विकास हुआ। 87 किलोमीटर लंबा ड्रेनेज नेटवर्क बारिश का पानी सीधे हिंडन और यमुना नदी तक पहुंचाता है। स्टॉर्म ड्रेनेज, नियमित सफाई, ग्रीन बेल्ट और बड़े पार्क बारिश के पानी को सोखने में मदद करते हैं, जिससे नोएडा में जलभराव की समस्या नहीं होती। गुरुग्राम की समस्या मूलत: अनियंत्रित शहरीकरण, प्राकृतिक जल निकासी का नुकसान और अपर्याप्त ड्रेनेज सिस्टम की वजह से है। वहीं, नोएडा में पूर्व नियोजित शहर निर्माण और मजबूत ड्रेनेज सिस्टम ने शहर को बारिश के दौरान सुरक्षित रखा है।