Wedding Destination : वैवाहिक पर्यटन स्थल बनेंगे यूपी के किले और महल
UP's forts and palaces will become matrimonial tourist destinations
भारत
चेतना मंच
30 Apr 2023 05:11 PM
लखनऊ। राजस्थान के महलों में देशी-विदेशी जोड़ों की शादियां (वेडिंग डेस्टिनेशन) होना कोई नई बात नहीं है। इससे वहां की सरकार को भारी आमदनी होती है। उसे देखते हुए अब यूपी सरकार भी राज्य के प्रसिद्ध किलों, महलों और ऐतिहासिक स्थलों को ‘वैवाहिक पर्यटन स्थल’ के रूप में विकसित कर कमाई करने की तैयारियों में जुट गई है।
Wedding Destination
प्रेम की अटूट गाथा के गवाह स्थलों पर बने सात जन्मों का रिश्ता
उत्तर प्रदेश को 10 खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य के तहत नयी पर्यटन नीति-2022 में इस तरह की पहल की गई है। बहुत जल्द मंत्रिमंडल की बैठक में भी इस संबंध में प्रस्ताव लाए जाने की उम्मीद है। उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (पर्यटन एवं संस्कृति) मुकेश कुमार मेश्राम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में राजसी ठाठ-बाट और सांस्कृतिक विरासत के जरिये शादी को यादगार बनाने वाले बहुत ही आकर्षक स्थल मौजूद हैं। आगरा का ताजमहल जहां प्यार का प्रतीक है, वहीं मथुरा-वृंदावन को आध्यात्मिक प्रेम की नगरी माना जाता है। उन्होंने कहा कि चुनार किले से लेकर बाजीराव-मस्तानी के अगाध प्रेम से जुड़ा महोबा का ‘मस्तानी महल’ और बुंदेलखंड के विभिन्न किले भी लोकप्रिय ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ के रूप में उभर सकते हैं। हम इन महलों और किलों को ‘वैवाहिक पर्यटन स्थल’ के रूप में विकसित करने जा रहे हैं, ताकि लोग प्रेम की अटूट गाथा के गवाह स्थलों पर वैवाहिक बंधन में बंध सकें।
एक अधिकारी ने बताया कि राजस्थान में नवंबर 2022 से मार्च 2023 के बीच लगभग 40 हजार ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ हुईं। प्रदेश में एक सत्र में इस तरह की शादियों से औसतन 2,500 करोड़ रुपये का कारोबार होता था, जो कोविड-19 महामारी के कारण प्रभावित हुआ था। हालांकि, अब यह धीरे-धीरे पटरी पर लौटने लगा है। पर्यटन विभाग का आकलन है कि बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक अपनी शादी को यादगार बनाने के लिए आगरा और वाराणसी आते रहे हैं, लेकिन कोविड-19 की दस्तक के बाद से प्रदेश में विदेशी पर्यटकों की आमद कम हो गई है और ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ का आकर्षण भी घटा है।
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फिलहाल 10 स्थानों का चयन
प्रमुख सचिव ने बताया कि अब स्थिति सामान्य हो रही है। ऐसे में विभाग ने राज्य में 100 स्थानों को ‘वैवाहिक पर्यटन स्थल’ के रूप में विकसित करने के लिए चिन्हित किया है। हालांकि, अगले साल तक मुख्य रूप से मिर्जापुर के चुनार किला, लखनऊ की छत्तर मंजिल, बरसाना के जल महल और झांसी के बरुआ सागर समेत 10 ऐतिहासिक-पौराणिक स्थलों पर ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। मेश्राम ने कहा कि हम मंत्रिमंडल के समक्ष यह प्रस्ताव पेश करने के लिए तैयार हैं। पीपीपी (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) आधारित इस प्रस्ताव के तहत, उपेक्षा के कारण खंडहर में तब्दील हो रहे किलों, महलों और धरोहरों की मूल वास्तुकला में किसी भी तरह का बदलाव किए, उन्हें ‘वैवाहिक पर्यटन स्थल’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
पर्यटन विभाग के एक उप-निदेशक ने बताया कि सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों में भी कई वैवाहिक पर्यटन स्थल आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। मिसाल के तौर पर मध्य प्रदेश के ओरछा में किलों और महलों में खूब शादियां होती हैं। कई बार मनचाही तारीख पर बुकिंग न मिलने पर जोड़े निकटवर्ती बरुआसागर किला को भी ‘डेस्टिनेशन वेडिंग’ के लिए चुनते हैं। उन्होंने कहा कि झांसी-खजुराहो मार्ग पर करीब साढ़े सात एकड़ में फैले बरुआसागर किले के बारे में बताया जाता है कि झांसी की रानी गर्मियों के दिनों में यहां अपना दरबार लगाती थीं।
बढ़ेगा कारोबार, मिलेगा रोजगार
ऑल इंडिया टेंट डीलर वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन, उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष विजय कुमार ने प्रदेश सरकार की पहल की सराहना करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य को ‘वैवाहिक पर्यटन स्थल’ के रूप में विकसित करने से परिवहन, फोटोग्राफी, ज्वेलरी, कपड़ा, हलवाई, बैंड-बाजा, टेंट, मैरिज लॉन, इवेंट मैनेजमेंट, सजावट, आर्केस्ट्रा, कैटरिंग और होटल आदि उद्योगों को न सिर्फ बढ़ावा मिलेगा, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन भी होगा।
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