मालेगांव ब्लास्ट केस में ये क्या बोल गए जस्टिस लाहोटी?
Malegaon Blast Case
भारत
चेतना मंच
28 Nov 2025 05:16 PM
साल 2008 के मालेगांव बम धमाके मामले में मुंबई की विशेष NIA अदालत ने 17 साल बाद बड़ा फैसला सुनाते हुए सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया है। इस फैसले के दौरान विशेष न्यायाधीश एके लाहोटी ने एक अहम टिप्पणी की, जिसने न्याय और धर्म के बीच की लक्ष्मण रेखा को स्पष्ट कर दिया। Malegaon Blast Case
जज लाहोटी ने कहा, “आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, क्योंकि कोई भी धर्म हिंसा की वकालत नहीं करता।” इस टिप्पणी के साथ ही अदालत ने सभी आरोपियों को विश्वसनीय सबूतों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। बता दें कि, इस केस में जिन आरोपियों को बरी किया गया उनमें साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर (पूर्व भाजपा सांसद), लेफ्टिनेंट कर्नल प्रसाद पुरोहित, सुधाकर चतुर्वेदी, रिटायर्ड मेजर रमेश उपाध्याय, अजय राहिरकर, सुधाकर धर द्विवेदी और समीर कुलकर्णी शामिल हैं।
कोर्ट ने क्या कहा?
जज लाहोटी ने स्पष्ट किया कि, “सिर्फ शक के आधार पर किसी पर केस नहीं चलाया जा सकता। प्रॉसिक्यूशन अपने आरोप संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। यह घटना निश्चित रूप से समाज के खिलाफ गंभीर थी, लेकिन भावनाओं या नैतिकता के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती।” कोर्ट ने कहा कि, ऐसा कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला जिससे यह सिद्ध हो सके कि कर्नल पुरोहित ने आरडीएक्स लाया था। यह भी प्रमाणित नहीं हुआ कि विस्फोटक बम साध्वी प्रज्ञा की मोटरसाइकिल में लगाया गया। घटना के बाद हुई पथराव और पुलिसकर्मी की बंदूक छीनने की घटना में भी कोई ठोस गवाह सामने नहीं आया।
क्या हुआ था 29 सितंबर 2008 को?
महाराष्ट्र के मालेगांव के भीकू चौक पर रात करीब 9:35 बजे एक दोपहिया वाहन में शक्तिशाली बम विस्फोट हुआ था। इस विस्फोट में 6 लोगों की मौत हो गई थी जबकि 101 लोग घायल हुए थे। मृतकों में फरहीन उर्फ शगुफ्ता शेख लियाकत, शेख मुश्ताक यूसुफ, शेख रफीक मुस्तफा, इरफान जियाउल्लाह खान, सैयद अजहर सैयद निसार और हारून शाह मोहम्मद शाह शामिल थे।
इस केस की जांच स्थानीय पुलिस, एटीएस और फिर एनआईए ने की थी। यह भारत का पहला ऐसा मामला था जिसमें हिंदू चरमपंथियों पर आतंकवाद के आरोप लगे थे। एनआईए ने 2016 में दाखिल सप्लीमेंट्री चार्जशीट में MCOCA की धाराएं हटा दी थीं, यह कहते हुए कि पहले की जांच ‘संदेहास्पद’ थी। Malegaon Blast Case