अमित शाह की नई योजना से महाराष्ट्र सियासी गर्माहट

नई रणनीति के पीछे विपक्षी गठबंधन 'महाविकास आघाडी' (मविआ) में बढ़ते मतभेदों को अहम वजह माना जा रहा है। विपक्ष के हिस्से में अभी मात्र एक सीट आने की संभावना है, लेकिन इस एक सीट पर कांग्रेस, उद्धव ठाकरे गुट और शरद पवार गुट के बीच जबरदस्त खींचतान चल रहा है।

Maharashtra Rajya Sabha Election 2026
अमित शाह के निर्देश पर बदली रणनीति (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar02 Mar 2026 04:00 PM
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Maharashtra Rajya Sabha Election 2026: देशभर में राज्यसभा की 37 सीटों के लिए 16 मार्च को होने वाले चुनाव से पहले महाराष्ट्र की सियासत में बड़ा उलटफेर देखने को मिल सकता है। केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के मास्टर स्ट्रैटजिस्ट अमित शाह की ओर से मिले नए निर्देश ने राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन 'महायुति' की रणनीति में बदलाव का संकेत दे दिया है। खबर है कि भाजपा अब केवल 6 सीटों पर संतोष करने के बजाय सातवीं सीट पर भी अपना पैर जमाने की तैयारी में है, जिससे महाराष्ट्र में सियासी तापमान बढ़ गया है।

अमित शाह का 'सातवीं सीट' फॉर्मूला

माना जा रहा था कि मौजूदा संख्या बल के हिसाब से महायुति (भाजपा, शिंदे गुट, अजित पवार गुट) को 6 सीटें (भाजपा-4, अजित पवार गुट-1, शिंदे गुट-1) आसानी से मिल जाएंगी। लेकिन भाजपा के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र चव्हाण की दिल्ली यात्रा और अमित शाह से हुई मुलाकात के बाद चित्र बदल गया है। सूत्रों के मुताबिक, अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा है कि महायुति को सिर्फ छह सीटों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने पार्टी को सातवीं सीट के लिए पूरी ताकत झोंकने के निर्देश दिए हैं। अगर भाजपा सातवीं सीट की दावेदारी करती है, तो उसे करीब 20 अतिरिक्त मतों की जरूरत होगी।

विपक्ष के खेमे में दरार, भाजपा को मौका

सत्तापक्ष की इस नई रणनीति के पीछे विपक्षी गठबंधन 'महाविकास आघाडी' (मविआ) में बढ़ते मतभेदों को अहम वजह माना जा रहा है। विपक्ष के हिस्से में अभी मात्र एक सीट आने की संभावना है, लेकिन इस एक सीट पर कांग्रेस, उद्धव ठाकरे गुट और शरद पवार गुट के बीच जबरदस्त खींचतान चल रहा है। अमित शाह इसी आपसी लड़ाई का फायदा उठाकर विपक्ष के किसी असंतुष्ट धड़े को अपने पक्ष में करने और सातवीं सीट पर कब्जा करने का दांव खेल रहे हैं।

25 दावेदारों की लंबी सूची, इन नामों पर ज्यादा फोकस

इस बीच, महाराष्ट्र भाजपा ने 4 सीटों के लिए करीब 25 दावेदारों की सूची केंद्रीय नेतृत्व को भेज दी है। इस सूची में कुछ चौंकाने वाले नाम भी शामिल हैं। प्रमुख रूप से अमरावती की पूर्व सांसद नवनीत राणा, चंद्रपुर के पूर्व सांसद और ओबीसी आयोग के पूर्व अध्यक्ष हंसराज अहीर, और गडचिरोली के पूर्व सांसद अशोक नेते के नाम शीर्ष पर चर्चा में हैं। तीनों नेताओं ने पार्टी से राज्यसभा टिकट के लिए पुरजोर दबाव बनाया है।

भाजपा की ओर से उम्मीदवारों के चयन का मामला अब 2 मार्च को होने वाली केंद्रीय चुनाव समिति की अहम बैठक में तय होगा। अमित शाह की रणनीति के मद्देनजर यह लगभग तय है कि भाजपा इस बार 4 की जगह 5 उम्मीदवार चुनाव में उतारेगी। यह पांचवां उम्मीदवार कौन होगा और क्या विपक्ष के खेमे में बने तूफान के बीच भाजपा सातवीं सीट पर कब्जा कर पाएगी, यह आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति का सबसे बड़ा सवाल होगा। Maharashtra Rajya Sabha Election 2026

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बाजार में महंगा कीवी? अब घर पर करें खेती, जानें आसान तरीका

कीवी का पौधा ठंडे और हल्के गर्म मौसम में सबसे अच्छा बढ़ता है। इसे लगाने के लिए ऐसी जगह चुनें जहां रोजाना कम से कम 4 से 5 घंटे धूप आती हो। अगर आपके पास बड़ा आंगन नहीं है, तो आप बड़े गमले में भी इसे लगा सकते हैं।

Growing Kiwi
जल्दी फल पाने के लिए सहारे का रखें ध्यान (फाइल फोटो)
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userऋषि तिवारी
calendar02 Mar 2026 12:38 PM
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Growing Kiwi : सेहत के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ ही लोग पौष्टिक फलों की ओर रुख कर रहे हैं, लेकिन बाजार में कीवी की महंगी कीमत अक्सर आम जनता के लिए चिंता का विषय बनी रहती है। अब आप इस चिंता से छुटकारा पा सकते हैं। थोड़ी सी जानकारी और मेहनत से आप अपने घर की छत, बालकनी या आंगन में आसानी से कीवी का पौधा उगा सकते हैं।

आजकल सेहत को लेकर लोग पहले से ज्यादा सचेत हैं। कीवी फल महंगा होने के बावजूद इसके स्वास्थ्य लाभों के कारण इसकी मांग बनी रहती है। खुशहाल खबर यह है कि अब आप इस 'सुपरफूड' को अपने घर पर भी उगा सकते हैं। यहाँ जानते हैं कि कैसे आप बिना किसी बड़े खर्च के घर पर कीवी की खेती कर सकते हैं।

मौसम और जगह का रखें ध्यान

कीवी का पौधा ठंडे और हल्के गर्म मौसम में सबसे अच्छा बढ़ता है। इसे लगाने के लिए ऐसी जगह चुनें जहां रोजाना कम से कम 4 से 5 घंटे धूप आती हो। अगर आपके पास बड़ा आंगन नहीं है, तो आप बड़े गमले में भी इसे लगा सकते हैं। सिर्फ इतना ध्यान रखें कि पौधे वाली जगह खुली हो और वहां हवा का आवागमन बना रहे।

कैसे करें रोपण?

कीवी उगाने के दो आसान तरीके हैं:

  1. बीज से बाजार से पका हुआ कीवी लाएं और उसमें से बीज निकालकर साफ पानी से धो लें। इन्हें सुखाकर गीली मिट्टी में हल्का दबाकर लगा दें। 2-3 हफ्ते में छोटे पौधे निकलने लगेंगे।
  2. नर्सरी का पौधा: अगर आप जल्दी फल पाना चाहते हैं, तो नर्सरी से तैयार पौधा खरीदना एक बेहतर विकल्प है।

मिट्टी और गमले का चुनाव

कीवी के लिए अच्छी और नरम मिट्टी होना जरूरी है। मिट्टी में गोबर की खाद और थोड़ी रेत मिलाने से पानी का निकास अच्छा होता है और जड़ें सड़ती नहीं हैं। गमले में लगाते समय 16 से 18 इंच गहरा गमला चुनें और नीचे छेद जरूर रखें ताकि पानी न जमे।

देखभाल के विशेष टिप्स

  • पानी: गर्मी में हफ्ते में 2-3 बार और सर्दी में कम पानी दें। मिट्टी को ज्यादा गीला न होने दें।
  • खाद: हर 2-3 महीने में जैविक खाद डालते रहें।
  • सहारा: कीवी बेल की तरह बढ़ता है, इसलिए लकड़ी या लोहे की जाली का सहारा देना जरूरी है। इससे पौधा अच्छी तरह फैलता है और फल अधिक लगते हैं।

कब मिलेगा फल?

अगर आपने बीज से पौधा लगाया है तो इसमें फल आने में 3 से 4 साल का समय लग सकता है। वहीं, नर्सरी से लाया गया तैयार पौधा 2 से 3 साल में फल देना शुरू कर देता है। Growing Kiwi

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हवाई जहाज सीधी रेखा में क्यों नहीं उड़ते? जानिए 'घुमावदार रास्ते' का राज

फ्लैट मैप पर दो बिंदुओं के बीच की सबसे छोटी दूरी सीधी रेखा लगती है, लेकिन गोल पृथ्वी पर यह दूरी एक वक्र (Curve) के रूप में होती है। विमानन की भाषा में इसे 'ग्रेट सर्कल रूट' कहा जाता है।

Airplane Curved Path
फ्लाइट पथ का विज्ञान (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar02 Mar 2026 11:28 AM
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Airplane Curved Path: अक्सर यात्रियों के मन में यह सवाल जरूर आता है कि जब दो जगहों के बीच सीधा रास्ता है, तो हवाई जहाज उसे छोड़कर घुमावदार रास्ता क्यों अपनाते हैं? अगर आपने कभी फ्लाइट ट्रैकिंग ऐप या इन-फ्लाइट स्क्रीन पर विमान के मार्ग को देखा है, तो आपने देखा होगा कि विमान शायद ही कभी एकदम सीधी रेखा में उड़ते हैं। इसके पीछे न सिर्फ विज्ञान है, बल्कि सुरक्षा और बचत के भी कई कारण हैं। आइए जानते हैं इसकी असली वजह।

पृथ्वी गोल है, इसलिए रास्ता घुमावदार

इसका सबसे बड़ा और मुख्य कारण हमारी पृथ्वी का आकार है। हम जो मैप देखते हैं, वह फ्लैट (सपाट) होता है, लेकिन पृथ्वी गोल है। फ्लैट मैप पर दो बिंदुओं के बीच की सबसे छोटी दूरी सीधी रेखा लगती है, लेकिन गोल पृथ्वी पर यह दूरी एक वक्र (Curve) के रूप में होती है। विमानन की भाषा में इसे 'ग्रेट सर्कल रूट' कहा जाता है। यह रास्ता पृथ्वी के नेचुरल घुमाव को फॉलो करता है, जिससे हवाई जहाज को कम से कम दूरी तय करनी पड़ती है। दरअसल, ग्लोब पर सीधा रास्ता 2D मैप पर घुमावदार दिखता है, जबकि हकीकत में वही रास्ता सबसे छोटा होता है।

फ्यूल की बचत और खर्च में कमी

ग्रेट सर्कल रूट पर उड़ान भरने से हवाई जहाज फ्लैट मैप की सीधी लाइनों की तुलना में कुल कम किलोमीटर तय करते हैं। इसका सीधा फायदा यह होता है कि फ्यूल की खपत काफी कम हो जाती है। एयरलाइन कंपनियों के लिए ईंधन की बचत बड़ा मुद्दा होता है और यह घुमावदार रास्ता उनके खर्चे को काफी हद तक कम करने में मदद करता है।

सुरक्षा का है खास ख्याल

सिर्फ दूरी ही नहीं, बल्कि सुरक्षा भी इसमें अहम भूमिका निभाती है। लंबी अंतरराष्ट्रीय उड़ानों (International Flights) में अक्सर विमान बड़े समुद्रों के ऊपर से सीधे जाने के बजाय अलास्का, ग्रीनलैंड या रूस जैसे इलाकों की तरफ से मुड़ते हैं। इसकी वजह यह है कि किसी भी आपातकालीन स्थिति (Emergency) में पायलट खुले समुद्र में फंसने के बजाय पास के किसी एयरपोर्ट पर जल्दी पहुंच सके। यह रणनीति यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

मौसम और हवा की दिशा का असर

पायलट अपना रास्ता तय करते समय मौसम की स्थिति को भी ध्यान में रखते हैं। वे जेट स्ट्रीम (तेज हवा की धारा) जैसी अनुकूल हवाओं का फायदा उठाने के लिए रास्ता बदलते हैं, जिससे विमान की गति बढ़ जाती है और फ्यूल कम लगता है। साथ ही, तूफान, टर्बुलेंस या खतरनाक मौसम से बचने के लिए भी उन्हें रास्ते में थोड़ा बदलाव करना पड़ता है।

तकनीक का सहारा

आज के दौर में एडवांस्ड फ्लाइट मैनेजमेंट सिस्टम सबसे अच्छा रास्ता कैलकुलेट करने के लिए सैटेलाइट नेवीगेशन और रियल टाइम डेटा का इस्तेमाल करते हैं। यह सिस्टम पृथ्वी के घुमाव, मौसम, एयर ट्रैफिक और फ्यूल एफिशिएंसी को समझकर सबसे सुरक्षित और किफायती मार्ग तय करते हैं। Airplane Curved Path

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