भारत का पहला बिजलीघर कोलकाता में स्थापित किया गया था। यह प्लांट डायरेक्ट करंट प्रणाली पर आधारित था। इसका संचालन उस समय 'कलकत्ता इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी' करती थी, जो आगे चलकर CESC Limited के नाम से प्रसिद्ध हुई।

Electricity Plant : आज बिजली हमारे जीवन का ऐसा अभिन्न हिस्सा बन चुकी है, जिसके बिना एक दिन भी गुजारना मुश्किल है। घर की रोशनी से लेकर मोबाइल चार्ज करने तक, हर छोटी-बड़ी गतिविधि बिजली पर ही टिकी है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भारत में बिजली की बुनियाद कहां रखी गई थी? किस शहर ने सबसे पहले अंधेरे को पीछे छोड़ा और उस दौर में बने पहले बिजलीघर की ताकत आखिर कितनी थी? आइए जानते हैं उस इतिहास को, जो आज से सैकड़ों साल पहले लिखा गया था।
भारत में बिजली की शुरुआत उस शहर से हुई, जो उस दौर में देश की राजधानी और आर्थिक राजधानी था—कोलकाता (तब का कलकत्ता)। 19वीं सदी के अंत में जब देश के अन्य हिस्सों में गैस लैंप या तेल के दीये रोशन होते थे, तब कोलकाता ने बिजली की रोशनी को अपनाया। 1880 के दशक में यहां संगठित रूप से बिजली उत्पादन की शुरुआत हुई, जिसने इतिहास में नया मुकाम दिलाया।
भारत का पहला बिजलीघर (Electricity Plant) कोलकाता में स्थापित किया गया था। यह प्लांट डायरेक्ट करंट (DC) प्रणाली पर आधारित था। इसका संचालन उस समय 'कलकत्ता इलेक्ट्रिक सप्लाई कंपनी' करती थी, जो आगे चलकर CESC Limited के नाम से प्रसिद्ध हुई।
अगर आप सोच रहे हैं कि उस दौर की तकनीक कितनी शक्तिशाली थी, तो आंकड़े आपको हैरान कर सकते हैं। उस समय यह बिजलीघर लगभग 1,300 बल्बों को रोशन करने में सक्षम था। हालांकि आज के मानकों में यह क्षमता बहुत कम लग सकती है, लेकिन उस युग में यह एक बड़ी तकनीकी क्रांति थी। खास बात यह थी कि उस दौर में ही बिजली की तारें जमीन के नीचे बिछाई गई थीं, जो एक आधुनिक और सुरक्षित कदम माना जाता था।
जब पहली बार सड़कों पर बिजली के बल्ब जले, तो यह दृश्य आम लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं था। उस समय के ग्रामीण और अशिक्षित लोगों के लिए बिजली एक अनसुलझी पहेली थी। कहा जाता है कि कई लोग इसे अंग्रेजों की जादुई ताकत मानते थे। लोग अपने बच्चों को उस 'आग भरे कांच' (बल्ब) के पास जाने से रोकते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि आग को कांच के अंदर कैद कर दिया गया है, जो कभी भी फट सकता है।
धीरे-धीरे डर कम हुआ और तकनीक ने जीवन में जगह बनाई। बाजार, दफ्तर और अमीर घर बिजली की रोशनी से जगमगाने लगे। सिर्फ रोशनी ही नहीं, बल्कि बिजली से चलने वाले पंखों की शुरुआत भी सबसे पहले कोलकाता से ही हुई। 1902 के आसपास जब इलेक्ट्रिक फैन लगने लगे, तो लोगों को घूमते हुए पंखे से गिरने का डर सताता था, लेकिन समय के साथ वह डर भी उम्मीद और सुविधा में बदल गया। Electricity Plant