जाने 1587 की वह घटना जिसने यूरोप की राजनीति बदल दी
मैरी पर अपनी चचेरी बहन और इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। एलिजाबेथ ने 1 फरवरी 1587 को मैरी के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर किए थे। इससे पहले मैरी को पिछले 19 वर्षों तक इंग्लैंड में नजरबंद रखा गया था।

History of England : इतिहास के पन्नों में 8 फरवरी 1587 की तारीख हमेशा के लिए दर्ज हो गई, जब स्कॉटलैंड की रानी मैरी को इंग्लैंड के फोदरिंगहे कैसल में एक भयावह फांसी दी गई। यह सिर्फ एक फांसी नहीं थी, बल्कि दो खून के रिश्तों और दो रानियों के बीच चली सत्ता की लड़ाई का खूनी अंत था। रानी मैरी की मौत का यह मंजर इतना भयावह था कि उसने इतिहासकारों को भी झकझोर कर रख दिया था।
तीन वारों से कटा सिर
उस दिन मैरी आंखों पर पट्टी बांधे हुए, विशेष रूप से तैयार किए गए मचान पर एक तकिये पर घुटने टेककर बैठीं और लैटिन भाषा में प्रार्थना करने लगीं। जल्लाद ने कुल्हाड़ी से प्रहार किया, लेकिन दुर्भाग्य से उसका पहला वार चूक गया और वह गर्दन के बजाय सिर पर लगा। दूसरे प्रहार से गर्दन लगभग कट गई, लेकिन एक छोटी सी हड्डी आड़े आ गई। अंततः तीसरे प्रहार में उनका सिर पूरी तरह से धड़ से अलग हो गया।
जल्लाद ने कटा हुआ सिर उठाकर भीड़ के सामने कुल्हाड़ी चलाते हुए चिल्लाया- "ईश्वर महारानी एलिजाबेथ की रक्षा करें!" इसी दौरान एक चौंकाने वाली घटना घटी- सिर पर लगी भूरी विग नीचे गिर गई और मैरी के छोटे-छोटे भूरे बाल सबके सामने आ गए, जो उनकी असली पहचान और बुढ़ापे के प्रतीक बन गए। वहीं, अर्ल ऑफ केंट ने शव के ऊपर खड़े होकर घोषणा की कि रानी और उनके सभी शत्रुओं का यही अंत होता है।
19 साल की नजरबंदी और साजिश का आरोप
मैरी पर अपनी चचेरी बहन और इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। एलिजाबेथ ने 1 फरवरी 1587 को मैरी के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर किए थे। इससे पहले मैरी को पिछले 19 वर्षों तक इंग्लैंड में नजरबंद रखा गया था। मैरी की मौत का रास्ता तब खुला जब 1586 में एलिजाबेथ की हत्या की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ और मैरी को इसमें शामिल पाए जाने के बाद राजद्रोह का दोषी ठहराया गया।
सिंहासन से गिरकर फांसी तक का सफर
मैरी का जीवन एक उतार-चढ़ाव भरा सफर रहा। 1542 में महज छह दिन की उम्र में उन्होंने स्कॉटलैंड की गद्दी संभाली थी। फ्रांस में पली-बढ़ीं मैरी का विवाह फ्रांस के राजा फ्रांसिस द्वितीय से हुआ, लेकिन विवाह के एक साल बाद ही फ्रांसिस की मृत्यु हो गई। स्कॉटलैंड लौटने के बाद उन्होंने 1565 में अपने चचेरे भाई लॉर्ड डार्नले से शादी कर ली, ताकि अंग्रेजी सिंहासन पर अपना दावा मजबूत किया जा सके।
हालांकि, इस शादी ने उनकी किस्मत का तारा मंद कर दिया। 1567 में डार्नले की रहस्यमय तरीके से हत्या हो गई, जिसमें मैरी के प्रेमी अर्ल ऑफ बोथवेल पर संदेह बना। बोथवेल से शादी करने के फैसले ने स्कॉटिश लॉर्ड्स को भड़का दिया। मैरी को हार का सामना करना पड़ा और उन्हें अपने बेटे जेम्स VI के पक्ष में सिंहासन छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
बेटे की चुप्पी और आखिरी फैसला
1568 में कैद से भागकर मैरी इंग्लैंड पहुंचीं, लेकिन यहां एलिजाबेथ ने उन्हें सुरक्षा के बहाने नजरबंद कर लिया। मैरी कैथोलिक साजिशों का केंद्र बनती चली गईं, जिसके चलते अंततः उन्हें मौत की सजा दी गई। सबसे विडंबना यह रही कि मैरी की मौत के बाद उनके बेटे जेम्स VI ने इसे शांतिपूर्वक स्वीकार किया और किसी भी तरह की बगावत या विरोध से परहेज किया। इतिहास गवाह है कि 1603 में एलिजाबेथ की मृत्यु के बाद यही जेम्स इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और आयरलैंड का राजा बना। इस तरह, मां के खून की कीमत पर बेटे को तीनों देशों का सिंहासन मिला। History of England
History of England : इतिहास के पन्नों में 8 फरवरी 1587 की तारीख हमेशा के लिए दर्ज हो गई, जब स्कॉटलैंड की रानी मैरी को इंग्लैंड के फोदरिंगहे कैसल में एक भयावह फांसी दी गई। यह सिर्फ एक फांसी नहीं थी, बल्कि दो खून के रिश्तों और दो रानियों के बीच चली सत्ता की लड़ाई का खूनी अंत था। रानी मैरी की मौत का यह मंजर इतना भयावह था कि उसने इतिहासकारों को भी झकझोर कर रख दिया था।
तीन वारों से कटा सिर
उस दिन मैरी आंखों पर पट्टी बांधे हुए, विशेष रूप से तैयार किए गए मचान पर एक तकिये पर घुटने टेककर बैठीं और लैटिन भाषा में प्रार्थना करने लगीं। जल्लाद ने कुल्हाड़ी से प्रहार किया, लेकिन दुर्भाग्य से उसका पहला वार चूक गया और वह गर्दन के बजाय सिर पर लगा। दूसरे प्रहार से गर्दन लगभग कट गई, लेकिन एक छोटी सी हड्डी आड़े आ गई। अंततः तीसरे प्रहार में उनका सिर पूरी तरह से धड़ से अलग हो गया।
जल्लाद ने कटा हुआ सिर उठाकर भीड़ के सामने कुल्हाड़ी चलाते हुए चिल्लाया- "ईश्वर महारानी एलिजाबेथ की रक्षा करें!" इसी दौरान एक चौंकाने वाली घटना घटी- सिर पर लगी भूरी विग नीचे गिर गई और मैरी के छोटे-छोटे भूरे बाल सबके सामने आ गए, जो उनकी असली पहचान और बुढ़ापे के प्रतीक बन गए। वहीं, अर्ल ऑफ केंट ने शव के ऊपर खड़े होकर घोषणा की कि रानी और उनके सभी शत्रुओं का यही अंत होता है।
19 साल की नजरबंदी और साजिश का आरोप
मैरी पर अपनी चचेरी बहन और इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया था। एलिजाबेथ ने 1 फरवरी 1587 को मैरी के डेथ वारंट पर हस्ताक्षर किए थे। इससे पहले मैरी को पिछले 19 वर्षों तक इंग्लैंड में नजरबंद रखा गया था। मैरी की मौत का रास्ता तब खुला जब 1586 में एलिजाबेथ की हत्या की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ और मैरी को इसमें शामिल पाए जाने के बाद राजद्रोह का दोषी ठहराया गया।
सिंहासन से गिरकर फांसी तक का सफर
मैरी का जीवन एक उतार-चढ़ाव भरा सफर रहा। 1542 में महज छह दिन की उम्र में उन्होंने स्कॉटलैंड की गद्दी संभाली थी। फ्रांस में पली-बढ़ीं मैरी का विवाह फ्रांस के राजा फ्रांसिस द्वितीय से हुआ, लेकिन विवाह के एक साल बाद ही फ्रांसिस की मृत्यु हो गई। स्कॉटलैंड लौटने के बाद उन्होंने 1565 में अपने चचेरे भाई लॉर्ड डार्नले से शादी कर ली, ताकि अंग्रेजी सिंहासन पर अपना दावा मजबूत किया जा सके।
हालांकि, इस शादी ने उनकी किस्मत का तारा मंद कर दिया। 1567 में डार्नले की रहस्यमय तरीके से हत्या हो गई, जिसमें मैरी के प्रेमी अर्ल ऑफ बोथवेल पर संदेह बना। बोथवेल से शादी करने के फैसले ने स्कॉटिश लॉर्ड्स को भड़का दिया। मैरी को हार का सामना करना पड़ा और उन्हें अपने बेटे जेम्स VI के पक्ष में सिंहासन छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।
बेटे की चुप्पी और आखिरी फैसला
1568 में कैद से भागकर मैरी इंग्लैंड पहुंचीं, लेकिन यहां एलिजाबेथ ने उन्हें सुरक्षा के बहाने नजरबंद कर लिया। मैरी कैथोलिक साजिशों का केंद्र बनती चली गईं, जिसके चलते अंततः उन्हें मौत की सजा दी गई। सबसे विडंबना यह रही कि मैरी की मौत के बाद उनके बेटे जेम्स VI ने इसे शांतिपूर्वक स्वीकार किया और किसी भी तरह की बगावत या विरोध से परहेज किया। इतिहास गवाह है कि 1603 में एलिजाबेथ की मृत्यु के बाद यही जेम्स इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और आयरलैंड का राजा बना। इस तरह, मां के खून की कीमत पर बेटे को तीनों देशों का सिंहासन मिला। History of England












