दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक निर्देश पर राहुल गांधी खासे सख्त शब्दों में अपना विरोध दर्ज कराया।

कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी एक निर्देश पर भड़क गए। डीयू ने स्टूडेंट्स से जंतर-मंतर पर हो रहे प्रदर्शन से दूर रहने को कहा था।
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, ''लोकतांत्रिक अधिकारों का इस्तेमाल करने पर छात्रों को धमकाने की आपकी हिम्मत कैसे हुई? याद रखिए, समय आने पर आपको ही इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाएगा।''
डीयू ने क्या निर्देश दिया?
दिल्ली यूनिवर्सिटी ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंटर पर गुरुवार (23 जुलाई) रात 9.02 पर एक पोस्ट की। इसमें कहा गया, "प्रिय छात्रों और फैकल्टी सदस्यों, आपकी सुरक्षा हमारे लिए महत्वपूर्ण है। कृपया ध्यान दें कि जंतर-मंतर, नई दिल्ली में किसी भी तरह की गैर-कानूनी सभा या प्रदर्शन—जिन पर भारत के माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार कड़े नियम लागू हैं—कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकती है। ऐसी गतिविधियों से छात्रों की व्यक्तिगत सुरक्षा को गंभीर खतरा हो सकता है और उनकी पढ़ाई-लिखाई की प्रगति व करियर के अवसरों पर भी बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए, सभी छात्रों से आग्रह है कि वे जंतर-मंतर से दूर रहें और अपनी सुरक्षा तथा कानून का पालन करने को प्राथमिकता दें। साथ ही, आपको सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है क्योंकि स्थिति को भड़काने के लिए काफी मात्रा में नकली और गुमराह करने वाली जानकारी बनाई और फैलाई जा रही है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी
बता दें नीट-यूजी परीक्षा पेपर के लीक होने के बाद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग लेकर अब भी बड़ी तादाद में स्टूडेंट्स जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि इस आंदोलन का चेहरा रहे। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गुरुवार को आधी रात के बाद 26 दिनों के बाद अपना अनशन ख़त्म कर दिया है।
हालांकि छात्रों के प्रदर्शन की अगुवाई कर रही कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया किया वांगचुक के अनशन तोड़ देने के बाद भी विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने कहा, "अब हमारा विरोध जारी रहेगा क्योंकि यह आंदोलन एक देशव्यापी अभियान बन चुका है। देश के युवाओं की मांग बहुत सरल और स्पष्ट है... सिर्फ़ एक ही मांग है... धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए। जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन तब तक जारी रहेगा जब तक धर्मेंद्र प्रधान पद नहीं छोड़ देते। अगर बीजेपी या सरकार इस मुद्दे को सुलझाना चाहती है, तो इसका सिर्फ़ एक ही समाधान है... धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही होगा।"
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