1979 से सेवा में, लेकिन 2025 में क्यों बार-बार क्रैश हो रहा है जगुआर?
भारत
RP Raghuvanshi
30 Nov 2025 02:51 PM
भारत
RP Raghuvanshi
30 Nov 2025 02:51 PM
फिर हादसे का शिकार हुआ भारतीय वायुसेना का जगुआर: राजस्थान के चूरू जिले में मंगलवार दोपहर एक बार फिर भारतीय वायुसेना का जगुआर फाइटर जेट क्रैश हो गया। यह हादसा रतनगढ़ क्षेत्र में हुआ, जहां दोपहर करीब 12 बजकर 40 मिनट पर एक नियमित प्रशिक्षण उड़ान के दौरान विमान खेत में आकर गिरा। इस दुखद घटना में पायलट और को-पायलट दोनों की जान चली गई। स्थानीय प्रशासन और वायुसेना की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और इलाके को घेर लिया गया।
वायुसेना ने जताया शोक, जांच के दिए आदेश
भारतीय वायुसेना ने हादसे पर शोक जताते हुए एक बयान जारी किया है। बयान में कहा गया, "एक जगुआर प्रशिक्षक विमान आज राजस्थान के चुरू के पास नियमित प्रशिक्षण मिशन के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। भारतीय वायुसेना इस दुखद घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करती है और शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़ी है। दुर्घटना के कारणों की जांच के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दिए गए हैं।"
2025 में तीसरी बार हादसे का शिकार
यह साल 2025 में जगुआर फाइटर जेट का तीसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले 7 मार्च को हरियाणा के अंबाला एयरबेस से उड़ान भरते ही एक जगुआर विमान क्रैश हो गया था। उस हादसे में पायलट को मामूली चोटें आई थीं और तकनीकी खराबी को मुख्य कारण माना गया था। इसके बाद 2 अप्रैल को गुजरात के जामनगर में एक और जगुआर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें फ्लाइट लेफ्टिनेंट सिद्धार्थ यादव की जान चली गई थी। अब तीसरा हादसा चूरू में हुआ है, जिसने एक बार फिर सुरक्षा और तकनीकी तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जगुआर: एक अनुभवी लेकिन अब बूढ़ा हो चुका योद्धा?
SEPECAT जगुआर एक ब्रिटिश-फ्रांसीसी संयुक्त परियोजना के तहत 1970 के दशक में तैयार किया गया एक ग्राउंड अटैक फाइटर जेट है। भारतीय वायुसेना ने इसे 1979 में अपने बेड़े में शामिल किया था। दशकों से यह विमान देश की सेवा कर रहा है और कई अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा चुका है। यह खासतौर पर कम ऊंचाई पर दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमला करने के लिए जाना जाता है।
लेकिन अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह विमान समय के साथ अपनी उपयोगिता खो चुका है? लगातार हो रही तकनीकी दिक्कतें और दुर्घटनाएं इस ओर इशारा कर रही हैं कि जगुआर जैसे पुराने विमानों को सेवा से हटाने का समय आ गया है। हालांकि, आधिकारिक रूप से अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
तकनीकी जांच के नतीजे होंगे अहम
हर हादसे के बाद वायुसेना तकनीकी जांच कराती है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाती है। इस बार भी कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की रिपोर्ट के बाद ही साफ हो पाएगा कि हादसे की वजह पायलट की त्रुटि थी, तकनीकी खामी, या कोई और कारण। लेकिन यह तय है कि एक ही साल में तीन बार एक ही श्रेणी का विमान दुर्घटनाग्रस्त होना सामान्य बात नहीं है।
वायुसेना की क्षमता, सुरक्षा मानकों और आधुनिकरण की दिशा में यह हादसे एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखे जा रहे हैं। भविष्य में वायुसेना को न केवल तकनीकी रूप से उन्नत करने की ज़रूरत है, बल्कि ऐसे पुराने विमानों को क्रमिक रूप से सेवा से हटाने का भी विचार करना होगा।
वायुसेना का जगुआर हुआ दुर्घटनाग्रस्त, पायलट सहित दो शव बरामद