Big Breaking - केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी को मिली जान से मारने की धमकी

केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। इस संबंध में उनके निजी सहायक ने दिल्ली पुलिस को शिकायत देकर गंभीर सुरक्षा चिंता जताई है।

जयंत चौधरी
जयंत चौधरी
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar20 Mar 2026 12:40 PM
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Jayant Chaudhary : केंद्रीय मंत्री और राष्ट्रीय लोक दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी को जान से मारने की धमकी मिलने का मामला सामने आया है। इस संबंध में उनके निजी सहायक ने दिल्ली पुलिस को शिकायत देकर गंभीर सुरक्षा चिंता जताई है। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि मंत्री की कथित रूप से जासूसी की जा रही थी, जिससे मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।

धमकी के साथ जासूसी की आशंका

शिकायत के अनुसार, 18 मार्च की सुबह निजी सहायक के फोन पर एक धमकी भरा कॉल आया। कॉल करने वाले ने कौशल विकास एवं उद्यमशीलता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी को जान से मारने की धमकी दी। फोन पर मिली इस चेतावनी के बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली पुलिस को तत्काल सूचना दी गई।

दावे से मामला हुआ और गंभीर

मामला केवल धमकी तक सीमित नहीं है। शिकायत में यह भी दावा किया गया है कि केंद्रीय मंत्री की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। यही वजह है कि इस पूरे घटनाक्रम को सामान्य धमकी नहीं, बल्कि सुरक्षा से जुड़े गंभीर प्रकरण के रूप में देखा जा रहा है। एक केंद्रीय मंत्री के खिलाफ इस तरह की धमकी और निगरानी के आरोप ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। दिल्ली पुलिस को दी गई शिकायत के बाद अब पूरे मामले की जांच की दिशा तय की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटेंगी कि धमकी देने वाला कौन था, कॉल कहां से आया और जासूसी के आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल इस प्रकरण ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। Jayant Chaudhary

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पांचवीं बार JDU अध्यक्ष बनने की ओर नीतीश कुमार, जल्द हो सकता है ऐलान

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। पार्टी की ओर से उनके नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है और माना जा रहा है कि वह इस पद पर निर्विरोध चुने जाएंगे।

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar19 Mar 2026 04:42 PM
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Bihar News : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार एक बार फिर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने जा रहे हैं। पार्टी की ओर से उनके नामांकन की प्रक्रिया पूरी कर दी गई है और माना जा रहा है कि वह इस पद पर निर्विरोध चुने जाएंगे। जानकारी के मुताबिक, नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। हालांकि वह खुद दिल्ली नहीं पहुंचे। उनकी ओर से जेडीयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने निर्वाचन अधिकारी अनिल हेगड़े को नामांकन पत्र सौंपा। पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने उनके नाम का प्रस्तावक बनकर समर्थन जताया है।

24 मार्च को हो सकती है आधिकारिक घोषणा

निर्वाचन अधिकारी अनिल हेगड़े ने बताया कि नीतीश कुमार के नामांकन पत्र दो सेट में प्राप्त हुए हैं। यदि 22 मार्च तक किसी अन्य उम्मीदवार का नामांकन दाखिल नहीं होता है, तो 24 मार्च को उन्हें औपचारिक रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित किया जा सकता है। संजय झा ने भी स्पष्ट किया कि अगर मुकाबले में दूसरा कोई उम्मीदवार नहीं आता है, तो नीतीश कुमार की ताजपोशी तय है। अध्यक्ष पद की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्टी की राष्ट्रीय परिषद और राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक भी आयोजित की जाएगी। चूंकि जेडीयू का राष्ट्रीय कार्यालय दिल्ली में स्थित है, इसलिए राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनका कार्यभार भी यहीं से संचालित होगा।

पांचवीं बार अध्यक्ष बनने की ओर नीतीश कुमार

पार्टी की ओर से जारी कार्यक्रम के अनुसार, 15 मार्च से 22 मार्च 2026 तक अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल किए जा सकते हैं। इसके बाद 23 मार्च को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 24 मार्च नाम वापस लेने की अंतिम तारीख तय की गई है। अगर एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में आते हैं, तो 27 मार्च को चुनाव कराया जाएगा। जेडीयू ने इस संबंध में 16 मार्च 2026 को औपचारिक चुनाव कार्यक्रम जारी किया था। यदि सब कुछ तय कार्यक्रम के मुताबिक रहा, तो जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में यह नीतीश कुमार का पांचवां कार्यकाल होगा। वह पहली बार अप्रैल 2016 में इस पद पर पहुंचे थे, जब उन्होंने वरिष्ठ नेता शरद यादव से कमान संभाली थी। इसके बाद 2019 में उन्हें दोबारा अध्यक्ष चुना गया। हालांकि 2020 में उन्होंने आरसीपी सिंह के लिए यह पद छोड़ा। बाद में दिसंबर 2023 में उन्होंने एक बार फिर पार्टी की कमान संभाली थी, जब उन्होंने अपने सहयोगी और मौजूदा केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह से राष्ट्रीय अध्यक्ष का पदभार लिया था। Bihar News

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गुजरात में हलाला प्रथा पर रोक की तैयारी, सदन में रखा गया UCC विधेयक

गुजरात सरकार ने राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश कर दिया है। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे नागरिक मामलों में सभी धर्मों, जातियों और समुदायों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।

हलाला प्रथा
हलाला प्रथा
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar19 Mar 2026 04:16 PM
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Gujarat News : गुजरात सरकार ने राज्य विधानसभा में समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक पेश कर दिया है। इस प्रस्तावित कानून का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप जैसे नागरिक मामलों में सभी धर्मों, जातियों और समुदायों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है। इस विधेयक को लेकर सबसे अधिक चर्चा उस प्रावधान की हो रही है, जिसमें हलाला जैसी प्रथा पर रोक की बात कही गई है। ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि हलाला क्या है, इसे लेकर विवाद क्यों है और इस पर आपत्ति क्यों जताई जाती रही है।

क्या होती है हलाला प्रथा?

हलाला, जिसे आम बोलचाल में निकाह हलाला कहा जाता है, मुस्लिम समाज से जुड़ा एक बेहद संवेदनशील और लंबे समय से विवादों में रहने वाला मुद्दा है। परंपरागत व्याख्या के अनुसार, यदि किसी महिला को उसके पति ने तलाक दे दिया हो और बाद में वही पति उससे दोबारा निकाह करना चाहे, तो यह सीधे संभव नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में महिला को पहले किसी दूसरे पुरुष से वैध निकाह करना होता है। इस दूसरे विवाह को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि वास्तविक वैवाहिक संबंध के रूप में देखा जाता है। बाद में यदि दूसरा विवाह समाप्त हो जाता है, तब महिला अपने पहले पति से दोबारा निकाह कर सकती है। हालांकि, इस विषय पर कई इस्लामी विद्वानों की राय है कि हलाला के नाम पर जो कुछ व्यवहार में कराया जाता है, उसमें मूल धार्मिक नियमों की अक्सर गलत व्याख्या की जाती है और कई बार उन्हें तोड़-मरोड़कर पेश किया जाता है।

इस्लामी विद्वानों की क्या है राय?

इस मुद्दे पर इस्लामी विद्वानों के बीच भी एक जैसी राय नहीं है। कई विद्वानों का कहना है कि हलाला के नाम पर जो कुछ व्यवहार में कराया जाता है, वह इस्लाम की मूल भावना के अनुरूप नहीं है। उनका तर्क है कि यदि किसी महिला का निकाह सिर्फ इस उद्देश्य से किसी दूसरे पुरुष से कराया जाए कि बाद में वह पहले पति के पास लौट सके, तो ऐसी पूर्वनियोजित व्यवस्था धार्मिक रूप से स्वीकार्य नहीं मानी जाती।

कई इस्लामी जानकार यह भी मानते हैं कि हलाला के लिए दूसरा निकाह वास्तविक और वैध होना चाहिए, न कि किसी तयशुदा समझौते या औपचारिकता के रूप में। यदि यह पूरी प्रक्रिया दबाव, सौदेबाजी या मजबूरी के आधार पर कराई जाए, तो यह न केवल धार्मिक दृष्टि से गलत है, बल्कि नैतिक और कानूनी सवाल भी खड़े करती है।

हलाला की आलोचना क्यों होती है?

हलाला प्रथा का विरोध करने वालों का कहना है कि यह महिलाओं की गरिमा, स्वतंत्रता और अधिकारों के खिलाफ है। आलोचकों के अनुसार, किसी महिला को अपने पहले पति से दोबारा विवाह करने के लिए किसी तीसरे पुरुष से निकाह करने की शर्त में बांधना उसके सम्मान और इच्छा, दोनों के साथ समझौता है। महिला अधिकारों से जुड़े कई समूहों का मानना है कि इस तरह की व्यवस्था महिलाओं को मानसिक, सामाजिक और शारीरिक दबाव में डाल सकती है। इसी वजह से हलाला को लेकर लगातार कानूनी, सामाजिक और धार्मिक स्तर पर बहस होती रही है।

गुजरात के UCC विधेयक से क्या बदल सकता है?

गुजरात विधानसभा में पेश किए गए UCC विधेयक का मकसद नागरिक कानूनों में समानता लाना है। यदि यह विधेयक कानून बनता है, तो विवाह, तलाक, पुनर्विवाह, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े नियम धर्म आधारित अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों के बजाय एक समान ढांचे में आ जाएंगे। ऐसी स्थिति में तीन तलाक और उससे जुड़ी हलाला जैसी प्रथाओं को कानूनी मान्यता नहीं मिलेगी। इसका सीधा असर यह होगा कि धर्म आधारित अलग-अलग व्यवस्थाओं की जगह सभी नागरिकों के लिए समान नियम लागू होंगे और हलाला जैसी प्रथा कानूनी रूप से अप्रासंगिक हो सकती है। Gujarat News

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