UPSC का फाइनल रिजल्ट हुआ घोषित, देश को मिले 958 अफसर

UPSC की परीक्षा में सफल हुए अभ्यार्थी IAS , IPS तथा IFS अधिकारी बनेंगे। शुक्रवार को घोषित किए गए रिजल्ट में बताया गया है कि इस बार अनुज अग्रिहोत्री ने UPSC की परीक्षा में टॉप किया है।

UPSC फाइनल रिजल्ट आउट
UPSC फाइनल रिजल्ट आउट
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar06 Mar 2026 03:44 PM
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UPSC Result 2025 final result : भारत में सबसे कठिन परीक्षा संघ लोक सेवा आयोग (UPSC ) की होती है। शुक्रवार दोपहर को UPSC ने वर्ष-2025 की परीक्षा का फाइनल रिजल्ट घोषित कर दिया है। UPSC का रिजल्ट घोषित होते ही भारत को 958 नए अफसर मिल गए हैं UPSC की परीक्षा में सफल हुए अभ्यार्थी IAS , IPS तथा IFS अधिकारी बनेंगे। शुक्रवार को घोषित किए गए रिजल्ट में बताया गया है कि इस बार अनुज अग्रिहोत्री ने UPSC की परीक्षा में टॉप किया है।

UPSC की परीक्षा में टॉप अभ्यर्थियों

 में पुरूषों का दबदबा

UPSC की वर्ष-2025 की परीक्षा के रिजल्ट में पुरूषों का बोलबाला रहा है। UPSC परीक्षा में टॉप-10 की बात करें तो इस परीक्षा को राजस्थान के रहने वाले अनुज अग्रिहोत्री ने टॉप किया है। दूसरे स्थान पर सुश्री राजेश्वरी सुले एम रही हैं। तीसरा स्थान आंकाश ढुल ने हासिल किया है। चौथे स्थान पर रहे हैं। चौथा स्थान राघव झुनझुनवाला को मिला है। पाँचवें नम्बर पर ईशान भटनागर ने बाजी मारी है। सुश्री जिनिमा अरोड़ा ने UPSC की टॉप-10 की सूची में छठा स्थान प्राप्त किया है। सातवें स्थान पर एआर राजा मोहिदीन रहे हैं। आठवां स्थान पक्षाल सेक्रेटरी ने हासिल किया है। नौंवे स्थान पर आस्था जैन तथा 10वें नम्बर पर उज्जवल प्रियंक ने बाजी मारी है।

देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में 958 उम्मीदवारों का चयन

UPSC की वर्ष 2025 की परीक्षा में सफल होने वाले अभ्यार्थियों में 317 जनरल कैटेगरी, 104 ईडब्ल्यूएस, 3306 ओबीसी, 158 एससी, 73 एसटी वर्ग के हैं। UPSC परीक्षा के लिए कुल 958 पदों पर भर्ती की घोषणा की गई थी. इसके लिए परीक्षा का आयोजन 22 अगस्त से 31 अगस्त 2025 के बीच किया गया था, हालांकि UPSC की परीक्षा का इंटरव्यू 26 फरवरी 2026 को पूरा हो गया था। UPSC की परीक्षा में अगर IAS पद की बात करें, तो इसके लिए कुल 180 पद खाली हैं. इनमें सामान्य वर्ग के लिए 74 पद, ओबीसी के लिए 47, अनुसूचित जाति के लिए 28 पद, आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग के लिए 18 पद और अनुसूचित जनजाति के लिए 13 पद निर्धारित किए गए हैं। UPSC Result 2025 final result

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पत्नी जेल, प्रेमी फरार! सऊदी लौटे युवक की हत्याकांड का पर्दाफाश

शाम को रमजान के मुबारक महीने में इफ्तार की तैयारी चल रही थी। तभी एहसान की पत्नी शमरीन ताज ने उसे फोन कर अपने मायके (दोहमोहनी गांव) इफ्तारी के लिए बुला लिया। पत्नी के बुलावे पर एहसान बाइक से निकल पड़ा, लेकिन वह ससुराल कभी नहीं पहुंच सका।

Youth's murder case exposed
बिहार से दिल दहलाने वाला मामला (फाइल फोटो)
locationभारत
userऋषि तिवारी
calendar06 Mar 2026 03:34 PM
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Bihar Crime News : ईरान-इजराइल युद्ध के बढ़ते तनाव और हवाई हमलों के डर से बचने के लिए जब एहसान रजा अपने वतन लौटा, तो उसने सोचा भी नहीं होगा कि युद्ध के मैदान से बचकर वह अपने ही घर में बुनी गई मौत की साजिश का शिकार हो जाएगा। बिहार के किशनगंज जिले से सामने आए इस मामले ने 'रिश्तों के मायाजाल' की करारी सच्चाई को उजागर कर दिया है, जहां पति की तरक्की के सपनों को पत्नी ने अपने अवैध संबंधों के चलते कब्र में उतार दिया।

18 महीने बाद लौटा था घर

कोचाधामन थाना क्षेत्र के भागपुनास गांव निवासी एहसान रजा शादी के महज तीन महीने बाद परिवार का गुजारा बेहतर बनाने के लिए सऊदी अरब चला गया था। करीब डेढ़ साल (18 महीने) तक वहां कड़ी मेहनत कर वह घर पैसे भेजता रहा। 5 मार्च को जब वह घर लौटा तो परिवार में खुशी का माहौल था, लेकिन यह खुशी बहुत क्षणिक साबित हुई।

इफ्तार के नाम पर बुलाकर दी गई मौत की दावत

शाम को रमजान के मुबारक महीने में इफ्तार की तैयारी चल रही थी। तभी एहसान की पत्नी शमरीन ताज ने उसे फोन कर अपने मायके (दोहमोहनी गांव) इफ्तारी के लिए बुला लिया। पत्नी के बुलावे पर एहसान बाइक से निकल पड़ा, लेकिन वह ससुराल कभी नहीं पहुंच सका। रात होते-होते रौटा थाना क्षेत्र के मलहारा मदरसा के पास एक पुलिया के नीचे उसका शव बरामद हो गया।

एक्सीडेंट नहीं, थी सोची-समझी हत्या

शुरुआत में पुलिस ने इसे सड़क दुर्घटना मानकर जांच शुरू की, लेकिन शव पर मिलने वाले चोटों ने पुलिस का ध्यान खींचा। एहसान के सिर के पीछे गहरा जख्म था, जबकि एक्सीडेंट होने पर चोट सामने की तरफ होनी चाहिए थी। साथ ही, मौके पर बाइक के दुर्घटना के कोई निशान नहीं थे। इसके बाद पुलिस ने हत्या की दिशा में तफ्तीश शुरू कर दी।

पत्नी की प्रेगनेंसी ने खोला राज

जांच के दौरान एहसान के पिता साबिर आलम ने पुलिस को अपनी बहू शमरीन और उसके चचेरे भाई सिराज अंजुम के संदिग्ध संबंधों के बारे में बताया। पुलिस ने जब शमरीन का चिकित्सीय परीक्षण कराया, तो सनसनीखेज खुलासा हुआ। शमरीन दो महीने की गर्भवती निकली, जबकि उसका पति पिछले 18 महीनों से विदेश में था। यहीं से पूरी कहानी का पर्दाफाश हुआ।

प्रेमी चाहता था बच्चा, पत्नी चाहती थी पति से छुटकारा

पुलिस की पूछताछ में शमरीन ने टूट गई और उसने अपने गुनाह को कबूल कर लिया। उसने बताया कि उसका अपने चचेरे भाई सिराज अंजुम के साथ निकाह से पहले से ही अवैध संबंध थे। पति के विदेश जाने के बाद दोनों फिर करीब आ गए और शमरीन गर्भवती हो गई।

जब पति के वापस आने की खबर लगी, तो दोनों घबरा गए। सिराज उस बच्चे को अपनाना चाहता था जबकि शमरीन अपने पति से छुटकारा पाना चाहती थी। इसके लिए दोनों ने मिलकर एक खौफनाक साजिश रची। शमरीन ने पति को फोन कर ससुराल बुलाया, जहां रास्ते में घात लगाए बैठे सिराज ने एहसान की बेरहमी से हत्या कर दी और शव को पुलिया के नीचे फेंककर उसे एक्सीडेंट का रूप देने की कोशिश की।

पुलिस की कार्रवाई

हत्या की साजिश का पर्दाफाश होने के बाद पुलिस ने आरोपी पत्नी शमरीन ताज को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, मुख्य आरोपी और प्रेमी सिराज अंजुम पुलिस की पकड़ से बचने के लिए फरार हो गया है। पुलिस टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही हैं। Bihar Crime News

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Bihar Politics: 30 साल में पलट गई सियासत, छोटा भाई से ‘बड़ा भाई’ कैसे बन गई BJP?

बिहार की राजनीति में 30 साल में बड़ा बदलाव आया है। कभी छोटा भाई रही BJP आज कैसे सबसे बड़ी ताकत बन गई? पढ़िए बिहार की बदलती सियासत की पूरी कहानी।

बिहार में BJP के बढ़ते कद की कहानी
बिहार में BJP के बढ़ते कद की कहानी
locationभारत
userआरपी रघुवंशी
calendar06 Mar 2026 02:08 PM
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Bihar Politics : बिहार की राजनीति में पिछले तीन दशकों में ऐसा बदलाव आया है जिसने सत्ता के पूरे समीकरण को बदल दिया। कभी गठबंधन में “छोटे भाई” की भूमिका निभाने वाली भारतीय जनता पार्टी आज राज्य की राजनीति में सबसे मजबूत ताकत बनती दिखाई दे रही है। वहीं लंबे समय तक सत्ता की कमान संभालने वाली जनता दल यूनाइटेड अब कई मौकों पर राजनीतिक रूप से पीछे नजर आती है। सवाल उठ रहा है कि आखिर 30 साल में ऐसा क्या हुआ कि बिहार की राजनीति में ताकत का संतुलन पूरी तरह बदल गया?

90 के दशक में BJP की सीमित ताकत

1990 के दशक में बिहार की राजनीति पर क्षेत्रीय दलों का दबदबा था। उस दौर में लालू प्रसाद यादव और बाद में नीतीश कुमार जैसे नेताओं का प्रभाव ज्यादा था। उस समय भाजपा को राज्य में मजबूत आधार बनाने के लिए सहयोगी दलों पर निर्भर रहना पड़ता था। गठबंधन की राजनीति में भाजपा को अक्सर “जूनियर पार्टनर” माना जाता था।

2005 में बदली सत्ता की तस्वीर

बिहार की राजनीति में बड़ा मोड़ 2005 में आया जब नीतीश कुमार के नेतृत्व में JDU-BJP गठबंधन ने चुनाव जीतकर सरकार बनाई।

इस चुनाव में:

  • JDU को ज्यादा सीटें मिलीं
  • BJP सहयोगी दल के रूप में सरकार में शामिल हुई

उस समय तक भी यह माना जाता था कि बिहार की राजनीति में नेतृत्व की कमान जेडीयू के हाथ में है।

2014 के बाद बढ़ने लगी BJP की ताकत

2014 के लोकसभा चुनाव के बाद राजनीतिक तस्वीर तेजी से बदलने लगी। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा ने देशभर में बड़ी जीत हासिल की और बिहार में भी उसका प्रभाव बढ़ने लगा।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार इसी दौर में भाजपा ने:

  • बूथ स्तर तक संगठन मजबूत किया
  • नए सामाजिक वर्गों में पैठ बनाई
  • युवाओं और शहरी वोटरों को जोड़ा

इन रणनीतियों का असर अगले चुनावों में साफ दिखाई देने लगा।

2020 चुनाव में पहली बार JDU से आगे निकली BJP

2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में पहली बार भाजपा ने अपने सहयोगी दल जेडीयू से ज्यादा सीटें जीतीं।

  • BJP – 74 सीट
  • JDU – 43 सीट

हालांकि मुख्यमंत्री फिर भी नीतीश कुमार ही बने, लेकिन इस चुनाव ने यह साफ संकेत दे दिया कि गठबंधन में भाजपा का कद अब पहले से कहीं ज्यादा बड़ा हो चुका है।

बदलते सामाजिक समीकरण भी बड़ी वजह

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भाजपा के उभार के पीछे सिर्फ चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि बदलते सामाजिक समीकरण भी हैं।

पिछले दशक में भाजपा ने बिहार में

  • गैर-यादव पिछड़ा वर्ग
  • अत्यंत पिछड़ा वर्ग
  • शहरी मध्यम वर्ग

के बीच अपना प्रभाव बढ़ाया है। इससे पार्टी का वोट बैंक तेजी से मजबूत हुआ।

आगे क्या होगा बिहार की राजनीति में?

बिहार की राजनीति अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुकी है। एक तरफ भाजपा का तेजी से बढ़ता प्रभाव है, तो दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनता दल और जेडीयू जैसी पार्टियों की चुनौती भी बरकरार है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले चुनावों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या भाजपा बिहार में पूरी तरह “बड़े भाई” की भूमिका में आ पाएगी या फिर राज्य की गठबंधन राजनीति कोई नया मोड़ लेगी।

निष्कर्ष

करीब 30 साल पहले बिहार में जो भाजपा सिर्फ सहयोगी दल के रूप में जानी जाती थी, वही आज राज्य की राजनीति की सबसे प्रभावशाली ताकतों में गिनी जा रही है। बिहार की यह बदलती सियासत आने वाले चुनावों में और भी दिलचस्प होने वाली है। Bihar Politics

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