
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में रणनीतिकार से सीधे चुनावी मैदान में उतरने वाले प्रशांत किशोर (PK) ने अपनी राजनीतिक चाल से सबको चौंका दिया है। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए रणनीतिकार से राजनीतिज्ञ बने प्रशांत किशोर (PK) ने पहली बार राघोपुर के अलावा करगहर से चुनाव लड़ने की योजना का संकेत दिया है । राघोपुर के अलावा करगहर से भी चुनाव लड़ने की उनकी योजना सिर्फ एक सीट जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनकी चुस्त-दुरुस्त रणनीति का हिस्सा है, जिसमें जातीय समीकरण, वोट बैंक विश्लेषण और पार्टी की विस्तार नीति का पूरा खाका शामिल है। PK की यह चाल यह दिखाती है कि वे चुनावी रणनीति के माहिर होने के साथ-साथ खुद को राजनीतिक मोर्चे पर कैसे मजबूत करना चाहते हैं। Prashant Kishore
रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर (PK) अपने ब्राह्मण जातीय पहचान का फायदा उठाते हुए, सवर्णों, दलितों और अल्पसंख्यकों के समीकरण पर भरोसा कर करगहर को कांग्रेस से छीनने की योजना पर काम कर रहे हैं। पिछली बार कांग्रेस के संतोष मिश्रा ने यहां सिर्फ 5 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन हालिया लोकसभा चुनाव ने दिखा दिया कि कांग्रेस का प्रभाव कमजोर पड़ चुका है। PK की यह रणनीति यही संदेश देती है कि वे बिहार की राजनीति में सिर्फ सलाहकार नहीं, बल्कि निर्णायक खिलाड़ी बनने की ओर बढ़ रहे हैं।
करगहर विधानसभा सीट 2008 के परिसीमन के बाद बनी। यह क्षेत्र सवर्ण बहुल है, जहां लगभग 20 प्रतिशत वोट ब्राह्मण, राजपूत और भूमिहार समुदाय के हैं। इसके अलावा कुर्मी-कोइरी और रविदास जैसी जातियों के मतदाता भी इस सीट पर निर्णायक भूमिका निभाते हैं। अल्पसंख्यक समुदाय के वोटर्स करीब 7 प्रतिशत हैं। प्रशांत किशोर स्वयं ब्राह्मण समुदाय से हैं और उन्हें उम्मीद है कि सवर्णों, दलितों और अल्पसंख्यकों के मतों के मिश्रण से यह सीट कांग्रेस से छीनना संभव होगा। पिछली बार कांग्रेस के संतोष मिश्रा ने करगहर में केवल 5 हजार वोटों से जीत दर्ज की थी, लेकिन हालिया लोकसभा चुनाव में कांग्रेस यहां पिछड़ गई थी। Prashant Kishore
चुनाव आयोग के 2024 के आंकड़ों के मुताबिक करगहर में करीब 3 लाख 30 हजार मतदाता हैं।
ब्राह्मण, राजपूत और भूमिहार समुदाय के वोटर्स कुल मिलाकर लगभग 20 प्रतिशत हैं।
कुर्मी-कोइरी और रविदास जातियों के मतदाताओं का दबदबा लगभग 30 प्रतिशत है।
इस सीट पर बीजेपी आम तौर पर उम्मीदवार नहीं उतारती; यह जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का गढ़ माना जाता है।
इन सभी कारणों के चलते PK करगहर को अपनी पहली प्राथमिकता मान रहे हैं।
राघोपुर विधानसभा सीट पर आरजेडी के तेजस्वी यादव के मजबूत पकड़ होने के कारण यह PK के लिए चुनौतीपूर्ण मैदान बन सकता है। अगर वे यहां चुनाव लड़ते हैं, तो महागठबंधन यह तर्क देगा कि प्रशांत किशोर कभी बीजेपी से जुड़े रहे और अब विपक्ष की ओर लौट रहे हैं। इसके साथ ही, राघोपुर में बीजेपी-जेडीयू गठबंधन के प्रभावी नेता भी हैं, जिससे PK को केवल विरोधी उम्मीदवारों के खिलाफ ही नहीं, बल्कि राजनीतिक दबाव और रणनीतिक खेल के बीच संतुलन बनाए रखना होगा। यह सीट उनके लिए जोखिम भरे चुनावी परिदृश्य का संकेत देती है, जहां रणनीति और समीकरणों का सटीक आंकलन जीत की कुंजी साबित हो सकता है। Prashant Kishore
जनसुराज पार्टी इस बार बिहार की सभी 243 विधानसभा सीटों पर चुनावी चुनौती देने की तैयारी में है। प्रशांत किशोर (PK) की टीम पहले ही बड़ी नेताओं की सीटों का रणनीतिक मैप तैयार कर रही है, ताकि हर इलाके में पार्टी की पकड़ मजबूत हो। पार्टी सूत्रों के मुताबिक राष्ट्रीय अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह से लेकर प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती तक सभी चुनावी मैदान में उतरने वाले हैं, और PK खुद भी जीत के दावेदार के रूप में सीधे मोर्चे पर दिखाई देंगे। यह दिखाता है कि PK सिर्फ सलाहकार नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में निर्णायक खिलाड़ी बनने की दिशा में अपनी रणनीति को सटीक रूप से अंजाम दे रहे हैं। Prashant Kishore