राजस्थान सरकार के पास वर्षों से जब्त 29.011 किलो सोना और 972.747 किलो चांदी सरकारी लॉकर में रखी है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी इस संपत्ति का समय पर निस्तारण नहीं किया गया।

Delhi News : राजस्थान सरकार के पास वर्षों से जब्त 29.011 किलो सोना और 972.747 किलो चांदी सरकारी लॉकर में रखी है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी इस संपत्ति का समय पर निस्तारण नहीं किया गया। दूसरी ओर, केंद्र सरकार के आंकड़े बताते हैं कि हाल के वर्षों में कस्टम और डीआरआई ने एयरपोर्ट पर हजारों करोड़ रुपये का सोना जब्त किया है। देशभर में सोने की तस्करी, भ्रष्टाचार और आर्थिक अपराधों के मामलों में बड़ी मात्रा में सोना-चांदी लगातार जब्त हो रहा है। लेकिन सवाल यह है कि अदालत से सरकार के नाम होने के बाद इस कीमती संपत्ति का क्या होता है? राजस्थान की ताजा सीएजी रिपोर्ट ने इसी मुद्दे को राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, राजस्थान सरकार के सरकारी लॉकर में 29.011 किलो सोना और 972.747 किलो चांदी वर्षों से सुरक्षित रखी हुई है। इसकी अनुमानित कीमत करीब 64.44 करोड़ रुपये आंकी गई है। सीएजी ने सरकार को सलाह दी है कि नियमों के अनुसार इनकी नीलामी या अन्य वैधानिक प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए, ताकि सरकारी संसाधनों पर अनावश्यक बोझ न बढ़े।
Delhi News
सीएजी रिपोर्ट के मुताबिक सरकारी अभिरक्षा में रखे गए सोने की अनुमानित कीमत लगभग 42.36 करोड़ रुपये और चांदी की कीमत करीब 22.08 करोड़ रुपये है। यह संपत्ति विभिन्न आपराधिक मामलों में जब्त की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि न्यायालय से सरकार के पक्ष में आदेश होने के बाद भी कई मामलों में इनका समय पर निस्तारण नहीं हुआ। इससे सुरक्षा, रखरखाव और रिकॉर्ड प्रबंधन पर लगातार सरकारी खर्च बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार जब्त संपत्ति का निस्तारण कई चरणों से गुजरता है। अदालत से अंतिम आदेश, विभागीय औपचारिकताएं, मूल्यांकन, स्वामित्व संबंधी रिकॉर्ड और नीलामी प्रक्रिया पूरी होने में लंबा समय लग सकता है। जब तक सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी नहीं होतीं, सरकार ऐसी संपत्ति को बेच नहीं सकती। इसी वजह से कई राज्यों में वर्षों तक जब्त सोना और चांदी सरकारी अभिरक्षा में पड़े रहते हैं।
Delhi News
हाल के महीनों में उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और बिहार समेत कई राज्यों में भ्रष्टाचार, आय से अधिक संपत्ति और आर्थिक अपराधों की जांच के दौरान बड़ी मात्रा में सोना और चांदी बरामद हुई है। उत्तर प्रदेश में विजिलेंस की कार्रवाई के दौरान एक सेवानिवृत्त परिवहन अधिकारी के ठिकानों से लगभग 13 किलो सोना और 9 किलो चांदी मिलने का मामला भी चर्चा में रहा। वहीं, भारतीय मानक ब्यूरो ने हॉलमार्किंग नियमों के उल्लंघन के मामलों में भी करोड़ों रुपये मूल्य के आभूषण जब्त किए हैं। केंद्र सरकार द्वारा संसद में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2022-23 से अक्टूबर 2025 तक कस्टम विभाग और राजस्व खुफिया निदेशालय ने देश के विभिन्न एयरपोर्ट पर 13,213 मामलों में 8,598.18 किलोग्राम सोना जब्त किया। इसकी अनुमानित कीमत 5,003.60 करोड़ रुपये बताई गई है। इन्हीं आंकड़ों से पता चलता है कि गोल्ड स्मगलिंग के खिलाफ एजेंसियों की कार्रवाई लगातार तेज हुई है। सबसे अधिक जब्ती वित्त वर्ष 2023-24 में दर्ज की गई, जबकि उसके बाद भी अभियान जारी रहा।
Delhi News
पिछले कुछ वर्षों में डीआरआई ने विभिन्न राज्यों में संयुक्त अभियान चलाकर सोने की तस्करी करने वाले कई गिरोहों का पर्दाफाश किया है। ऐसे अभियानों में दर्जनों किलोग्राम सोना जब्त किया गया, जिसे कथित तौर पर तस्करी के जरिए भारत लाया गया था और अलग-अलग राज्यों में पहुंचाया जा रहा था। जांच एजेंसियों का मानना है कि गोल्ड स्मगलिंग के नेटवर्क लगातार नए तरीके अपनाते हैं, इसलिए निगरानी और कार्रवाई भी लगातार बढ़ाई जा रही है। सीएजी का मानना है कि यदि कानूनी रूप से सरकार के स्वामित्व में आ चुकी संपत्तियों का समय पर निस्तारण नहीं होता, तो सरकारी संसाधन लंबे समय तक फंसे रहते हैं। इसके अलावा सुरक्षा, भंडारण और रिकॉर्ड रखने पर अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ता है। रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि पारदर्शी और समयबद्ध नीलामी व्यवस्था से सरकार को राजस्व भी मिल सकता है और रखरखाव का बोझ भी कम हो सकता है। अपराधियों से जब्त सोना बेचेगी सरकार? राजस्थान से एयरपोर्ट तक हजारों करोड़ का गोल्ड सरकारी कब्जे में
Delhi News
विज्ञापन