जनता के पैसों के साथ बड़ा घोटाला, सरकार ने किया चौंकाने वाला खुलासा
Willful Defaulters
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 09:27 PM
Willful Defaulters: देश की बैंकिंग व्यवस्था को झटका देने वाली एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। सरकार ने संसद में खुलासा किया है कि देश के सरकारी बैंकों से कर्ज लेकर जानबूझकर नहीं चुकाने वाले विलफुल डिफॉल्टर्स (Willful Defaylters) की संख्या 1600 से ज्यादा है। इन डिफॉल्टर्स ने बैंकों से कर्ज तो लिया लेकिन उसे चुकाने की नीयत नहीं दिखाई और अब ये ₹1.62 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रकम दबाए बैठे हैं।
यह आंकड़ा राज्यसभा में मानसून सत्र के दौरान वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी द्वारा पेश किया गया। उन्होंने बताया कि 31 मार्च 2025 तक सरकारी बैंकों ने 1629 कॉर्पोरेट कर्जदारों को विलफुल डिफॉल्टर घोषित किया है।
क्या होता है विलफुल डिफॉल्टर?
‘विलफुल डिफॉल्टर’ वे लोग या कंपनियां होती हैं जो कर्ज चुकाने की पूरी आर्थिक क्षमता रखने के बावजूद जानबूझकर भुगतान नहीं करते। अक्सर ये लोग खुद को कानूनी तौर पर दिवालिया घोषित कर लेते हैं ताकि कर्ज से बचा जा सके। ये बैंकिंग क्षेत्र के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं क्योंकि इनकी वजह से बैंकों की फाइनेंशियल हेल्थ कमजोर होती है।
सरकार का सख्त रुख
सरकार ने सिर्फ आंकड़े पेश नहीं किए, बल्कि यह भी बताया कि इन डिफॉल्टर्स के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जा रही है। मंत्री पंकज चौधरी ने बताया ऐसे कर्जदारों को नए ऋण की अनुमति नहीं दी जाती। पांच वर्षों तक नया बिजनेस शुरू करने पर रोक लगाई जाती है। इन्हें इक्विटी मार्केट में प्रवेश करने से भी रोका गया है, जिससे इनके लिए पूंजी जुटाना मुश्किल हो गया है। जरूरत पड़ने पर बैंकों को इनके खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज करने की छूट भी दी गई है। सरकार का उद्देश्य साफ है जानबूझकर कर्ज न चुकाने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना और बैंकिंग सेक्टर की विश्वसनीयता को बनाए रखना।
देश छोड़कर फरार हो चुके डिफॉल्टर्स को भी सरकार नहीं बख्श रही है। भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (Fugitive Economic Offenders Act) और धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) जैसे कानूनों के जरिए कार्रवाई की जा रही है। वित्त राज्य मंत्री ने बताया कि, अब तक 9 लोगों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है। इनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए 15,298 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है।
बड़ी रकम बड़ा खतरा
₹1.62 लाख करोड़ रुपये की राशि केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह देश की वित्तीय प्रणाली पर भारी दबाव का प्रतीक है। यह पैसा बैंकों से गया है, जो आम जनता की बचत से संचालित होते हैं। जब ये रकम वापिस नहीं आती तो इसका सीधा असर देश की आर्थिक स्थिरता, बैंकिंग सेक्टर की साख और आम लोगों की सुविधाओं पर पड़ता है।