
श्री तोमर ने कहा कि भारत कृषि प्रधान देश है, कृषि का क्षेत्र पशुपालन व सहकारिता के बिना अधूरा है, इसी के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने कृषि व सम्बद्ध क्षेत्रों के लिए आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत डेढ़ लाख करोड़ रुपये से ज्यादा के विशेष पैकेज घोषित किए हैं। पशुपालन व दुग्ध क्षेत्र में महिलाओं का बड़ा योगदान है, इनमें महिला सशक्तिकरण भी निहित है। प्रधानमंत्री ने पशुपालन व सहकारिता मंत्रालयों को अलग से बनाकर इनका बजट भी बढ़ाया है। इन सबके पीछे मूल भावना किसानों को लाभ पहुंचाना है। अब एग्री स्टार्टअप्स भी बढ़ रहे हैं।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने अपने संसदीय क्षेत्र के गोरस इलाके का उदाहरण देते हुए बताया कि यह इलाका गिर गाय का क्लस्टर हुआ करता था। वर्तमान में भी यहां करीब 30 हजार गोधन है, लेकिन गर्मी के दिनों में चारे की कमी के कारण पशुओं को चराने के लिए दूर ले जाना होता है, इस दिशा में अब काम शुरू कर दिया गया है। पशुओं को आहार कैसे मिले, इसके लिए जागरूकता कैसे बढ़े, इस पर भी ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि गोबर भी वेस्ट है। केंद्र सरकार ने गोबर धन योजना शुरू की है। गोबर का ऊर्जा के रूप में उपयोग कर सकते हैं। इससे जहां आमदनी बढ़ेगी, वहीं पर्यावरण को नुकसान से बचाया जा सकेगा। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि कोविड के बाद लोग स्वास्थ्य के प्रति सचेत हुए हैं। स्वच्छ और अच्छे उत्पादन की ओर बढ़ रहे हैं, भले ही चार पैसे ज्यादा लग जाएं। प्राकृतिक खेती की तरफ लोगों का ध्यान गया है। आर्गेनिक फार्मिंग व नेचुरल फार्मिंग का काम बढ़ रहा है। दुनिया में इसकी मांग है। हाल में देश ने पौने चार लाख करोड़ रुपये के एग्रीकल्चर प्रोडक्ट का एक्सपोर्ट किया है। इसमें बड़ी मात्रा आर्गेनिक प्रोडक्ट की है। उन्होंने कहा कि इस पूरे विमर्श में जो भी निष्कर्ष सामने आएंगे, सरकार उसे गंभीरता से लेगी और विचारपूर्वक आगे बढ़ेगी।