
भारत के पूर्व राष्ट्रपति तथा “मिसाइल मैन” के नाम से मशहूर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की जिंदगी और उनके विचार हर छात्र के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। असफलताओं ने उन्हें कभी हतोत्साहित नहीं किया और सफलता ने उन्हें आत्ममुग्ध नहीं बनने दिया। चाहे वे किसी भी पद पर रहे हों, उनका छात्रों के साथ संवाद हमेशा जीवंत और प्रेरक रहा। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का मानना था कि असफलताओं में निराश बैठना और उपलब्धियों पर घमंड करना दोनों ही गलत हैं। उन्होंने छात्रों को हमेशा यही सिखाया कि लगातार अध्ययन, मेहनत और नवाचार से ही जीवन में कुछ महान हासिल किया जा सकता है। World Students’ Day 2025
15 अक्टूबर, उनके जन्मदिन पर, विश्वभर में विश्व छात्र दिवस मनाया जाता है। 2010 में, संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस दिन को World Students’ Day के रूप में मान्यता दी, ताकि दुनिया के छात्र उनके योगदान और शिक्षाओं से प्रेरणा ले सकें। इस अवसर पर आइए जानें, कलाम और छात्रों के बीच हुए कुछ प्रेरक और अमूल्य संवाद, जो हर युवा के लिए मार्गदर्शक हैं। World Students’ Day 2025
“मिसाइल मैन” के नाम से मशहूर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम हमेशा छात्रों को यह समझाने की कोशिश करते थे कि सपने केवल सोते समय देखे जाने वाले नहीं होते, बल्कि वे सपने होने चाहिए जो आपको सोने न दें। उनका संदेश स्पष्ट था: सिर्फ सोचिए मत, उस सोच को हकीकत में बदलने का साहस और प्रयास भी कीजिए। इसके लिए उन्होंने रास्ता भी बताया - शिक्षा को सबसे शक्तिशाली हथियार मानिए, जिससे आप अपनी दुनिया और समाज को बदल सकते हैं। जितनी लगन और मेहनत से आप अध्ययन करेंगे, उतनी ही बड़ी सफलता की इबारतें आप अपने जीवन में लिखेंगे। बस ज़रूरत है संकल्प की और उसे पूरा करने के लिए समर्पण और कड़ी मेहनत की। World Students’ Day 2025
एक साधारण और निर्धन परिवार में जन्मे कलाम ने अथक परिश्रम और सीखने की लगन से भारत को मिसाइलमैन की पहचान दिलाई। वे न केवल एसएलवी-3, अग्नि और पृथ्वी जैसी महत्वपूर्ण तकनीकों के निर्माता थे, बल्कि भारतीय वैज्ञानिक समुदाय में उनका नाम विश्वसनीय और प्रेरक बन गया। उनके योगदान ने न केवल देश की रक्षा और वायु-आकाश प्रणालियों को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि युवा पीढ़ी में भी नया उत्साह और आत्मविश्वास भरा। “मिसाइल मैन” के नाम से मशहूर डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम कभी अपनी उपलब्धियों का घमंड नहीं करते थे और दूसरों से इसके लिए कोई प्रशंसा भी अपेक्षित नहीं रखते थे। उनका असली संदेश यही था कि हर छात्र के अंदर प्रतिभा की अग्नि होती है, बस उसे पहचानने, प्रेरित करने और प्रज्वलित करने की आवश्यकता होती है। World Students’ Day 2025
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम हमेशा छात्रों की जिज्ञासा को गंभीरता से लेते थे और उनके सवालों के जवाब देने में समय निकालते थे। राष्ट्रपति का पद अक्सर केवल औपचारिक और प्रतीकात्मक माना जाता है, लेकिन कलाम ने इसे छात्रों और युवाओं से जुड़ने का एक सजीव मंच बना दिया। उनका संवाद इतना सहज और प्रामाणिक था कि लोग उन्हें सच में “जनता का राष्ट्रपति” कहने लगे। एक अवसर पर अमृता विद्यालय, कोडुनग़ल्लूर के कक्षा 12 के छात्र आनंद एन ने उनसे पूछा, “हमेशा कहा जाता है कि हमें अनुशासित रहना चाहिए, पढ़ाई में मेहनत करनी चाहिए और ईमानदार बनना चाहिए।
ये तो सभी जानते हैं, लेकिन एक छात्र के लिए सबसे जरूरी गुण क्या हैं? डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने संक्षिप्त लेकिन प्रभावशाली उत्तर दिया - एक छात्र के लिए सबसे महत्वपूर्ण है अपने प्रति ईमानदार रहना और दूसरों के प्रति संवेदनशीलता का भाव रखना। यही गुण किसी भी युवा को आदर्श नागरिक बनने की दिशा में सबसे सशक्त मार्गदर्शक होंगे।
विकसित भारत के निर्माण में छात्रों की भूमिका को समझने के लिए बड़ोदरा के विद्याकुंज स्कूल के कक्षा छह के छात्र तुषार पहुरकर ने डॉ. कलाम से सवाल किया। उनका उत्तर साधारण शब्दों में भी गहन और प्रेरक था: एक छात्र के रूप में आप जिस भी कक्षा में पढ़ते हों, उसमें लगातार मेहनत करें। अपने जीवन के लिए स्पष्ट लक्ष्य तय करें और उसे हासिल करने के लिए ज्ञान और अनुभव जुटाएं। जीवन में आने वाली बाधाओं से न डरें, उनका सामना करें और हर चुनौती को अवसर में बदलें। निरंतर उत्कृष्टता की ओर बढ़ते रहें। मुश्किलों के सामने कभी हार न मानें। साथ ही, गरीब और वंचित बच्चों की शिक्षा में मदद करें और अधिक से अधिक पौधारोपण करें। ऐसे छोटे-छोटे प्रयास न केवल हमें बल्कि पूरे देश को समृद्धि और विकास की ओर ले जाते हैं।
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम हमेशा मानते थे कि देश की शिक्षा प्रणाली में कमियां हो सकती हैं, लेकिन इन्हें दूर करने की असली ताकत अच्छे शिक्षक में निहित है। गुलबर्ग की छात्रा स्नेहा जावलकर ने उनसे सवाल किया कि हमारी शिक्षा प्रणाली एक-आयामी, तनावपूर्ण और दोषपूर्ण है। ऐसी शिक्षा में छात्र राष्ट्र निर्माण में कैसे योगदान दे सकते हैं? कलाम ने उत्तर दिया: हमारी शिक्षा प्रणाली को बहुआयामी होना चाहिए और यह केवल ज्ञान देने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। इसका उद्देश्य आदर्श नागरिकों का निर्माण होना चाहिए और इसमें सबसे बड़ा योगदान एक समर्पित शिक्षक कर सकता है।
शिक्षक वह होना चाहिए जो अपने शिक्षण कार्य और छात्रों से प्रेम करता हो, प्रभावी शिक्षण के लिए आवश्यक सभी ज्ञान रखता हो, और बच्चों की दृष्टि में एक आदर्श व्यक्तित्व का परिचय देता हो। उसका आत्मसम्मान ऊंचा हो, ताकि वह छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सके। कलाम के अनुसार, अच्छा शिक्षक केवल पढ़ाता नहीं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, चरित्र और नैतिक मूल्यों को भी आकार देता है। यही वह आधार है जिस पर एक सशक्त और विकसित राष्ट्र की नींव टिकी होती है।
भारतीय युवा प्रतिभाओं का विदेश जाना, विशेषकर रोजगार के अवसरों की तलाश में, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के लिए चिंता का कारण कभी नहीं था। बेंगलुरु के एआईटीईसी के छात्र संदीप ने उनसे पूछा कि क्या इसे रोकने के लिए कोई कदम उठाने चाहिए। कलाम ने स्पष्ट किया: भारत में हर साल लगभग तीन लाख इंजीनियर अपनी डिग्री लेकर दुनिया की ओर बढ़ते हैं। इसके अलावा, मेडिकल और अन्य क्षेत्रों के लगभग एक लाख छात्र भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। ऐसे विशाल आंकड़ों वाले देश में यदि कुछ छात्र विदेश चले भी जाएं, तो इससे घबराने की जरूरत नहीं है। वे अपने परिवार और शिक्षा संस्थानों से जुड़े रहते हैं और वहां से भी देश के विकास में महत्वपूर्ण योगदान कर रहे हैं। World Students’ Day 2025
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम छोटे बच्चों पर पढ़ाई का भारी बोझ और माता-पिता का प्रदर्शन दबाव अनुचित मानते थे। नागपुर के संदीपनी स्कूल के कक्षा आठ के छात्र देवांग पांडे ने उनसे पूछा कि बच्चों को विषय चयन में कितनी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने स्पष्ट किया कि उनके अनुभव में, बारहवीं कक्षा के बाद छात्रों को अपने रुचि और क्षमता के अनुसार विषय चुनने की पूरी स्वतंत्रता दी जानी चाहिए। माता-पिता का दायित्व बच्चों का मार्गदर्शन करना है, लेकिन उनकी रुचियों और पसंद का सम्मान करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। छात्रों को विषय चयन में मित्रों या सहपाठियों के विचारों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए, बल्कि स्वयं अपनी समझ और अभिरुचि के आधार पर निर्णय लेना चाहिए। World Students’ Day 2025
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भारतीय छात्रों के उज्जवल भविष्य के प्रति हमेशा आश्वस्त थे। उनका मानना था कि राष्ट्र को बदलने और विकसित करने के लिए छात्रों को अपने कौशल और नेतृत्व क्षमता का प्रदर्शन करने का अवसर मिलना चाहिए। चाहे वह मंगल मिशन हो या चंद्रमा मिशन, छात्रों के लिए सीखने और खोजने की कोई सीमा नहीं है। भाषा के महत्व पर कलाम ने कहा कि मातृभाषा में शिक्षा बच्चों को अपने विचारों के प्रति नजदीकी और गहन समझ देती है, जबकि अंग्रेजी जैसी वैश्विक संपर्क भाषा छात्रों को दुनिया से जोड़ती है। World Students’ Day 2025
चेन्नई के छात्र एस. विजय आनंद के सवाल पर उन्होंने बताया कि उन्होंने माध्यमिक स्तर तक पढ़ाई मातृभाषा में पूरी की, और कॉलेज की पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से। उनका संदेश स्पष्ट था: कॉलेज में भी मातृभाषा का माध्यम चुनना सही है, यह सोच और समझ को और मजबूत बनाता है। लेकिन वैश्विक स्तर पर संवाद और अवसरों के लिए अंग्रेजी का ज्ञान अनिवार्य है। World Students’ Day 2025