
WPI Inflation : आखिर जिस तरह की संभावना जताई जा रही थी, वैसा ही हो रहा है। विधानसभा चुनाव संपन्न होने के दो माह बाद ही महंगाई तेजी से बढ़ती जा रही है। ऐसा लग रहा है, जैसे महंगाई रेस की कार की तरह सबसे आगे निकलना चाहती है। ज्येष्ठ की गर्मी का पारा जैसे जैसे बढ़ रहा है उतनी ही रफ्तार से महंगाई भी आसमान छू रही है। महंगाई दर अप्रैल में 15.08 प्रतिशत पर पहुंच गई है जो कि इस से पहले 1998 में 15% के पार पहुंची थी।
बढ़ती हुई महंगाई भारत के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती है सरकार जब भी इसे कम करने की बात करती है वैसे ही महंगाई और बढ़ जाती है।डीजल पेट्रोल और खाने की चीज़ों के बढ़ते दाम लोगो के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। गौरतलब है की केंद्र सरकार ने रिजर्व बैंक को खुदरा महंगाई दर दो फीसदी से छः फीसदी तक रखने का आदेश दिया है तब भी महंगाई के ये हालात हैं। पहले कोरोना की मार झेल चुके लोग अब महंगाई से त्रस्त हो चुके हैं।
यदि आंकड़ों की बात करें तो बीते साल 2021 के अप्रैल माह में थोक महंगाई दर 10.74 फीसदी थी, जिसके तहत बीते एक साल में थोक महंगाई दर ने व्यापक वृद्धि करते हुए 4 फीसदी से अधिक की बढ़त हासिल की है। लगातार बढ़ रही थोक महंगाई दर का कारण खान-पान से लेकर पेट्रोल-डीजल, एलपीजी सिलेंडर, आदि की बढ़ रही कीमतें हैं।
हाल ही में जारी आंकड़ों से पूर्व मार्च 2022 महीने की थोक महँगाई दर 14.55 फीसदी और फरवरी 2022 महीने की तोल महंगाई दर 13.11 फीसदी दर्ज हुई रही। यानी बीते दो महीनों में थोक महंगाई दर में लगभग 2 फीसदी का ऊंछाल दर्ज हुआ है।
थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर में दर्ज हुए इजाफे के चलते खुदरा महंगाई दर भी बीते 7 साल के सर्वोत्तम स्तर 7.79 पर पहुंच गई है। इस संकट की असल मार हमेशा से मध्यम वर्गीय और निम्न वर्गीय परिवारों पर पड़ती आ रही है, जिसके अभी लंबे समय तक जारी रहने के आसार हैं।
थोक मूल्य सूचकांक आधारित महँगाई दर में इजाफे का मुख्य कारण रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते कच्चे तेल और पेट्रोल की कीमतों में व्यापक वृद्धि, खान-पान की कीमतों में इजाफा, प्राकृतिक गैस की कीमतों में बढ़ोत्तरी है।
दरअसल विशेषकर रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते भारत का आयात-निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। जिसका सीधा असर भारत में लगातार बढ़ रही महंगाई दर के रूप में देखने को मिल रहा है, जिसमें बीते 4-5 महीनों में सर्वाधिक ऊंछाल दर्ज हुआ है।