BRICS Summit 2026 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। लेकिन इस दौरे में सिर्फ शी जिनपिंग की मौजूदगी ही चर्चा का विषय नहीं है। उनके साथ भारत पहुंचे चीन के बेहद ताकतवर नेता कैई ची ने कूटनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है।

BRICS Summit 2026 : चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। दुनिया की निगाहें जहां BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात पर टिकी हैं, वहीं चीनी राष्ट्रपति के साथ भारत पहुंचे एक बेहद ताकतवर नेता ने कूटनीतिक हलकों में अलग चर्चा छेड़ दी है। यह नेता हैं कैई ची (Cai Qi), जिन्हें शी जिनपिंग के सबसे भरोसेमंद और प्रभावशाली सहयोगियों में गिना जाता है। चीन की सत्ता व्यवस्था को करीब से देखने वालों के लिए कैई ची कोई सामान्य पार्टी नेता नहीं हैं। वह कम्युनिस्ट पार्टी के उस शीर्ष सत्ता केंद्र का हिस्सा हैं, जहां चीन की राजनीति, रणनीति और नीतियों की दिशा तय होती है। शी जिनपिंग के साथ उनकी लगातार मौजूदगी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां उन्हें चीन के राष्ट्रपति के सबसे करीबी राजनीतिक सहयोगियों में शामिल करती हैं। यही वजह है कि BRICS Summit 2026 के लिए शी जिनपिंग के प्रतिनिधिमंडल में कैई ची की मौजूदगी को खास महत्व दिया जा रहा है। सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कैई ची कौन हैं? बड़ा सवाल यह है कि शी जिनपिंग उन्हें भारत क्यों लेकर आए हैं और क्या यह भारत-चीन रिश्तों के लिए किसी बड़े संकेत की ओर इशारा करता है? BRICS Summit 2026
चीन ने शनिवार को अपने प्रतिनिधिमंडल की जानकारी देते हुए बताया कि शी जिनपिंग के साथ कम्युनिस्ट पार्टी की पोलित ब्यूरो स्थायी समिति के सदस्य कैई ची और विदेश मंत्री वांग यी भी भारत आए हैं। शी जिनपिंग की भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय तक तनाव बना रहा। सीमा पर तनाव कम करने के लिए सैन्य और राजनयिक स्तर पर बातचीत हुई और पिछले कुछ समय में संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में भी कदम उठाए गए हैं। ऐसे माहौल में चीन के शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीबी व्यक्ति का शी जिनपिंग के साथ भारत आना इस यात्रा के रणनीतिक महत्व को और बढ़ाता है। BRICS Summit 2026
कैई ची की सबसे बड़ी राजनीतिक ताकत उनका पद भर नहीं है। उनकी पहचान शी जिनपिंग के बेहद भरोसेमंद सहयोगी के तौर पर बनी है। वह कम्युनिस्ट पार्टी के जनरल ऑफिस की जिम्मेदारी संभालते हैं। यह पद उन्हें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के कामकाज और शी जिनपिंग के राजनीतिक तंत्र के बेहद करीब रखता है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय मीडिया और चीन के राजनीतिक मामलों के विश्लेषक उन्हें कई बार शी जिनपिंग का ‘राइट हैंड’ या प्रभावशाली चीफ ऑफ स्टाफ जैसी भूमिका वाला नेता बताते हैं। BRICS Summit 2026
कैई ची का राजनीतिक सफर चीन की सत्ता व्यवस्था में असाधारण तेजी से ऊपर पहुंचने का उदाहरण माना जाता है। वर्ष 2017 में उन्हें पोलित ब्यूरो में जगह मिली। यह उस समय हुआ जब वह बीजिंग के कम्युनिस्ट पार्टी प्रमुख के तौर पर काम कर रहे थे। बीजिंग में पार्टी प्रमुख का पद पहले से ही बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन कैई ची का राजनीतिक उभार यहीं नहीं रुका। वर्ष 2022 में उन्हें कम्युनिस्ट पार्टी की सात सदस्यीय पोलित ब्यूरो स्थायी समिति में शामिल किया गया। यह चीन के राजनीतिक सत्ता तंत्र का सबसे ऊपरी और प्रभावशाली स्तर है। इस समिति में शामिल होना किसी भी नेता के लिए चीन की सत्ता के सबसे मजबूत घेरे में प्रवेश माना जाता है। BRICS Summit 2026
कैई ची की ताकत को समझने के लिए उनकी जिम्मेदारियों पर नजर डालना जरूरी है। वह पार्टी के जनरल ऑफिस का नेतृत्व करते हैं और पार्टी के वैचारिक ढांचे से जुड़ी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते हैं।
केंद्रीय पार्टी स्कूल चीन के राजनीतिक अधिकारियों को प्रशिक्षित करने और कम्युनिस्ट पार्टी की विचारधारा को आगे बढ़ाने वाली प्रमुख संस्थाओं में से एक है। ऐसे महत्वपूर्ण पदों का एक ही नेता के हाथ में होना कैई ची के राजनीतिक प्रभाव को दर्शाता है। यही वजह है कि चीन की सत्ता में उन्हें शी जिनपिंग के सबसे भरोसेमंद लोगों में शामिल किया जाता है। BRICS Summit 2026
शी जिनपिंग और कैई ची के बीच भरोसे की कहानी अचानक शुरू नहीं हुई। दोनों की राजनीतिक पृष्ठभूमि में कई समानताएं हैं। दोनों ने अपने शुरुआती दौर में चीन की राजनीतिक उथल-पुथल के बीच काम किया और बाद में फुजियान तथा झेजियांग जैसे महत्वपूर्ण तटीय प्रांतों में लंबे समय तक जिम्मेदारियां संभालीं। इसी दौरान दोनों के बीच राजनीतिक संपर्क और विश्वास मजबूत हुआ। शी जिनपिंग के सत्ता में आने के साथ कैई ची का राजनीतिक कद भी तेजी से बढ़ता गया। कैई ची उन नेताओं में हैं जिनके बारे में माना जाता है कि शी जिनपिंग उन्हें सिर्फ एक वरिष्ठ पार्टी सहयोगी के तौर पर नहीं देखते, बल्कि अपने बेहद भरोसेमंद राजनीतिक तंत्र का हिस्सा मानते हैं। चीन जैसे केंद्रीकृत राजनीतिक ढांचे में शीर्ष नेता के करीब होना किसी अधिकारी के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है। कैई ची के मामले में भी यही दिखाई देता है। BRICS Summit 2026
हाल के वर्षों में कैई ची अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के महत्वपूर्ण मौकों पर शी जिनपिंग के साथ दिखाई दिए हैं। पिछले वर्ष शंघाई सहयोग संगठन से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ भी मुलाकात हुई थी। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शी जिनपिंग के साथ उनकी लगातार मौजूदगी यह बताती है कि वह चीन की विदेश नीति और शीर्ष नेतृत्व की रणनीतिक बातचीत के महत्वपूर्ण हिस्से हैं। इसीलिए भारत यात्रा के दौरान उनकी मौजूदगी को केवल प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा रहा। कैई ची की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय दृश्यता का एक और संकेत अमेरिकी राष्ट्रपति से जुड़े उच्चस्तरीय कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी से मिलता है। वह शी जिनपिंग के साथ होने वाली महत्वपूर्ण कूटनीतिक गतिविधियों में अक्सर नजर आते रहे हैं। इन घटनाओं को अलग-अलग देखा जाए तो ये सामान्य प्रोटोकॉल का हिस्सा लग सकती हैं, लेकिन लगातार शीर्ष बैठकों में उनकी मौजूदगी चीन की सत्ता में उनके महत्व को रेखांकित करती है। BRICS Summit 2026
BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात को लेकर पहले से ही दुनिया की निगाहें टिकी हुई हैं। ऐसे में शी जिनपिंग के साथ कैई ची का भारत आना इस यात्रा के रणनीतिक पक्ष को और महत्वपूर्ण बना देता है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद, व्यापार, आर्थिक सहयोग और दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे कई मुद्दे हैं। गलवान के बाद दोनों देशों के रिश्तों में आई खटास को कम करने की प्रक्रिया आसान नहीं रही है। ऐसे में शीर्ष नेतृत्व की बैठक के साथ-साथ उसके पीछे काम करने वाला राजनीतिक तंत्र भी महत्वपूर्ण हो जाता है। BRICS Summit 2026
कैई ची का कामकाज और शी जिनपिंग के साथ उनकी निकटता यह संकेत देती है कि वह केवल औपचारिक बैठकों तक सीमित नेता नहीं हैं। चीन की राजनीतिक व्यवस्था में शीर्ष नेतृत्व के फैसलों को लागू कराने और पार्टी तंत्र के साथ समन्वय में ऐसे नेताओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। इसलिए उनकी भारत यात्रा से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या BRICS Summit के दौरान भारत और चीन के बीच संबंधों को लेकर औपचारिक बातचीत के साथ कुछ महत्वपूर्ण रणनीतिक संदेशों पर भी काम होगा। BRICS Summit 2026
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