
Police Commissionerate System: उत्तर प्रदेश में दोबारा योगी आदित्यनाथ की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अफसरों को कानून व्यवस्था (Law and order) पर पूरा ध्यान देने के लिए आगाह किया है.
इसके बाद भी गाजियाबाद में अपराध लगातार बढ़ते नजर आ रहे हैं. यूपी में बढ़ती आपराधिक मामलों के चलते गाजियाबाद शहर में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था (Police Commissionerate System) लागू हो सकती है. गाजियाबाद के साथ ही प्रयागराज, मेरठ और आगरा में भी पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू हो सकती है.
यूपी का गृह विभाग (Home Department) इसकी तैयारियों में जुटा हुआ है. यूपी के 4 जिलों में पुलिस कमिश्नर सिस्टम पहले से लागू है. इनमें लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर, वाराणसी और कानपुर शामिल हैं.
ऐसा भी माना जा रहा है कि, हाल ही में हुए चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने जिस कानून व्यवस्था को बड़ा मुद्दा बनाया था, उन मुद्दों पर सरकार किसी भी हालत में किसी प्रकार का समझौता नहीं करना चाहती.
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बिगड़ती कानून व्यवस्था (Law and order) के चलते जल्द ही गाजियाबाद और मेरठ में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने की तैयारी की जा रही है.
योगी सरकार ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए गाजियाबाद, प्रयागराज, मेरठ और आगरा जैसे बड़े शहरों में Police Commissionerate System की जरूरत पर बल दिया गया है.
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Source- Aaj Tak[/caption]
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के तेवर काफी सख्त हैं. इसी कड़ी में हाल ही में सोनभद्र के जिलाधिकारी (Sonbhadra District Magistrate Suspended) और गाजियाबाद के एसएसपी को निलंबित (Ghaziabad SSP suspended) कर दिया गया था.
गाजियाबाद के SSP के निलंबन के पीछे की वजह पिछले ढाई महीने में हुई 100 बड़ी वारदातें थीं. एसएसपी पवन कुमार (SSP Pawan Kumar) ने अगस्त 2021 में पद संभाला था और इस 31 मार्च को उन्हें सस्पेंड कर दिया गया.
इसके बाद कुछ समय तक गाजियाबाद की कमान मेरठ के आईजी प्रवीण कुमार (IG Praveen Kumar) ने संभाली. इसके बाद एम. मुनिराज (IPS M. Muniraj) को अस्थायी तौर पर गाजियाबाद जिले का SSP बनाया गया है.
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आजादी से पहले भारत में अंग्रेजों ने बॉम्बे, मद्रास और कलकत्ता में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम (Police Commissionerate System) लागू किया हुआ था.
उस वक्त सारी न्यायिक शक्तियां (Judicial Powers) पुलिस कमिश्नर के पास होती थी. पुलिस कमिश्नरी सिस्टम ये 'पुलिस प्रणाली अधिनियम, 1861 (Police System Act)' पर आधारित.
देश आजाद होने के बाद इस प्रणाली को वक्त के साथ-साथ दूसरे महानगरों में भी लागू किया गया. यही वजह है कि, अब भारत के कई महानगरों में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम लागू है.
इस व्यवस्था में पुलिस को डीएम (District Magistrate) के आदेश का इंतजार नहीं करना पड़ता है. क्योंकि District Magistrate के कई अधिकार पुलिस कमिश्नर को मिल जाते है.
इस पुलिस कमिश्नरी सिस्टम में पुलिस खुद ही किसी भी हालात में कानून व्यवस्था (law order) से जुड़े सभी फैसले ले सकती है.
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