"आप लोगों की जिंदगी से खेल रहे थे" सुप्रीम कोर्ट ने पतंजलि के मालिक बाबा रामदेव को सुनाई कड़वी बातें
Supreme Court On Patanjali Ramdev
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 08:10 PM
Supreme Court On Patanjali Ramdev : सुप्रीम कोर्ट ने भ्रामक विज्ञापन के मामले में योग गुरु बाबा रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण द्वारा बिना शर्त माफी मांगने के लिए दायर किए हलफनामे को स्वीकार करने से इनकार कर दिया । इनकार करते हुए कोर्ट ने कहा कि माफी नामा तब भेजा गया जब उनकी गलती पकड़ ली गई। न्यायमूर्ति हिमा कोहली और अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ में सुनवाई करते हुए कहा कि हम इस मामले में इतने उदार नहीं बनना चाहते। कहने का मतलब साफ था कि कोर्ट किसी भी हाल में स्वामी रामदेव और बालकृष्ण के साथ कोई रियायत नहीं बरतना चाहता है।
कोर्ट ने बाबा रामदेव और पतंजलि को कहा : जनता की जिंदगी से खिलवाड़ क्यों किया
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बाबा रामदेव और पतंजलि को साफ-साफ कहा कि जनता की जिंदगी से खिलवाड़ क्यों किया । सुप्रीम कोर्ट ने जब रामदेव और बालकृष्ण को कारण बताओं नोटिस जारी किए और उन्हे अदालत के सामने पेश होने का निर्देश दिया तो बाबा रामदेव और बालकृष्ण ने उस स्थिति से बचने का प्रयास किया जहां व्यक्तिगत पेशी जरूरी थी । कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कई और भी हम बातें कहीं ।
उत्तराखंड सरकार के अधिकारियों को भी फटकार लगाई
Supreme Court On Patanjali Ramdev :
इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले में केंद्र की प्रतिक्रिया पर भी असंतोष जाहिर किया और कंपनी के संस्थापकों के साथ हाथ मिलाने के लिए राज्य सरकार के अधिकारियों को भी फटकार लगाई। कोर्ट ने बाबा रामदेव और आचार्य बालकृष्ण से कहा कि जब आप लोगों को कारण बताओं नोटिस जारी किए गए और अदालत के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया तब आपने उस स्थिति से बचने के लिए कोशिश की. यह ऐसी स्थिति थी जहां उनकी व्यक्तिगत पेशी जरूरी थी। न्यायालय ने कहा कि यह बिल्कुल अस्वीकार्य है। पीठ ने आदेश सुनाते हुए कहा कि मामले के पूरे इतिहास और अवमाननाकर्ताओं के पिछले आचरण को ध्यान में रखते हुए हम उनके द्वारा दायर हलफनामे को स्वीकार करने के अनुरोध पर आपत्ति व्यक्त करते हैं।
नहीं मिलेगी माफी,परिणाम भुगतना होगा
Supreme Court On Patanjali Ramdev :
कोर्ट ने साथ ही यह कहा कि गलती पकड़े जाने पर और खुद को मुश्किल हालात में पाने पर ही यह माफीनामादिया गया है । हम इसे स्वीकार करने या माफ करने से इनकार करते हैं। माफी उस कागज के लायक नहीं है जिस पर वह लिखी गई है। हम इसे आदेश का जानबूझकर किया गया उल्लंघन और वचनबद्धता का उल्लंघन मानते हैं। कोर्ट का कहना था की माफी मांगना काफी नहीं है और आपको अदालत के आदेश का उल्लंघन करने का परिणाम भुगतना होगा यानी कि बाबा रामदेव और बालकृष्ण इस मामले में सिर्फ माफी मांग कर अपने जिम्मेदारियां से बच नहीं सकते। कोर्ट ने कठोर होते हुए यह भी कहा एक आदमी दया मांग रहा है लेकिन अनगिनित निर्दोष लोगों का क्या जिन्होंने दवा ली। कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रियता बरतने और राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण के प्रति भी कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि वह उनकी इस बात को हल्के में नहीं ले सकते । कोर्ट ने कहा कि हमें हैरानी है की फाइलों को आगे बढ़ाने के सिवा राज्य लाइसेंसिग प्राधिकरण ने कुछ नहीं किया और वह चार-पांच साल से इस मुद्दे को लेकर गहरी नींद सोया था । कोर्ट ने फटकार लगाते हुए कहा आप लोगों की जिंदगी से जुड़े काम कर रहे हैं लेकिन आप लोगों के जीवन से खेल भी रहे हैं । इसके अलावा कोर्ट ने कठोर होते हुए यह भी कहा कि जब लोग यह दवाइयां ले रहे थे और उन्हें बेवकूफ बनाया जा रहा था तो आपने क्या किया। आपको बता दें कि न्यायालय ने इस मामले में आगे की सुनवाई के लिए 16 अप्रैल की तारीख तय की है।