जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग इलाके में शनिवार को हुई मुठभेड़ में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तानी कमांडर यासिर को सुरक्षाबलों ने मार गिराया।

National News : जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी मिली है। मध्य कश्मीर के बडगाम जिले के यूसमर्ग इलाके में शनिवार को हुई मुठभेड़ में प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के पाकिस्तानी कमांडर यासिर को सुरक्षाबलों ने मार गिराया। सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से यासिर की गतिविधियों पर नजर रख रही थीं। मुठभेड़ उस समय शुरू हुई जब सुरक्षाबलों को इलाके में आतंकियों की मौजूदगी की जानकारी मिली। इसके बाद संयुक्त टीम ने अभियान चलाया और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हुए आतंकियों की घेराबंदी की। कार्रवाई के दौरान सुरक्षाबलों का सामना यासिर से हुआ। मुठभेड़ में उसे मार गिराया गया। National News
रिपोर्टों के अनुसार, यासिर पाकिस्तान का नागरिक था और जम्मू-कश्मीर में लश्कर-ए-तैयबा के एक प्रमुख कमांडर के रूप में सक्रिय था। वह पहले लश्कर के बड़े आतंकी कमांडर सुलेमान मूसा के ग्रुप का हिस्सा रहा था। करीब एक वर्ष पहले वह उस ग्रुप से अलग हो गया था और इसके बाद स्वतंत्र रूप से आतंकी गतिविधियों को संचालित कर रहा था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यूसमर्ग क्षेत्र में यासिर की सक्रियता सुरक्षा बलों के लिए गंभीर चुनौती थी। उसके नेटवर्क और दूसरे आतंकियों के साथ संपर्कों की जानकारी जुटाने का काम अब शुरू कर दिया गया है। National News
सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक यासिर पहले सुलेमान मूसा ग्रुप से जुड़ा हुआ था। सुलेमान मूसा को पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड बताया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, सुलेमान मूसा पिछले वर्ष डाचीगाम में सुरक्षाबलों के साथ हुई कार्रवाई में मारा गया था। यासिर के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियां अब इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि उसके पुराने और मौजूदा नेटवर्क के बीच किस तरह के संपर्क थे और वह जम्मू-कश्मीर में किन आतंकियों के साथ मिलकर काम कर रहा था। National News
सुरक्षाबलों के अभियान की शुरुआत अचानक नहीं हुई थी। अधिकारियों के मुताबिक सेना ने पुंछ के अशदर गली से यूसमर्ग होते हुए पुलवामा के पाखेरपोरा की ओर बढ़ रहे संदिग्ध आतंकियों के एक समूह की गतिविधियों को ट्रैक किया था। यह इलाका पीर पंजाल पर्वत श्रृंखला के ऊंचाई वाले दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में आता है। आतंकियों की गतिविधियों पर निगरानी के बाद 1 सितंबर को इलाके में घेराबंदी की गई। इसके बाद 3 सितंबर को अशदर गली में सुरक्षाबलों का आतंकियों से संपर्क हुआ, जिसके बाद अभियान और तेज किया गया। ऐसे दुर्गम पहाड़ी इलाकों में आतंकियों के खिलाफ अभियान सुरक्षाबलों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। इसके बावजूद लगातार निगरानी और संयुक्त ऑपरेशन के जरिए आतंकियों तक पहुंच बनाई गई। National News
यूसमर्ग में चलाए गए इस आतंकवाद विरोधी अभियान में भारतीय सेना के साथ जम्मू-कश्मीर पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की भूमिका रही। संयुक्त अभियान के दौरान संदिग्ध आतंकियों की गतिविधियों को ट्रैक किया गया और संभावित ठिकानों की घेराबंदी की गई। सुरक्षाबलों की यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के खिलाफ चल रहे व्यापक अभियान का हिस्सा है। आतंकियों के नेटवर्क को कमजोर करने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार सक्रिय हैं। National News
यासिर के मारे जाने के बाद सुरक्षा एजेंसियों के सामने अगली बड़ी चुनौती उसके नेटवर्क को खंगालने की है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि यासिर किन आतंकियों के संपर्क में था, उसे सीमा पार से किस तरह का समर्थन मिल रहा था और हाल के दिनों में वह किन गतिविधियों को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था। सुरक्षा एजेंसियां उसके संपर्कों, स्थानीय मददगारों और लश्कर-ए-तैयबा के दूसरे सक्रिय सदस्यों से संभावित संबंधों की भी जांच कर सकती हैं। National News
यूसमर्ग ऑपरेशन से पहले शुक्रवार को भी मध्य कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया था। उस आतंकी के पाकिस्तानी नागरिक होने का संदेह जताया गया था। इलाके में एक और संदिग्ध आतंकी के छिपे होने की आशंका के चलते तलाशी अभियान जारी रखा गया था। लगातार दो दिनों में हुई इन कार्रवाइयों से साफ है कि जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा एजेंसियां आतंकियों की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। National News
यासिर जैसे कमांडर का मारा जाना सुरक्षाबलों के लिए इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ऐसे आतंकी स्थानीय स्तर पर संगठन के संचालन, संपर्कों और आतंकियों की आवाजाही में अहम भूमिका निभाते हैं। किसी सक्रिय कमांडर के मारे जाने से उसके नेटवर्क को झटका लग सकता है। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती अभी खत्म नहीं हुई है। यासिर के संपर्कों और उसके नेटवर्क से जुड़े अन्य आतंकियों की तलाश आने वाले दिनों में अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकती है। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों का संदेश स्पष्ट है—आतंकियों की गतिविधियों पर लगातार नजर है और उनके नेटवर्क को जड़ से कमजोर करने के लिए अभियान जारी रहेगा। National News
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