हजारों गाने, लाखों फैंस... कुछ ऐसा रहा Jubeen Garg का सफर
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 07:44 PM
कल का दिन संगीत प्रेमियों के लिए बेहद दुखद रहा। मशहूर असमिया गायक और म्यूजिक कंपोजर जुबीन गर्ग (Zubeen Garg) का निधन हो गया। 52 वर्षीय जुबीन सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट फेस्टिवल में भाग लेने गए थे जहां स्कूबा डाइविंग के दौरान हुए एक दर्दनाक हादसे में वे गंभीर रूप से घायल हो गए। अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। जुबीन गर्ग न सिर्फ असम बल्कि हिंदी और बंगाली म्यूजिक इंडस्ट्री का भी एक जाना-पहचाना नाम थे। जुबीन गर्ग ने हजारों गानों को अपनी आवाज दी जिन्हें लोग काफी पसंद करते हैं। Zubeen Garg
संगीत से गहरा रिश्ता
जुबीन गर्ग का जन्म 18 नवंबर 1972 को तुरा (मेघालय) में हुआ था। महज 3 साल की उम्र में उन्होंने गाना शुरू कर दिया था, और उनकी पहली संगीत गुरु उनकी मां ही थीं। 11 साल की उम्र में उन्होंने पंडित रोबिन बनर्जी से शास्त्रीय संगीत सीखा, वहीं रुमानी राय ने उन्हें असमीज फोक म्यूजिक से जोड़ा। 13 साल की उम्र में उन्होंने अपना पहला गाना कंपोज किया था। 19 साल की उम्र में उनका पहला एलबम "अनामिका" (1992) रिलीज हुआ जिसने उन्हें लोकल स्टार बना दिया।
30,000 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड
IMDB के अनुसार जुबीन 12 म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स बजा सकते थे। उन्होंने असमिया, हिंदी, बंगाली समेत कई भाषाओं में 30,000 से ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए हैं। यह अपने आप में एक रिकॉर्ड है। 1995 में जुबीन मुंबई आए और इंडी म्यूजिक में हाथ आजमाया। उनका पहला इंडीपॉप एल्बम "चांदनी रात" आया, जिसके बाद ‘जलवा’, ‘यूं ही कभी’, ‘जादू’, ‘स्पर्श’ जैसे एल्बम्स ने उन्हें नॉन-फिल्मी म्यूजिक की दुनिया में स्थापित किया।
'या अली’ बना टर्निंग पॉइंट
हिंदी फिल्मों में जुबीन ने कई गाने गाए, लेकिन 2006 की फिल्म 'गैंगस्टर' का गाना "या अली" उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस गाने ने उन्हें देशभर में लोकप्रियता दिलाई और इसके लिए उन्हें ग्लोबल इंडियन फिल्म अवॉर्ड (GIFA) भी मिला। इसके बाद जुबीन ने हिंदी फिल्मों में कई हिट गाने दिए जैसे-"जाने क्या चाहे मन बावरा", "जीना क्या तेरे बिना", "दिल तू ही बता", "दर्द-ए-दिल", "दिल तो दीवाना है" आदि।
पर्सनल लाइफ और सोशल वर्क
2002 में जुबीन ने गरिमा साइकिया, एक फैशन डिजाइनर से शादी की थी। गरिमा असम से ही हैं। सिर्फ संगीत ही नहीं, जुबीन समाजसेवा में भी बहुत आगे थे। उन्होंने ‘The Kalaguru Artist Foundation’ नाम की चैरिटी संस्था शुरू की थी जो असम के बाढ़ पीड़ितों, कोविड प्रभावित लोगों और जरूरतमंदों की मदद करती रही है।सोशल मीडिया पर भी उनकी जबरदस्त फैन फॉलोइंग थी 9 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स उन्हें फॉलो करते थे।
जुबीन गर्ग सिर्फ एक कलाकार नहीं थे बल्कि एक आवाज थे जो हर भाषा, हर दिल तक पहुंचती थी। उन्होंने नॉर्थ ईस्ट के म्यूजिक को नेशनल प्लेटफॉर्म पर पहचान दिलाई और अपनी मेहनत से हजारों युवा कलाकारों को प्रेरणा दी। आज भले ही वो हमारे बीच नहीं हैं लेकिन उनका संगीत, उनका संघर्ष और उनकी कहानी हमेशा जीवित रहेगी। Zubeen Garg