What Is Zumba : एक दौर था जब फिटनेस का मतलब केवल एरोबिक्स या दौड़ तक सीमित था। लेकिन 1980 के दशक में कोलंबियाई ट्रेनर अल्बर्टो 'बेटो' पेरेज़ ने एक्सरसाइज में म्यूज़िक और डांस का ऐसा मेल जोड़ा कि ‘ज़ुम्बा’ एक ग्लोबल वर्कआउट ट्रेंड बन गया। दुनिया भर में लोकप्रिय हो चुका यह डांस-बेस्ड वर्कआउट अब भारत के केरल राज्य में विवाद का विषय बना हुआ है। वहां स्कूलों में ज़ुम्बा क्लास की शुरुआत पर मुस्लिम संगठनों ने आपत्ति जताते हुए इसे सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों के खिलाफ बताया है। ऐसे में ज़रूरी हो जाता है कि यह समझा जाए कि आखिर ज़ुम्बा है क्या, इसकी उत्पत्ति कैसे हुई और वर्तमान विवाद की जड़ें कहां हैं।
ज़ुम्बा एक इंटरनेशनल लेवल का ग्रुप वर्कआउट प्रोग्राम है, जिसमें डांस और एरोबिक्स का मेल होता है। इसकी खूबी यह है कि यह न तो बोरिंग होता है और न ही इसमें किसी भारी-भरकम उपकरण की जरूरत पड़ती है। सिर्फ एक म्यूज़िक ट्रैक और शरीर को लयबद्ध रूप से मूव करने की इच्छा ज़ुम्बा के लिए काफी है। इस फिटनेस फॉर्म में साल्सा, कुम्बिया, मेरेंग, रेगेटॉन और हिप-हॉप जैसे लैटिन और ग्लोबल डांस स्टाइल्स को शामिल किया जाता है। भारत में अक्सर बॉलीवुड या क्षेत्रीय गानों पर ज़ुम्बा किया जाता है, जो इसे लोकल टच देता है।
इस वर्कआउट की नींव कोलंबिया के एरोबिक्स ट्रेनर अल्बर्टो 'बेटो' पेरेज ने 1986 में रखी थी। एक दिन जब वह अपनी क्लास के लिए एरोबिक्स म्यूज़िक लाना भूल गए, तो उन्होंने कार में रखे लैटिन म्यूज़िक पर क्लास ली। छात्रों को यह नया तरीका इतना पसंद आया कि धीरे-धीरे यही एक नया ट्रेंड बन गया। 2001 में उन्होंने ‘ज़ुम्बा फिटनेस’ के नाम से कंपनी शुरू की, जो आज दुनिया के 180 से अधिक देशों में एक्टिव है।
फिटनेस की ज़रूरत और उम्र के मुताबिक ज़ुम्बा को अलग-अलग रूपों में बांटा गया है:
Zumbini: छोटे बच्चों के लिए
Zumba Gold: वरिष्ठ नागरिकों के लिए
Aqua Zumba: पानी में किया जाने वाला वर्कआउट
Zumba Toning: हल्के वजन के साथ मसल टोनिंग
केरल में ज़ुम्बा क्लासेस को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब कुछ मुस्लिम संगठनों ने इसके खिलाफ विरोध दर्ज कराया। विजडम इस्लामिक आर्गेनाईजेशन के महासचिव टी. के. अशरफ और समस्ता के वरिष्ठ नेता नसर फैज़ी कूड़ाथाय ने इसे “अनैतिक” और “अश्लीलता थोपने वाला कदम” बताया।
उनका तर्क है कि लड़के और लड़कियां एकसाथ डांस करें, वह भी "कम कपड़ों" में — यह न केवल धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ है, बल्कि यह छात्रों की नैतिक समझ, निजी स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन भी है।
केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने स्पष्ट किया है कि ज़ुम्बा क्लासेस वैकल्पिक हैं, न कि अनिवार्य। छात्रों को इसमें अपनी नियमित यूनिफॉर्म में भाग लेने की छूट दी गई है और यह किसी भी धार्मिक या सांस्कृतिक भावना को ठेस पहुँचाने के इरादे से नहीं शुरू किया गया है। सरकार इसे नशा मुक्ति अभियान का हिस्सा मानते हुए छात्रों को मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ रखने की दिशा में एक सक्रिय प्रयास बता रही है। What Is Zumba