साइबर ठग अब बिजली-पानी के बिल के साथ-साथ आईजीएल (इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड) बिल के नाम पर भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। नोएडा में एक बुजुर्ग को साइबर ठगों ने आईजीएल बिल के नाम पर APK फाइल भेजी।

Noida News : साइबर ठग अब बिजली-पानी के बिल के साथ-साथ आईजीएल (इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड) बिल के नाम पर भी लोगों को निशाना बना रहे हैं। नोएडा में एक बुजुर्ग को साइबर ठगों ने आईजीएल बिल के नाम पर APK फाइल भेजी। फाइल डाउनलोड करते ही उनके बैंक खाते से करीब 10 लाख रुपये ट्रांसफर हो गए। मोबाइल पर बैंक से जुड़े संदेश आने के बाद पीड़ित को साइबर ठगी का पता चला। मामले में साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है। अखबार में प्रकाशित खबर के मुताबिक, ठगों ने पीड़ित को आईजीएल बिल से संबंधित बताकर एक APK फाइल भेजी थी। पीड़ित ने जैसे ही उस फाइल को डाउनलोड किया, साइबर अपराधियों को मोबाइल और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी तक पहुंच मिल गई। इसके बाद खाते से रकम ट्रांसफर कर दी गई। पीड़ित के मोबाइल पर लगातार लेनदेन के संदेश आने के बाद उसे ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उसने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई।
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नोएडा सेक्टर-31 निवासी इंजीनियर अभिनव त्यागी को भी साइबर ठगों ने WhatsApp मैसेज के जरिए निशाना बनाया। अखबार की खबर के अनुसार, ठगों ने 17 फरवरी को उनसे संपर्क किया और शेयर ट्रेडिंग में निवेश कराने का दावा किया। ठगों ने निवेश के नाम पर पहले कुछ रकम ट्रांसफर कराई। इसके बाद अधिक निवेश और मुनाफे का लालच दिया गया। जब पीड़ित ने पैसे निकालने की कोशिश की तो ठगों ने कमीशन और अन्य शुल्क के नाम पर और रकम मांगनी शुरू कर दी। मामला संदिग्ध लगने पर पीड़ित ने साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत की। इसके बाद जांच में सामने आया कि जिस नंबर से उससे संपर्क किया गया था, वह नोएडा वेस्ट की एक कंपनी से जुड़ा बताया गया था। पीड़ित ने बताया कि ठगों ने उसे निवेश में बड़े मुनाफे का भरोसा दिलाया था। लगातार रकम जमा कराने के बाद जब निकासी की बारी आई तो अलग-अलग बहाने बनाकर पैसे मांगे गए।
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साइबर ठगों ने एक अन्य मामले में नोएडा सेक्टर-48 निवासी बुजुर्ग राम प्रकाश शर्मा को निशाना बनाया। खबर के मुताबिक, उन्हें IGL का बिल मिला, लेकिन वह यह समझ नहीं सके कि बिल फर्जी था। ठगों ने उन्हें बिल डाउनलोड करने के लिए APK फाइल भेजी। फाइल डाउनलोड करने के बाद उनके खाते से करीब नौ लाख रुपये ट्रांसफर कर लिए गए। पीड़ित ने बताया कि उसे शुरुआत में यह सामान्य बिल संबंधी संदेश लगा। जैसे ही उसने भेजी गई फाइल डाउनलोड की, साइबर अपराधियों ने खाते से रकम निकाल ली। बैंक खाते से रकम निकलने की जानकारी मिलने के बाद उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई।
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नोएडा में साइबर ठगी का एक और बड़ा मामला सामने आया है, जिसमें 23 हजार रुपये लगाकर 50 हजार रुपये कमाने का लालच देकर एक व्यक्ति से करीब 71 लाख रुपये ठग लिए गए। पीड़ित को सोशल मीडिया के जरिए निवेश से जुड़ी जानकारी दी गई। साइबर ठगों ने खुद को भरोसेमंद बताने के लिए प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की तस्वीरों वाले विज्ञापन तथा वीडियो दिखाए। इससे पीड़ित को लगा कि योजना किसी सरकारी व्यवस्था से जुड़ी हुई है। ठगों ने पहले छोटी रकम निवेश कराई। इसके बाद खाते में मुनाफा दिखाया गया और पीड़ित को विश्वास में लेकर लगातार अधिक पैसे निवेश करने के लिए कहा गया। जब पीड़ित ने रकम निकालने की कोशिश की तो ठगों ने कमीशन, टैक्स और अन्य शुल्क के नाम पर पैसे मांगने शुरू कर दिए। इस तरह धीरे-धीरे पीड़ित से बड़ी रकम ऐंठ ली गई।
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इस मामले में ठगों ने भरोसा जीतने के लिए सरकारी तंत्र से जुड़े लोगों की तस्वीरों और नामों का इस्तेमाल किया। सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री की तस्वीर वाले विज्ञापन दिखाकर निवेश योजना को विश्वसनीय बनाने की कोशिश की गई।
साइबर अपराधियों का यह तरीका तेजी से सामने आ रहा है। ठग लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश करते हैं कि निवेश योजना सरकारी संस्था या किसी बड़ी कंपनी से जुड़ी है। इसके बाद छोटी रकम से शुरुआत कर धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करा ली जाती है।
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APK यानी Android Package Kit फाइल के जरिए एंड्रॉयड फोन में एप्लिकेशन इंस्टॉल किया जाता है। साइबर ठग अक्सर किसी जरूरी सेवा, बिल, बैंक अपडेट, डिलीवरी या रिफंड के नाम पर लोगों को APK फाइल भेजते हैं। यदि व्यक्ति बिना सत्यापन के ऐसी फाइल इंस्टॉल कर देता है तो उसके फोन की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है। कुछ मामलों में संदिग्ध ऐप संवेदनशील जानकारी तक पहुंच मांग सकता है या फोन पर आने वाले संदेशों और दूसरी गतिविधियों का दुरुपयोग कर सकता है। इसी वजह से किसी अनजान व्यक्ति द्वारा WhatsApp, SMS या दूसरे माध्यम से भेजी गई APK फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल नहीं करना चाहिए।
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साइबर विशेषज्ञों और पुलिस की ओर से लगातार लोगों को अनजान लिंक और फाइलों से सावधान रहने की सलाह दी जाती है। किसी भी बिल या भुगतान संबंधी संदेश पर भरोसा करने से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ग्राहक सेवा से उसकी पुष्टि करनी चाहिए। किसी अनजान नंबर से भेजी गई APK फाइल को डाउनलोड न करें। बैंक खाते से जुड़ी जानकारी, OTP, UPI PIN, कार्ड डिटेल या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। यदि खाते से संदिग्ध लेनदेन हो जाए तो तुरंत बैंक को सूचना देने के साथ साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करानी चाहिए। जितनी जल्दी शिकायत की जाती है, रकम को रोकने या वापस कराने की संभावना उतनी बेहतर हो सकती है। नोएडा में सामने आए इन मामलों से साफ है कि साइबर ठग अब लोगों को डराने, लालच देने और भरोसा पैदा करने के लिए नए-नए तरीके अपना रहे हैं। बिल के नाम पर आई APK फाइल हो या निवेश में भारी मुनाफे का लालच—बिना सत्यापन किसी फाइल को डाउनलोड करना या पैसे ट्रांसफर करना भारी पड़ सकता है।
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