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योगी आदित्यनाथ सरकार ने श्रमिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए गौतमबुद्ध नगर में श्रम कानूनों की अनदेखी करने वाले ठेकेदारों पर अब तक की सबसे कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

श्रम विभाग की विस्तृत जांच में सामने आया कि गौतमबुद्ध नगर की 24 फैक्ट्रियों में कार्यरत ठेकेदार लगातार श्रम कानूनों का उल्लंघन कर रहे थे। जांच में कई गंभीर खामियां उजागर हुईं:
* मजदूरों को समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा था
* न्यूनतम वेतन नियमों की अनदेखी
* ईपीएफ और ईएसआई जैसी वैधानिक सुविधाओं में गड़बड़ी
* कार्यस्थल पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी
* ओवरटाइम का भुगतान नियमों के अनुरूप नहीं।
कुछ मामलों में यह भी पाया गया कि श्रमिकों को उनके अधिकारों से अनभिज्ञ रखकर कम भुगतान किया जा रहा था1.16 करोड़ की पेनल्टी, सीधे मजदूरों को मिलेगा हकअपर श्रम आयुक्त राकेश द्विवेदी के अनुसार, दोषी ठेकेदारों के खिलाफ 1.16 करोड़ का जुर्माना निर्धारित किया गया है। यह राशि सरकार के खाते में नहीं जाएगी, बल्कि सीधे प्रभावित श्रमिकों को भुगतान के रूप में दी जाएगी। प्रशासन ने साफ किया है कि वसूली की प्रक्रिया तेज कर दी गई है और किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
21% वेतन वृद्धि: आंदोलन के बाद बड़ा फैसलाश्रमिकों के बढ़ते दबाव और मांगों को देखते हुए सरकार ने बड़ा राहत पैकेज घोषित किया है:
* 21% तक वेतन वृद्धि
* लागू तिथि: 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी
* भुगतान समय: मई की 7 से 10 तारीख के बीच
* लागू क्षेत्र: गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद
* लाभार्थी: 74 अनुसूचित नियोजनों के श्रमिक
* दायरा: संविदा और स्थायी दोनों कर्मचारी
यह फैसला हजारों श्रमिक परिवारों के लिए आर्थिक राहत लेकर आएगा।
श्रम विभाग ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है:
* मजदूरों के वेतन से केवल ईपीएफ और ईएसआई की कटौती वैध होगी
* इसके अलावा किसी भी प्रकार की कटौती गैरकानूनी मानी जाएगी
* ओवरटाइम का भुगतान दोगुनी दर से करना अनिवार्य होगा।
उल्लंघन करने वाली कंपनियों और ठेकेदारों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
नई सख्ती के तहत सभी नियोक्ताओं और ठेकेदारों को यह सुनिश्चित करना होगा:
* समय पर पूर्ण वेतन भुगतान
* बोनस और ग्रेच्युटी का अनिवार्य वितरण
* श्रमिकों के सभी वैधानिक अधिकारों का पालन।
अगर कोई ठेकेदार इन नियमों की अनदेखी करता है, तो उसका लाइसेंस रद किया जा सकता है। भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
ब्लैकलिस्टिंग भी की जाएगी।
आगे और बड़ी कार्रवाई के संकेतश्रम विभाग ने साफ संकेत दिए हैं कि यह कार्रवाई अभी शुरुआत है।
* अन्य संदिग्ध ठेकेदारों की पहचान जारी है
* कई और औद्योगिक इकाइयों की जांच चल रही है
सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि औद्योगिक विकास के साथ-साथ श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही जरूरी है।
कामगारों के हक से कोई समझौता नहीं होगा, यही इस कार्रवाई का मुख्य संदेश है। यह कार्रवाई कई मायनों में महत्वपूर्ण है कि
श्रमिक आंदोलनों के बाद प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया सामने आई है। औद्योगिक क्षेत्रों में अनुशासन स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है। ठेकेदारी सिस्टम में पारदर्शिता लाने की पहल है और भविष्य में श्रम कानूनों के कड़े अनुपालन का संकेत दिया गया है।
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