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नोएडा में 13 अप्रैल को हुए श्रमिक बवाल की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इस मामले में गिरफ्तार इंजीनियर आदित्य आनंद को लेकर जांच एजेंसियों ने बड़ा दावा किया है।

Noida News : नोएडा में 13 अप्रैल को हुए श्रमिक बवाल की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इस मामले में गिरफ्तार इंजीनियर आदित्य आनंद को लेकर जांच एजेंसियों ने बड़ा दावा किया है। अधिकारियों के मुताबिक, नोएडा में हुए हिंसक आंदोलन की पृष्ठभूमि अचानक नहीं बनी थी बल्कि इसके लिए पहले से सुनियोजित तैयारी की गई थी। जांच में यह बात उभरकर आई है कि आदित्य आनंद ने अलग-अलग संगठनों से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाकर माहौल तैयार करने की कोशिश की थी। एसटीएफ सूत्रों का कहना है कि 13 अप्रैल से पहले आदित्य ने चार से अधिक संगठनों के 70 से ज्यादा लोगों के साथ संपर्क स्थापित किया था। जांच एजेंसियों के अनुसार वह दिशा स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन, भारतीय क्रांतिकारी मजदूर पार्टी (RWPI), नौजवान भारत सभा और एकता संघर्ष समिति जैसे समूहों के संपर्क में था। दावा यह भी है कि वह ऐसे युवाओं को साथ जोड़ने में जुटा था, जो पढ़े-लिखे होने के साथ-साथ आक्रामक सोच रखते हों। नोएडा में आंदोलन को धार देने के लिए वह दिल्ली के कुछ छात्रों से भी लगातार संवाद में था। Noida News
मूल रूप से बिहार के हाजीपुर का रहने वाला आदित्य आनंद नोएडा के सेक्टर-37 स्थित अरुण विहार में रह रहा था। पुलिस और एसटीएफ की संयुक्त टीम ने जब उसके ठिकाने की तलाशी ली तो वहां से ऐसे दस्तावेज, नोटबुक और लिखित सामग्री बरामद होने का दावा किया गया, जिनमें श्रमिक आंदोलन की पूरी रणनीति दर्ज थी। जांच से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, इन कागजातों में विस्तार से लिखा गया था कि किस व्यक्ति की क्या जिम्मेदारी रहेगी, कौन श्रमिकों के बीच जाकर भाषण देगा, किस इलाके में भीड़ इकट्ठा की जा सकती है और आंदोलन को किस तरह आगे बढ़ाया जाएगा। नोएडा में हुए उपद्रव को लेकर यह बरामद सामग्री जांच एजेंसियों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। आदित्य के चार करीबी साथियों से भी पूछताछ जारी है। Noida News
जांच में यह बात भी सामने आई है कि नोएडा में प्रदर्शन से पहले और प्रदर्शन वाले दिन दिल्ली के एक विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ छात्र भी यहां पहुंचे थे। पुलिस का मानना है कि ये छात्र श्रमिकों के बीच सक्रिय रूप से मौजूद थे और माहौल को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे थे। अधिकारियों के मुताबिक, हिंसा वाले दिन आदित्य आनंद ने बदले हुए हुलिये में भीड़ के बीच भाषण दिया था। बताया जा रहा है कि उसने बाल और दाढ़ी बढ़ाकर खुद को अलग रूप में पेश किया, ताकि पहचान छिपी रहे। हालांकि, नोएडा पुलिस के कुछ कर्मियों को उसके बोलने के तरीके, भाषा पर पकड़ और भीड़ को संबोधित करने की शैली ने सतर्क कर दिया था। उन्हें शक हुआ कि यह व्यक्ति सामान्य श्रमिक नहीं, बल्कि भीड़ को उकसाने के इरादे से मैदान में उतरा है। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को तत्काल सूचना दी गई। जांच एजेंसियों का दावा है कि मामला दर्ज होने के बाद आदित्य आनंद ने तुरंत तमिलनाडु के लिए टिकट कराया और वहां निकल गया। लेकिन यूपी एसटीएफ और नोएडा पुलिस की टीमों ने उसका पीछा नहीं छोड़ा। आखिरकार उसे तमिलनाडु से पकड़ लिया गया और रविवार को नोएडा लाया गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। अब नोएडा पुलिस उसे पुलिस कस्टडी रिमांड पर लेने की तैयारी कर रही है। इसके लिए अदालत में अर्जी दाखिल की जाएगी और करीब सात दिन की रिमांड मांगी जा सकती है। अधिकारियों का मानना है कि रिमांड मिलने पर इस पूरे नेटवर्क, फंडिंग, संपर्क सूत्रों और अन्य संभावित आरोपियों के बारे में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। Noida News
जांच अब सिर्फ आंदोलन तक सीमित नहीं रखी जा रही, बल्कि आदित्य आनंद के पेशेवर जीवन की भी पड़ताल की जा रही है। पुलिस का कहना है कि उसने नोएडा और गुरुग्राम की जिन कंपनियों में काम किया, वहां के प्रबंधन से भी उसके व्यवहार, कार्यशैली और संपर्कों के बारे में जानकारी जुटाई जाएगी। अरुण विहार, नोएडा में जहां वह रह रहा था, वहां के स्थानीय लोगों ने भी पुलिस को बताया कि आदित्य ज्यादा मेलजोल नहीं रखता था। पड़ोसियों के अनुसार, वह शांत स्वभाव का दिखता जरूर था, लेकिन अक्सर शाम के समय कुछ युवक उसके ठिकाने के आसपास आते-जाते देखे जाते थे। उसकी गिरफ्तारी की खबर के बाद इलाके के लोग भी हैरान हैं। Noida News
13 अप्रैल को नोएडा में हुई हिंसा के बाद हालात को काबू में करने के लिए प्रदेश के एक दर्जन से ज्यादा जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया था। गाजियाबाद, झांसी, मुरादाबाद, आगरा और मथुरा समेत कई जिलों की फोर्स नोएडा में तैनात की गई थी। भारी पुलिस बंदोबस्त का असर यह रहा कि अगले ही दिन से स्थिति पर नियंत्रण बनने लगा। अधिकारियों के मुताबिक, पिछले दो दिनों में नोएडा के किसी भी हिस्से से नए प्रदर्शन की सूचना नहीं मिली है। रविवार को भी शहर में शांति बनी रही। संवेदनशील इलाकों में एहतियातन पुलिसबल तैनात रहा, लेकिन कहीं कोई बड़ा व्यवधान देखने को नहीं मिला। ऐसे में अब बाहरी जिलों से आई फोर्स को चरणबद्ध तरीके से वापस भेजने की तैयारी शुरू हो गई है। Noida News
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