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कई लोग बिना पूरी जानकारी के ज्यादा किराया दे बैठते हैं जबकि कुछ लोग थोड़ी समझदारी से कम बजट में भी अच्छी जगह पर घर ले लेते हैं। इसलिए जरूरी है कि पहले से यह समझ लिया जाए कि नोएडा में किराया कितना होता है किन इलाकों में घर सस्ता मिलता है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।

बड़े शहर में कदम रखते ही सबसे पहला सवाल यही आता है रहेंगे कहां और खर्च कितना आएगा? नौकरी हो या पढ़ाई अगर जगह सही न मिले तो पूरा प्लान बिगड़ जाता है। नोएडा जैसे तेजी से बढ़ते शहर में यह सवाल और भी अहम हो जाता है क्योंकि यहां विकल्प तो बहुत हैं लेकिन सही और किफायती घर ढूंढना हर किसी के लिए आसान नहीं होता। कई लोग बिना पूरी जानकारी के ज्यादा किराया दे बैठते हैं जबकि कुछ लोग थोड़ी समझदारी से कम बजट में भी अच्छी जगह पर घर ले लेते हैं। इसलिए जरूरी है कि पहले से यह समझ लिया जाए कि नोएडा में किराया कितना होता है किन इलाकों में घर सस्ता मिलता है और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। इस आर्टिकल में आपको यही सब कुछ बताया गया है ताकि आप सही फैसला ले सकें।
नोएडा में किराया एक जैसा नहीं होता यह कई चीजों पर निर्भर करता है। सबसे पहले तो इलाके का नाम और उसकी लोकेशन बहुत मायने रखती है। जो सेक्टर मुख्य सड़क, बाजार या मेट्रो के पास होते हैं वहां किराया ज्यादा होता है। इसके अलावा घर का आकार, सुविधाएं और सोसायटी की स्थिति भी किराया तय करती है। बंद परिसरों वाली सोसायटी, सुरक्षा व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी सुविधाएं होने पर किराया थोड़ा बढ़ जाता है। वहीं साधारण कॉलोनी या पुराने मकानों में किराया कम मिल सकता है।
अगर सामान्य तौर पर देखा जाए तो नोएडा में एक कमरे से लेकर पूरे फ्लैट तक अलग-अलग बजट में घर मिल जाते हैं। एक साधारण कमरे या साझा रहने की व्यवस्था का किराया आमतौर पर कम होता है जो कम बजट वाले लोगों के लिए सही रहता है। वहीं एक कमरे और रसोई वाले फ्लैट का किराया मध्यम बजट में आता है। दो या तीन कमरों वाले फ्लैट का किराया थोड़ा ज्यादा होता है खासकर अगर वह अच्छी सोसायटी में हो।
नोएडा में कुछ इलाके ऐसे हैं जहां किराया बाकी जगहों के मुकाबले कम होता है। नोएडा एक्सटेंशन (ग्रेटर नोएडा वेस्ट) ऐसे ही इलाकों में आता है जहां नए प्रोजेक्ट और ज्यादा विकल्प होने के कारण किराया अपेक्षाकृत कम रहता है। इसके अलावा, शहर के बाहरी सेक्टरों में भी किफायती घर मिल सकते हैं जहां भीड़ कम होती है और किराया भी नियंत्रित रहता है। इन जगहों पर रहने से खर्च कम होता है लेकिन आने-जाने के समय को ध्यान में रखना जरूरी होता है।
महंगे इलाकों में आपको बेहतर सड़कें, पास में बाजार, मेट्रो और अच्छी सुरक्षा मिलती है। वहां का माहौल भी व्यवस्थित और साफ-सुथरा होता है। वहीं सस्ते इलाकों में सुविधाएं थोड़ी कम हो सकती हैं लेकिन अगर आपकी प्राथमिकता बजट है तो यह विकल्प भी सही हो सकता है। इसलिए यह तय करना जरूरी है कि आपके लिए सुविधा ज्यादा जरूरी है या कम खर्च।
घर लेने से पहले सिर्फ किराया देखकर फैसला नहीं करना चाहिए। पानी, बिजली, सुरक्षा और आसपास की सुविधाओं को भी देखना जरूरी है। इसके अलावा मकान मालिक के नियम, जमा राशि और लिखित समझौता भी ध्यान से समझ लेना चाहिए। जल्दबाजी में लिया गया फैसला बाद में परेशानी दे सकता है।
अगर आपका बजट कम है तो साथ (Sharing) में रहना एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इससे खर्च कम हो जाता है और शुरुआती दिनों में आर्थिक दबाव भी कम रहता है। हालांकि इसमें आपको दूसरों के साथ तालमेल बैठाना पड़ता है इसलिए यह विकल्प सोच-समझकर चुनना चाहिए।
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