नोएडा के बहुचर्चित श्रमिक आंदोलन मामले में आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद नया मोड़ सामने आया है। उत्तर प्रदेश सरकार अब हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी में है।

Noida News : नोएडा के बहुचर्चित श्रमिक आंदोलन और दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा एवं एक्टिविस्ट आकृति चौधरी पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाए जाने का मामला अब एक बार फिर देश की सर्वोच्च अदालत तक पहुंचने की दिशा में बढ़ गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा आकृति चौधरी की NSA के तहत हिरासत को रद्द किए जाने के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की तैयारी कर रही है। आकृति चौधरी के मामले में हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद जहां प्रशासन और पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं, वहीं राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की तैयारी ने इस पूरे प्रकरण को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। Noida News
आकृति चौधरी को अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए श्रमिकों के विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उस पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी NSA के तहत निरोधात्मक कार्रवाई की गई। वह करीब पांच महीने तक हिरासत में रही। पुलिस और प्रशासन का आरोप था कि श्रमिक आंदोलन के दौरान हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों में उसकी भूमिका थी। इसी आधार पर उसके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई थी। इस मामले में पत्रकार सत्यम वर्मा समेत अन्य लोगों के खिलाफ भी मुकदमे दर्ज किए गए थे। हालांकि आकृति की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका में NSA की कार्रवाई को चुनौती दी गई। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि आकृति को आंदोलन से जोड़कर उसके खिलाफ की गई कार्रवाई कानून और संवैधानिक अधिकारों के विपरीत है। Noida News
2 सितंबर 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने आकृति चौधरी की NSA हिरासत रद्द कर दी। अदालत ने माना कि उसके खिलाफ निरोधात्मक हिरासत को उचित ठहराने के लिए पर्याप्त आधार नहीं थे और उसे हिरासत में रखने के लिए जिस कहानी और सामग्री का सहारा लिया गया, उस पर गंभीर सवाल हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि यदि वह किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे रिहा किया जाए।
हाईकोर्ट का यह फैसला नोएडा पुलिस और जिला प्रशासन के लिए बड़ा झटका माना गया, क्योंकि अदालत ने केवल NSA हिरासत को रद्द नहीं किया बल्कि पूरी कार्रवाई की प्रक्रिया पर भी गंभीर टिप्पणी की। Noida News
मामले में हाईकोर्ट की विस्तृत टिप्पणी सामने आने के बाद विवाद और गहरा गया। अदालत ने गौतमबुद्धनगर की तत्कालीन जिलाधिकारी की भूमिका पर गंभीर नाराजगी जताई और कहा कि पुलिस रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों के आधार पर इतनी कठोर कार्रवाई करना उचित नहीं था। अदालत ने अधिकारियों की कार्रवाई को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए आकृति को मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के लिए 5 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया। यह राशि जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से वसूलने का निर्देश दिया गया। हाईकोर्ट की टिप्पणी में यह भी कहा गया कि सरकारी अधिकारियों की निष्ठा संविधान के प्रति होनी चाहिए। अदालत ने प्रशासनिक शक्ति के कथित दुरुपयोग को लेकर बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया और चेतावनी दी कि ऐसी प्रवृत्तियां उत्तर प्रदेश को 'Orwellian dystopia' जैसी स्थिति की ओर ले जा सकती हैं। Noida News
मामले में हाईकोर्ट ने गौतमबुद्धनगर के जिलाधिकारी के फैसले पर अपनी नाराजगी को सर्विस रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश भी दिया है। अदालत ने NSA लगाने के निर्णय को बेहद गंभीरता से लेते हुए प्रशासनिक विवेक के इस्तेमाल पर सवाल उठाए। यह आदेश इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मामला केवल एक व्यक्ति की हिरासत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने NSA जैसे कठोर कानून के इस्तेमाल, प्रशासनिक अधिकारियों की जवाबदेही और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों को लेकर व्यापक बहस छेड़ दी है। Noida News
हाईकोर्ट के फैसले के बाद अब उत्तर प्रदेश सरकार इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ले जाने की तैयारी कर रही है। सरकार की ओर से हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने के लिए कानूनी विकल्प पर काम किया जा रहा है। इसका अर्थ यह है कि आकृति चौधरी का मामला अब हाईकोर्ट के फैसले पर समाप्त नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट में यदि राज्य सरकार याचिका दाखिल करती है तो वहां यह सवाल फिर उठेगा कि नोएडा के श्रमिक आंदोलन के संदर्भ में आकृति के खिलाफ NSA लगाने के लिए प्रशासन के पास पर्याप्त कानूनी आधार था या नहीं। Noida News
दरअसल, अप्रैल 2026 में नोएडा में श्रमिकों से जुड़े विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने के आरोपों में कई लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए। इसी कार्रवाई की कड़ी में आकृति चौधरी को गिरफ्तार किया गया और बाद में उसके खिलाफ NSA लगाया गया। आकृति पक्ष ने शुरू से ही कार्रवाई को चुनौती देते हुए इसे कठोर और अधिकारों का उल्लंघन बताया। मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस और प्रशासन की ओर से आकृति की गतिविधियों को कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताते हुए NSA कार्रवाई का बचाव किया गया, जबकि बचाव पक्ष ने आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के बीच अंतर की ओर अदालत का ध्यान खींचा। Noida News
आकृति चौधरी मामले में हाईकोर्ट का फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि अदालत ने NSA जैसे कानून के इस्तेमाल को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया है। अदालत ने माना कि निरोधात्मक हिरासत का इस्तेमाल केवल गंभीर और ठोस परिस्थितियों में ही किया जा सकता है। अब राज्य सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी के बाद यह मामला एक नए कानूनी चरण में प्रवेश कर रहा है। सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से न केवल आकृति चौधरी की कानूनी स्थिति बल्कि नोएडा में श्रमिक आंदोलनों के दौरान NSA के इस्तेमाल और प्रशासनिक शक्तियों की सीमाओं को लेकर भी महत्वपूर्ण कानूनी दिशा तय हो सकती है। चेतना मंच की नजर इस मामले की अगली कानूनी कार्रवाई पर बनी हुई है। सुप्रीम कोर्ट में सरकार की याचिका दाखिल होने, सुनवाई की तारीख तय होने और अदालत की ओर से किसी भी तरह का आदेश आने पर इस मामले को आगे अपडेट किया जाएगा। Noida News
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