Advertisement
Advertisement
नोएडा में स्थापित एमिटी यूनिवर्सिटी ने एक बड़ी पहल की है। एमिटी यूनिवर्सिटी ने बड़ी पहल करते हुए ग्रेटर नोएडा में स्थापित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के साथ हाथ मिलाया है।

Noida News : नोएडा में स्थापित एमिटी यूनिवर्सिटी ने एक बड़ी पहल की है। एमिटी यूनिवर्सिटी ने बड़ी पहल करते हुए ग्रेटर नोएडा में स्थापित राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स) के साथ हाथ मिलाया है। नोएडा की एमिटी यूनिवर्सिटी तथा ग्रेटर नोएडा के जिम्स ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण समझौते की घोषणा करते हुए बताया है कि दोनों संस्थान मिलकर देश तथा समाज की भलाई के लिए महत्वपूर्ण काम करेंगे।
छात्रों को क्लिनिकल प्रशिक्षण, अनुसंधान और नवाचार के अवसर प्रदान करने के लिए आज एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ बिहेवियरल हेल्थ एंड एलाइड साइंसेस और ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (जिम्स)के मध्य समझौता पत्र हस्ताक्षर किया गया। इस समझौता पत्र एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला की उपस्थिती में ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक बिग्रेडियर राकेश गुप्ता और एमिटी विश्वविद्यालय की संयुक्त कुलसचिव श्रीमती आशा प्रेमनाथ ने हस्ताक्षर किये। इस अवसर पर ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक बिग्रेडियर राकेश गुप्ता सहित जिम्स की डीन डा रंभा पाठक, एचओडी डा अभिषेक भारती और एसोसिएट प्रोफेसर डा किरन जाखर ने एमिटी विश्वविद्यालय के चांसलर डा अतुल चौहान ने मुलाकात भी की। इस समारोह में एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो वाइस चांसलर डा सुनिल कुमार खत्री, डीन (एजुकेशन) डा एस के श्रीवास्तव और एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ बिहेवियरल हेल्थ एंड एलाइड साइंसेस की निदेशक डा कल्पना श्रीवास्तव भी उपस्थित थी।

इस समझौता पत्र हस्ताक्षर समारोह में ग्रेटर नोएडा के राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक बिग्रेडियर राकेश गुप्ता ने संबोधित करते हुए कहा कि हमारा संस्थान आमजन के स्वास्थ्य और कल्याण को बेहतर बनाने के कार्य कर रहा है। हमारे मरीज और अनुसंधान हमारी सबसे बड़ी शक्ति है और इसी क्रम एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ बिहेवियरल हेल्थ एंड एलाइड साइंसेस जैसे प्रख्यात संस्थानों के साथ मिलकर हम अनुसंधान व नवाचार के क्षेत्र में मिलकर आगे बढ़ना चाहते है। यह ऐतिहासिक समझौता पत्र दोनो संस्थानों को विकास को अवसर प्रदान करेगा और इसका बेहतरीन उपयोग प्रशिक्षण, शिक्षा, अनुसंधान व नवाचार के लिए होगा। एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डा बलविंदर शुक्ला ने कहा कि यह एक ऐतिहासिक समझौता पत्र हैं जो मानिसक एंव व्यवहारिक स्वास्थ्य के अलावा अन्य क्षेत्रों में भी सहयोग और संयुक्त अनुसंधान की संभावनाओं को तलाशनें में हमारी सहायता करेगा। वर्तमान समय में किसी भी देश की उन्नती संस्थानों के अनुसंधान व नवचार पर आधारित होती है ऐसे में नेपथ्य में कार्य करने की बजाय आपसी सहयोग संयुक्त अनुसंधान, छात्रों के मध्य नये कौशल और रोगों के निवारण के नये तरीके ईजाद करेगा जो देश को विकसित भारत 2047 का लक्ष्य हासिल करने में भी सहायक होगा।

एमिटी विश्वविद्यालय के एडिशनल प्रो वाइस चांसलर डा सुनिल कुमार खत्री ने कहा कि इस समझौता पत्र को एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ बिहेवियरल हेल्थ एंड एलाइड साइंसेस तक सीमित ना रखकर बल्कि एमिटी के अन्य संस्थानों द्वारा फार्मेसी, बायोतकनीकी, मॉलेक्यूलर रिसर्च आदि मेें आपसी सहयोग की संभावनाओं को देखा जा सकता है। कई ऐसे अनुसंधान व प्रशिक्षण क्षेत्र है जहां मिलकर कार्य किया जा सकता है। किसी भी समझौता पत्र के हस्ताक्षर के बाद उसका नियमित मूल्यांकन आवश्यक है जिससे कार्य में प्रगति होती रहे। एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ बिहेवियरल हेल्थ एंड एलाइड साइंसेस की निदेशक डा कल्पना श्रीवास्तव ने स्वागत करते हुए कहा कि हमारा संस्थान मानसिक स्वास्थय और व्यवहारिक स्वास्थय के क्षेत्र में उत्कृष्ट है। इस समझौता पत्र के अंर्तगत छात्रों को जिम्स में क्लिनिक प्रशिक्षण के अवसर प्राप्त होगें, इसके अतिरिक्त ओपीडी, केस इतिहास और थिरेपी सत्रों में अनवारण भी मिलेगा। डा श्रीवास्तव ने बताया कि हर बैच में 4 से 6 छात्र होगें और प्रशिक्षण की अवधि 3 से 6 माह की होगी। छात्रो को वास्तिविक केस संभालने के अवसर प्राप्त होगा, निदान कौशल विकसित होगा। संयुक्त अनुसंधान के अवसरों के साथ जिम्स से डाटा कलेक्शन सहयोग, आरसीआई इंन्सपेक्शन मे सहयोग के अवसर भी प्राप्त होगे। इस अवसर पर एमिटी विश्वविद्यालय के अधिकारी व वैज्ञानिक उपस्थित थे। Noida News