नोएडा और आसपास के क्षेत्र की साहित्यिक पहचान को देशभर में मजबूत करने वाले प्रसिद्ध हास्य कवि एवं साहित्यकार बाबा कानपुरी को एक और महत्वपूर्ण साहित्यिक सम्मान से नवाजा गया है।

नोएडा और आसपास के क्षेत्र की साहित्यिक पहचान को देशभर में मजबूत करने वाले प्रसिद्ध हास्य कवि एवं साहित्यकार बाबा कानपुरी को एक और महत्वपूर्ण साहित्यिक सम्मान से नवाजा गया है। दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा आयोजित पुरस्कार प्रतियोगिता-2026 में बाबा कानपुरी की श्रेष्ठ छंद प्रधान काव्य कृति ‘आशाओं के दीप’ को ‘सम्मेलन साहित्य श्री सम्मान’ के लिए चुना गया। 23 सितंबर 2026 को हिंदी भवन, दिल्ली में आयोजित भव्य पुरस्कार सम्मान समारोह में बाबा कानपुरी को यह सम्मान मुख्य अतिथि डॉ. अनिल जोशी, अध्यक्ष-वैश्विक हिंदी परिवार एवं पूर्व उपाध्यक्ष-केंद्रीय हिंदी शिक्षण मंडल, भारत सरकार, के कर कमलों द्वारा प्रदान किया गया। इस अवसर पर साहित्य और काव्य जगत की अनेक प्रतिष्ठित हस्तियों की मौजूदगी रही।
बाबा कानपुरी की पहचान केवल हास्य कविता के मंचों तक सीमित नहीं है। उन्होंने अपनी रचनात्मक प्रतिभा के माध्यम से छंद और काव्य की परंपरा को भी समृद्ध किया है। उनकी काव्य कृति ‘आशाओं के दीप’ को दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन की पुरस्कार प्रतियोगिता में सम्मान मिलना उनकी साहित्यिक साधना की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।नोएडा क्षेत्र के साहित्य प्रेमियों के लिए भी यह उपलब्धि विशेष महत्व रखती है। बाबा कानपुरी लंबे समय से देश के विभिन्न हिस्सों में आयोजित कवि सम्मेलनों में अपनी विशिष्ट हास्य एवं काव्य शैली से श्रोताओं के बीच पहचान बना चुके हैं।
सम्मान समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं सम्मेलन परिवार द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद कार्यक्रम में प्रसिद्ध हास्य कवि बाबा कानपुरी ने हास्य रस में सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। बाबा कानपुरी की अनूठी प्रस्तुति ने समारोह में मौजूद साहित्यकारों और श्रोताओं का विशेष ध्यान आकर्षित किया। सरस्वती वंदना समाप्त होते ही पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। हास्य के साथ साहित्य और भक्ति का यह अनोखा संगम समारोह के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा।
कार्यक्रम में दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन की अध्यक्षा एवं वरिष्ठ कवयित्री श्रीमती इंदिरा मोहन, महामंत्री एवं शिक्षाविद डॉ. हरीश अरोड़ा तथा संगठन मंत्री एवं छंद शास्त्री आचार्य ‘अनमोल’ सहित देशभर से आए सैकड़ों कवि एवं साहित्यकार उपस्थित रहे।
सम्मान प्रदान किए जाने के दौरान मुख्य अतिथि डॉ. अनिल जोशी के साथ सम्मेलन की अध्यक्षा श्रीमती इंदिरा मोहन, संगठन मंत्री आचार्य अनमोल तथा नागरी लिपि परिषद के महासचिव डॉ. हरि सिंह पाल भी मौजूद रहे।
10 अन्य साहित्यकारों को भी मिला सम्मान
सम्मेलन में बाबा कानपुरी के अलावा अन्य विशिष्ट साहित्यकारों को भी विभिन्न श्रेणियों में सम्मानित किया गया। इनमें श्री चंद्रभानु आर्य और डॉ. अंजु दुआ जैमिनी को ‘सम्मेलन साहित्य रत्न’ सम्मान प्रदान किया गया। श्री कमलेश पांडे ‘पुष्प’, श्री घमंडी लाल अग्रवाल और श्री अशोक कश्यप को ‘सम्मेलन साहित्य विभूषण’ सम्मान से सम्मानित किया गया। वहीं सुश्री नीलम मदान और सुश्री पुष्पा सिन्हा को ‘सम्मेलन साहित्य भूषण’ सम्मान प्रदान किया गया।इसके अलावा सुश्री कविता विकास, डॉ. मनीषा गिरी और सुश्री नीती जैन को भी ‘सम्मेलन साहित्य श्री सम्मान’ से विभूषित किया गया।
साहित्य जगत की अनेक हस्तियों की रही मौजूदगी
सम्मान समारोह में सम्मेलन के उपाध्यक्ष प्रो. रवि शर्मा ‘मधुप’, कोषाध्यक्ष राकेश शर्मा, नवीन झा, डॉ. हरि सिंह पाल, डॉ. नीलम सिंह, डॉ. वीणा गौतम, डॉ. ओंकार त्रिपाठी, सदानंद पांडेय, रवि शंकर तिवारी, डॉ. पुष्पेंद्र शर्मा, श्रीमती किसलय शर्मा, समीर पांडेय, पूर्णिमा शर्मा और उद्धव विश्वकर्मा सहित अनेक साहित्यकार एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
नोएडा की साहित्यिक पहचान को देशभर में पहुंचाया
बाबा कानपुरी की यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने नोएडा क्षेत्र के साहित्य और काव्य मंच की पहचान को देशभर तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। हास्य कविता के क्षेत्र में उनकी विशिष्ट शैली और मंचीय प्रस्तुति ने उन्हें देश के अनेक प्रतिष्ठित कवि सम्मेलनों में अलग पहचान दिलाई है। उनकी रचनाओं में हास्य और व्यंग्य के साथ-साथ सामाजिक सरोकार तथा साहित्यिक छंद की परंपरा का भी समावेश दिखाई देता है। अब उनकी काव्य कृति ‘आशाओं के दीप’ को दिल्ली हिंदी साहित्य सम्मेलन का ‘सम्मेलन साहित्य श्री सम्मान’ मिलना उनकी साहित्यिक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ने के रूप में देखा जा रहा है। बाबा कानपुरी को मिले इस सम्मान की खबर सामने आने के बाद नोएडा क्षेत्र के साहित्य प्रेमियों और कवि जगत से जुड़े लोगों में खुशी का माहौल है। साहित्यिक मंचों पर अपनी अलग पहचान बना चुके बाबा कानपुरी के लिए यह सम्मान उनकी वर्षों की साहित्य साधना और मंचीय लोकप्रियता के साथ-साथ उनकी छंद प्रधान काव्य रचनाओं की स्वीकार्यता का भी प्रमाण है।
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