इस प्रकार का आरोप किसी साधारण व्यक्ति पर लगता तो इसे सामान्य मामला माना जा सकता था। यहां तो आरोप वकीलों की प्रतिष्ठित संस्था बार एसोसिएशन के मुखिया (अध्यक्ष) पर लगा है। साफ जाहिर है कि इस मामले को साधारण मामला नहीं माना जा सकता।

Noida News : नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा में सक्रिय वकीलों की संस्था फौजदारी एवं दीवानी बार एसोसिएशन गौतमबुद्धनगर के अध्यक्ष मनोज कुमार भाटी एडवोकेट चर्चा का विषय बने हुए हैं। बार एसोसिएशन जैसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन मनोज कुमार भाटी के ऊपर फर्जी डिग्री लेने का बड़ा आरोप लगा है। इस प्रकार का आरोप किसी साधारण व्यक्ति पर लगता तो इसे सामान्य मामला माना जा सकता था। यहां तो आरोप वकीलों की प्रतिष्ठित संस्था बार एसोसिएशन के मुखिया (अध्यक्ष) पर लगा है। साफ जाहिर है कि इस मामले को साधारण मामला नहीं माना जा सकता।
आपको बता दें कि बार एसोसिएशन (फौजदारी एवं दीवानी बार एसोसिएशन गौतमबुद्धनगर) के अध्यक्ष मनोज कुमार भाटी के विरूद्ध ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाने में FIR दर्ज हुई है। मनोज कुमार भाटी के विरूद्ध ग्रेटर नोएडा में दर्ज हुई FIR में उनेक विरूद्ध IPC की धारा-420, 467, 468 तथा 471 जैसी गंभीर धाराएं लगाई गई हैं। यह FIR दर्ज होने के बाद बार एसोसिएशन अध्यक्ष मनोज कुमार भाटी कह रहे हैं कि उनकी बढ़ती हुई लोकप्रियता से तंग होकर उनके राजनीतिक विरोधियों ने उनके विरूद्ध फर्जी FIR दर्ज कराई है। मनोज कुमार भाटी एडवोकेट की यह दलील किसी के भी गले से नहीं उतर रही है। दरअसल उनके विरूद्ध FIR दर्ज करने से पहले नोएडा कमिश्नरी की पुलिस ने पूरे मामले को गंभीरता से परखा है। पूरे मामले को परखने के बाद ही पुलिस ने वकीलों के इतने प्रतिष्ठित संगठन बार एसोसिएशन के अध्यक्ष के विरूद्ध FIR दर्ज की है। नोएडा कमिश्नरी पुलिस अच्छी तरह से जानती है कि यह मामला कितना अधिक संवेदनशील मामला है।
ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाने में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज कुमार भाटी के विरूद्ध FIR उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद दर्ज हुई है। दरअसल ग्रेटर नोएडा पुलिस ने मनोज भाटी के विरूद्ध जिस तहरीर के आधार पर FIR दर्ज की है वह तहरीर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक पत्र है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखा गया पत्र मुख्यमंत्री के कार्यालय के द्वारा नोएडा कमिश्नरी पुलिस को भेजा गया था। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पहले पूरी जांच परख की थी। पूरी जांच परख के बाद ही ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क थाने में FIR दर्ज की गई।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज कुमार भाटी के विरूद्ध दर्ज कराई गई FIR में बहुत ही गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इस प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए यहां पूरी FIR को यहां ज्यों का त्यों प्रकाशित किया जा रहा है। FIR में लिखा गया है कि मनोज कुमार( भाटी 22 फरवरी 1991 से 30 अप्रैल 2009 तक भारतीय वायुसेना में सेवारत रहा, डिस्चार्ड सर्टिफिकेट के आधार पर सेवानिवृत्ति 01.05.2009 से प्रभावी है। डिस्चार्ज सर्टिफिकेट की प्रति संलग्न है जो निम्न प्रकार है- Discharge Certificate to whom so ever it may concerned This is to certify that 722031F Sargent Manoj Kumar Bhati S/o. Shri Dharamvir Singh have served in Indian Air Force (IAF) w.e.f. 22 Feb. 91 to 30 Apr. 09. He is proceeding on discharge from IAF w.e.f. 30 Apr. 09 (PM) vide AFRO letter RO/2803/1/RV (Dis) dated 09 Apr. 09. He will be struck of strength of Indian Air Force w.e.f. 01 May 09 मनोज कुमार भाटी द्वारा सर्विस के दौरान ही विना विभाग की अनुमति उस्मानिया यूनिवर्सिटी हैदराबाद, आन्ध प्रदेश की 01 वर्षीय स्रातक डिग्री (जो कि 02 वर्ष में पत्राचार के माध्यम से अक्टूबर/नवम्बर 1995 से अप्रैल/मई 1997 तक प्राप्त की गई है, जो कि संलग्न है) के आधार पर जनहित कालेज ऑफ लॉ ग्रेटर नोएडा, जिला गौतमबुद्धनगर में एल०एल०बी० की 03 वर्षीय रेगुलर डिग्री कोर्स करने हेतु प्रथम वर्ष ने 2004 में यूनिवर्सिटी के शैक्षणिक नियमों तथा बर कौंसिल ऑफ इण्डिया के नियमों के विरुद्ध एयर फोर्स विभाग से तथ्य छिपाकर प्रवेश लिया तथा 2007 में 76 प्रतिशत उपस्थिति के साथ अपने आपको कक्षा में लगातार तीन वर्ष तक फर्जी तरीके से बिना सर्विस से अनुपस्थित रहे एल०एल०बी० की डिग्री प्राप्त की (विधि स्रातक की डिग्री संलग्न है) तथा उक्त तीनों वर्षों का एयर फोर्स से भी वेतन प्राप्त किया, जो एयर फोर्स सेना की सेना नियमावली के भी विपरीत है। लगातार 03 वर्ष तक उपस्थित का ब्योरा प्रधानाचार्य द्वारा जारी प्रोविजनल कम अटेन्डेन्स सर्टिफिकेट में लिखित है जो संलग्न है जो विदित हो कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय द्वारा सम्बद्ध कालेजों द्वारा स्रातक की डिग्री सन् 1989 में त्रिवर्षीय कर दी गयी है और यदि किसी छात्र द्वारा पूर्व में 02 वर्षीय स्नातक डिग्री प्राप्त की थी तो ऐसे छात्र को एक वर्षीय ब्रिज कोर्स के बाद ही अग्रिम शिक्षा प्राप्त करने हेतु प्रवेश दिया जा सकता है, किन्तु इस मामले में मनोज कुमार भाटी द्वारा मात्र 01 वर्षीय स्रातक डिग्री पत्राचार के माध्यम के माध्यम से की गयी थी, जिसके आधार पर त्रिवर्षीय एल०एल०बी० व्यवसायिक कोर्स में छल कपट व धोखाधडी से प्रवेश लिया गया बार कौसिल आफ इण्डिया के रुल रेगूलेशन द्वारा भी त्रिवर्षीय एल० एल०बी० रेगूलर कोर्स करने हेतु 10+2+3 के तहत स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद ही प्रवेश लेने की अर्हता होती है, या 05 वर्षीय विधिस्रातक कोर्स पूरा करने हेतु 10+2 के बाद ही अर्हता प्राप्त होती है यहाँ यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है है कि चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ द्वारा दिनांक 18.02.2020 को पत्रांक संख्या 4272 दिनांकित 18.02.2020 के द्वारा आर०टी०आई० एक्ट 2005 के तहत निम्न सूचना उपलब्ध करायी गयी थी चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ पत्रांकः- कमेटी सेल /4172 दिनांक 18.02.2020 उपकुल सचिव जनसूचना प्रकोष्ठ, चौधरी धरण सिंह विश्वविधालय, मेरठ। महोदय पत्रांक जनसूचना/22112/22150 दिनांक दिनांक 03.0 03.05.2019 के द्वारा यतेन्द्र नागर द्वारा मांगी गई बिन्दुबार सूचना निम्न प्रकार है:- बिन्दु 01. मांगी गई बिन्दुवार सूचना 02 वर्ष ग्रजुयेशन करने के पश्चात् विना ब्रिज कोर्स किये 03 वर्षीय व्यवसायिक कोर्स में नियमित दाखिला लिया जा सकता है। विभाग द्वारा बिन्दुवार प्रेषित आख्या नही दिया जा सकता 02. यदि विश्वविद्यालय द्वारा किसी को कोई दाखिला दे दिया गया है, तो क्या यह मान्य है, मान्य नहीं है। 03 धोखाधड़ी से यदि 03 वर्षीय व्यवसायिक फोर्स हेतु शैक्षणिक प्रमाण-पत्र प्राप्त कर लिया गया है, तो आपके विश्वविद्यालय के नियंमानुसार उसकी क्या वैधता है। वैध नहीं है। ह० अपठित प्रभारी सैल कमेटी जिसके अनुसार स्पष्ट रूप से कहा गया है कि 2 वर्ष येके ग्रेज्यूएशन के पश्चात् बिना ब्रिज कोर्स किये 3 वर्षीय व्यवसायिक फोर्स में नियमित दाखिला नहीं लिया जा सकता है और यह भी बताया गया है कि यदि विश्वविद्यालय द्वारा किसी को कोई दाखिला दे दिया है तो वह मान्य नहीं है तथा इसी क्रम में आगे बताया है कि धोखाधड़ी से यदि 3 बर्षीय व्यवसायिक फोर्स हेतु शैक्षणिक प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया है तो वह विश्वविद्यालय के अनुसार वैध नहीं है, विधि खातक त्रिवर्षीय कोर्स व्यवसायिक कोर्स ही श्रेणी में आता है, अर्थात् तथ्य छिपाकर त्रिवर्षीय विधि जातक व्यवसायिक कोर्स में लिया गया प्रवेश तथा तदोपरान्त प्राप्त विधि स्नातक व्यवसायिक डिग्री पूर्णतः अवैध है। विश्वविद्यालय द्वारा सूचना अधिकार के तहत उपलब्ध करायी गयी जनसूचना की प्रति साथ संलग्र है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के शैक्षणिक नियम 18 में वर्णित किया गया है कि - "The candidates who have passed the first graduation degree on the pattem of 11+3 or 12+2+2 or 10+1+3(ie. who have completed only 14 years schooling) shall not be eligible for admission to Post graduate classes unless they pass one year bridge course i.e. all courses prescribed for the final examination of first degree course. But the candidates who have already passed one Post Graduate examination are not required to pass Bridge Course for admission in Post Graduate classes. Further candidates are also not required to pass Bridge Course for admission to LLB. and B.Ed.course." नियम संख्या 19 में वर्णित किया गया है कि "The candidates who have passed first graduate degree with subjects consisting of practical examination may change the Faculty/Subjects for completing the requirements of Bridge Course for admission to Post Graduate classes नियम संख्या 22 में वर्णित किया गया है कि Candidates having passed graduation from other Universities shall not be considered for enrolment to graduation in additional single subject. नियम संख्या 23 में वर्णित किया गया है कि "Candidates who have passed graduation (2 year course) from other Universities will not be eligible for enrolment in Bridge Course in this University". उपरोक्त वर्णित नियम 22 में 23 में उल्लेखित है कि दूसरे विश्वविद्यालय से 02 वर्षीय ग्रेज्यूएशन व नातक उत्तीर्ण करने वाले विद्यार्थी चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से ब्रिज कोर्स करने के पात्र भी नहीं होगे। उक्त के सन्दर्भ में मनोज कुमार भाटी द्वारा उस्मानिया यूनिवर्सिटी अथवा चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी से कोई ब्रिज कोर्स एल०एल०बी० के रेगुलर 03 वर्षीय डिग्री लेने हेतु प्रदेश से पूर्व भी नहीं किया गया तथा चौ० चरण सिंह विश्वविद्यालय की शैक्षणिक नियमावली के तहत एल०एल०बी० को त्रिवर्षीय कोर्स में प्रवेश लेने से पूर्व कोई पोस्ट ग्रेजुएशन शिक्षा भी प्राप्त नहीं की है, अर्थात् रूपए है कि उक्त शैक्षणिक नियमावली के तहत मनोज कुमार भाटी द्वारा प्राप्त 03 वर्षीय एल०एल०बी० की डिग्री नियम विरुद्ध होने के कारण पूर्ण रूप से अवैध है, जिसका निरस्त किया जाना विधि सम्मत है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ की उपरोक्त शैक्षणिक नियमावली संलय है। मनोज कुमार भाटी द्वारा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ तथा द्वार कौसिल ऑफ इण्डिया को स्ल रेगुलेशन के विरुद्ध तथ्य छिपाकर विधि नातक त्रिवर्षीय एल०एल०बी० व्यवसायिक कोर्स में वर्ष 2004 में प्रवेश लेकर 76 प्रतिशत उपस्थिति के साथ वर्ष 2007 में विधि जातक की व्यवसायिक डिपी जनहित कॉलेज ऑफ लॉ, ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर से प्राप्त की, जबकि मनोज कुमार भाटी तत्कालीन समय में किसी अन्यत्र स्थान पर भारतीय वायुसेना में सेवारत था, एल०एल०बी० की कक्षा में हाजिर हुए 76 प्रतिशत उपस्थिति सम्भव नहीं है। उक्त डिपी नियम विरूद्ध प्रवेश प्रक्रिया अपना कर प्राप्त की गई है, जो प्रारम्भिक समय से ही अवैध होने के कारण निरस्त की जानी थिधि सम्मत है। मनोज कुमार भाटी भारतीय बायु सेना में नियुक्त होते समय उसकी शैक्षणिक योग्यता केवल हाईस्कूल थी, उसके बाद जो भी शिक्षा मनोज कुमार भाटी द्वारा प्राप्त की गई है, वह भारतीय वायु सेना की बगैर अनुमति के लगातार वेतन प्राप्त करते हुए। प्राप्त की है। अनुमति का कोई भी विभागीय साक्ष्य मनो कुमार भाटी के पास किसी प्रकार का नहीं है, जबकि डिस्चार्ज बुक के पार्ट 5 के क्रमांक 16 Civil educational Qualification के कॉलम में साजिशन विभागीय मिली भगत से अंकित करा ली गई है, जो निम्न प्रकार अंकित है- (a) At the time of joining service Matric (b) Acquired while in service- B.A., LL.B. जबकि कोई भी विभागीय अनुमति 03 वर्षीय एल० एल०बी० की व्यवसायिक डिग्री प्राप्त करने हेतु प्रवेश के समय से एल०एल०बी० द्विग्री पूर्ण होने तक सम्बन्धित कॉलेज अथवा यूनिवर्सिटी को नहीं दी गई। एल० एल०बी० के 03 वर्षीय व्यवसायिक कोर्स में प्रवेश का रजिस्ट्रेशन कराते समय भी रजिस्ट्रेशन फॉर्म के साथ संलग्र नहीं की गई। भारतीय वायुसेना में सेवारत रहकर पूर्ण वेतन प्राप्त करते हुए नियमावली के तहत ऐसी कोई अनुमती देने का प्रावधान जिसका लाभ भारतीय वायु सेना को न हो अनुमति देने का नहीं है। यह स्पष्ट है कि कोई अनुमति प्राप्त नहीं की गई है। कारण आज तक मनोज कुमार भाटी द्वारा किसी भी स्तर पर त्रिवर्षीय विधि स्नातक की है। इसी व्यवसायिक शिक्षा प्राप्त करने हेतु एयर फोर्स विभाग से अनुमति प्रदर्शित नहीं की गयी है। की केवल डिस्चार्ज बुक में शिक्षा को विभागीय साजिश के तहत नियम विरुद्ध अंकित कराकर गैर कानूनी लाभ प्राप्त कर कालेज, यूनिवर्सिटी, भारतीय वायु सेना तथा बार कौसिंल आफ इण्डिया के नियमों के विपरीत तथ्य छिपाकर छल कपट व धोखाधड़ी से फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर अवैध तरीके से शिक्षा प्राप्त करने से लेकर उत्तर प्रदेश बार कौसिंल में रजिस्ट्रेशन कराने तक गम्भीर अपराध कारित किया गया है उपरोक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए मनोज कुमार भाटी द्वारा यार कौसिल आफ इन्डिया तथा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के साथ साथ साथ भारतीय वायु सेना के साथ भी साजिशन जानबूझ कर छल कपट व धोखाधड़ी कर फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर एल० एल०वी के त्रिवर्षीय रेगूलर व्यवसायिक कोर्स में वर्ष वर्ष 2004 में प्रवेश से लेकर तथाकथित फर्जी 76 प्रतिशत उपस्थिति के साथ वर्ष 2007 में विधि व्यवसायिक परीक्षा उत्तीर्ण करने तथा समानान्तर समय अर्थात् उपरोक्त तीनों वर्षों से भारतीय वायु सेना से वेतन प्राप्त कर गैर कानूनी लाभ प्राप्त कर भारतीय वायु सेना के साथ भी विधि विरुध गम्भीर अपराध कारित किया है। मनोज कुमार भाटी द्वारा तय्य छिपाकर बार कौसिल ऑफ इण्डिया तथा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के शैक्षणिक प्रवेश के नियमों के विपरीत जनहित लॉ कांलिज में प्रवेश लिया और अपने नाम से किसी व्यक्ति से कक्षा में उपस्थिति दर्ज कराई तथा लगातार तीन वर्ष तक कक्षा में 76 प्रतिशत उपस्थिति के साथ परीक्षा हेतु प्रवेश-पत्र प्राप्त कर तथाकथित तरीके से निगम विरुद्ध उत्तीर्ण की। उक्त त्रिवर्षीय विधि व्यवसायिक डिग्री शैक्षणिक नियम विरुद्ध होने के कारण निरस्त किया जाना विधि सम्मत है। मनोज कुमार भाटी वायुसेना की नौकरी से दिनांक 30.04.2009 को सेवामुक्त हुआ, किन्तु फर्जी शपथ-पत्र व घोषणा-पत्र के आधार पर दौरान सेवारत रहते हुए दिनाक 24.04.2009 को तथ्य छिपाकर उत्तर प्रदेश बार कौसिल में बतौर अधिवक्तता रजिस्ट्रेशन कराने हेतु आवेदन किया, जिसके आधार पर दिनांक 26.04.2009 को तथाकथित अवैध फर्जी डिग्री के आधार पर फर्जी व कूटरचित शपथ-पत्र व शोषणा-पत्र के आधार पर साजिशन छल-कपट व धोखाधड़ी से उत्तर प्रदेश बार कौसिल में रजिस्ट्रेशन भी करा लिया, जबकि रजिस्ट्रेशन फार्म के साथ मनोज भाटी द्वारा शपथ-पत्र के माध्यम से की गई घोषणा के पैरा नं0-03 में लिखा है कि "में शासन अथवा किसी अन्य विभाग में नियुक्त नहीं हूँ।" तथा उ०प्र० बार कौसिल में रजिस्ट्रेशन के दौरान दिए गए शपथ-पत्र दिनांकित 24.04.2009 के पैरा 05- "यह कि मैं इस समय किसी नौकरी, व्यापार एवं व्यवसाय में कार्यरत नहीं हूँ तथा इसी क्रम में पैरा नं0-6- "यह कि मैं कभी किसी नौकरी, व्यापार एवं व्यवसाय में कार्यरत नहीं था और न ही इस समय हूँ।" (तथाकथित घोषणा-पत्र एवं शपथ-पत्र की प्रति संलग्छ है) जबकि दिनांक 30.04.2009 तक भारतीय वायु सेना में सेवारत था। उक फर्जी व कटरचित शपथ-पत्र के साथ की गई घोषणा में जानबूझकर बार कौसिल ऑफ उत्तर प्रदेश में पंजीकरण होने के उपरान्त 01 मई 2009 अंकित की गई है, जबकि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया 24.04.2009 तथा रजिस्ट्रेशन 26.04.2009 को हो चुका था, जिसका रजिस्ट्रेशन नं0-UP 02742/09 शपथ-पत्र पंजीकरण के आवेदन-पत्र के साथ ही आवेदन के दिन ही दिया जाना विधि सम्मत है। चौधरी चरण सिंह यूनिवर्सिटी मेरठ से मान्यता प्राप्त जनहित कॉलेज ऑफ लॉ पेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर में तथ्य छिपाकर छल-कपट व धोखाधड़ी से फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ के शैक्षणिक नियमों व बार कौंसिल ऑफ इण्डिया के नियमों के विपरीत तथा भारतीय वायुसेना से विभागीय अनुमति प्राप्त किये बगैर त्रिवर्षीय विधि स्रातक की व्यवसायिक डिग्री में दर्ष 2004 में प्रवेश लेकर 2007 में विधि व्यवसायिक डिग्री प्राप्त करने व उ0प्र0 बार कौंसिल इलाहाबाद में विधि नातक की अवैध व्यवसायिक डिग्री के आधार पर साजिशन फर्जी छल-कपट व धोखाधड़ी से फर्जी व कूटरचित शपथ-पत्र व घोषणा-पत्र के आधार पर किये गए रजिस्ट्रेशन भी न्यायहित में रिपोर्ट दर्ज करने हेतु जांच कर उचित कानूनी कार्यवाही की जानी विधि सम्मत है। अतः श्रीमान जी से प्रार्थना है कि उक्त तथ्यों को दृष्टिगत रखते हुए मनोज कुमार भाटी द्वारा चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय की प्रवेश हेतु नियमावली व उक्त विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त जनहित कौलेज ऑफ लॉ ग्रेटर नोएडा, गौतमबुद्धनगर व बार कौसिल ऑफ इण्डिया के नियमों के विरुद्ध तीनो वर्षों का लगातार वेतन प्राप्त करते हुए बिना विभागीय अनुमति के त्रिवर्षीय रेगुलर विधि खातक की व्यवसायिक डिग्री वर्ष 2004 से 2007 तक 76 प्रतिशत उपस्थिति के साथ जानबूझकर साजिशन तथ्य छिपाकर छल-कपट व धोखाधड़ी से फर्जी व कूटरचित दस्तावेजों को माध्यम बनाकर गैर कानूनी तरीके से प्राप्त अवैध विधि जातक की व्यवसायिक डिपी के आधार पर फर्जी व कूटरचित शपथ-पत्र व घोषणा-पत्र देकर उ०५० बार कौसिल इलाहाबाद में कराये गए रजिस्ट्रेशन के सम्बन्ध में जांच कर कोतवाल कोतवाली नालेजपार्क तृतीय, गौतमबुद्धनगर को एफ० आई०आर० दर्ज किये जाने हेतु आदेश पारित करने का कष्ट करें। Noida News