
Big News: नोएडा/ग्रेटर नोएडा। कोई ठग अथवा अपराधी जब ठगी या अपराध करने पर आता है तो आगा-पीछा सब कुछ भूल जाता है। वह यह भी भूल जाता है कि जिसे वह ठग रहा है वह कितना बड़ा व प्रभावशाली व्यक्ति है। ऐसा ही कुछ हुआ है कैलाश अस्पताल समूह के साथ। ज्ञात रहे कि यह अस्पताल समूह गौतमबुद्धनगर के सासंद डा. महेश शर्मा की कंपनी है। इसी कंपनी में काम करने वाले दो ठग कर्मचारियों ने अस्पताल को लाखों रूपए का चूना लगा दिया।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक 24 सितंबर 2022 (करीब तीन महीने पहले) कैलाश अस्पताल समूह के प्रबंधन को एक बड़ी ठगी का पता चला। पता चलते ही कैलाश अस्पताल में हड़कंप मच गया। अस्पताल समूह के मुख्य वित्त नियंत्रक (सीएफओ) अजय शर्मा ने इस आशय की तहरीर 24.9.2022 को ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क प्रथम (।) थाने में दी। अजय शर्मा का कहना है कि पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने की बजाय ''ऊपर'' के अधिकारियों से बात करने को कहा। श्री शर्मा ने एसीपी से लेकर तत्कालीन पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह तक सबसे गुहार लगाई कि उनकी तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज की जाए।
अजय शर्मा ने चेतना मंच को बताया कि तीन महीने तक यह तहरीर फाइलों में इधर-उधर घूमती रही। तीन महीने बाद अब 15 दिसंबर 2022 को पुलिस ने इस मामले में धारा-420, 467, 468 व 120बी के तहत एफआईआर दर्ज की है।
Big Newsदर्ज की गई एफआईआर के मुताबिक नॉलेज पार्क स्थित कैलाश अस्पताल में रोहित जैन पुत्र केवल चंद जैन निवासी प्रताप नगर सेक्टर-8 जयपुर सिटी (राजस्थान) एचआर मैनेजर के पद पर कार्यरत था। इसके अलावा एचआर एग्जीक्यूटिव रत्नेश कुमार अपने पिता राजेंद्र प्रसाद ओझा के साथ मिलकर पिछले काफी समय से अस्पताल के कर्मचारियों के नाम से फर्जी अटेंडेंस तैयार कर उनका पैसा अपने रिश्तेदार के अकाउंट में ट्रांसफर कर धोखाधड़ी करके 60 लाख रुपये ठग लिए। अस्पताल के एचआर मैनेजर रोहित जैन ने अपनी पत्नी प्रियंका जैन व रत्नेश कुमार ने अपने पिता राजेंद्र प्रसाद ओझा के अलावा कुछ और लोगों को अपने साथ मिलाया और अस्पताल के साथ धोखाधड़ी करके लाखों रूपये हड़प लिए।
दर्ज रिपोर्ट में बताया गया है कि अस्पताल में कोई भी नया कर्मचारी कुछ दिन बाद अगर नौकरी छोड़कर चला जाता था तो यह लोग उसके नाम पर फर्जी कागजात तैयार कर लेते थे। एचआर मैनेजर रोहित जैन व रत्नेश कुमार उस कर्मचारी के पूरे महीने का वेतन अपने अकाउंट अथवा अपनी पत्नी एवं पिता के द्वारा संचालित फर्जी अकाउंट में ट्रांसफर करा लेते थे। आरोपियों ने फर्जी नामों से अकाउंट खुलवा कर सुनियोजित षड्यंत्र के तहत अस्पताल के रुपये हड़प लिये। इस पूरे फर्जीवाड़े में एचआर मैनेजर रोहित जैन के अलावा उनकी पत्नी प्रियंका जैन, रत्नेश कुमार व उसके पिता राजेंद्र प्रसाद ओझा सहित करीब 12 लोग शामिल हैं। आरोपी पिछले काफी समय से फर्जीवाड़े को अंजाम देकर अस्पताल को चूना लगाते आ रहे हैं। थाना नॉलेज पार्क प्रभारी विनोद कुमार सिंह ने बताया कि मामले की रिपोर्ट दर्ज कर जांच पड़ताल की जा रही है। रिपोर्ट तीन महीने बाद क्यों लिखी गई? इस प्रश्न का प्रभारी निरीक्षक ने उत्तर टाल दिया।
आलोक के राज में दर्ज नहीं ! इस पूरे प्रकरण में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सबसे बड़ा तथ्य तो यह है कि जिस पार्टी भाजपा की प्रदेश व केन्द्र में सरकार है। उसी पार्टी के सांसद डा. महेश शर्मा को अपने साथ हुई ठगी की रिपोर्ट लिखवाने में पूरे तीन महीने लग गए। पाठक स्वयं अंदाजा लगा सकते हैं कि जब सांसद का यह हाल था तो आम जनता का क्या हाल रहा होगा। दरअसल गौतमबुद्धनगर जिले के निवर्तमान पुलिस कमिश्नर आलोक सिंह की पुलिसिंग का यही तरीका था। आलोक सिंह जिस किसी की चाहते थे एफआईआर दर्ज कराते थे और जिसकी नहीं चाहते थे वह व्यक्ति कितना ही बड़ा व प्रतिष्ठित क्यों न हो वह एफआईआर लिखवा ही नहीं सकता था। यह अकेला मामला नहीं है ठगी के ऐसे हजारों मामले पुलिस की फाइलों में आज भी दर्ज हैं।
दोषी पुलिस अफसर का क्या होगा ? इस प्रकरण को घटित हुए करीब तीन महीने का समय बीत चुका है। इन तीन महीनों में अपराधी न जाने कहां से कहां भाग चुके होंगे। हो सकता है कि किसी दूसरे देश में ही भाग गए हों। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठता है कि करोड़ों की ठगी करने वाले ठगों को किसने संरक्षण दिया? जिस पुलिस अफसर ने तीन महीने तक ठगी की एफआईआर दर्ज नहीं होने दी क्या वह ''गुनहगार'' नहीं है। अपराधियों को ठगे गए माल को ठिकाने लगाने, सबूत मिटाने व फरार हो जाने का समय देने वाले पुलिस अफसर के खिलाफ कब और क्या कार्यवाही होगी? इस प्रकार के कई सवाल हवा में तैर रहे हैं।