
नोएडा में नव युवा जागरण मंच समिति सेक्टर-22 के अध्यक्ष प्रदीप वोहरा के अनुसार उनका मंच पूरे साल सेक्टर-22 में एक्टिव रहता है। हर धर्म, पूजन त्यौहार, सब युवा खुलकर खुशी से मनाते हैं। एक जगह पूरा भोजन प्रसाद बनता है और भोजन प्रसाद को बनाने तथा वितरण में मंच के सब ही सदस्य भाग-भागकर काम करते हैं। डॉ. शोभा भारद्वाज जो कान्हा के लिए 56 भोग स्वयं अपने हाथों से अपने परिवार वालों की मदद से बनाती हैं, पूरे परिवार को आमंत्रित करती हैं। उनका कहना है कि कृष्ण का समाजवाद ही गोवर्धन है। बी.एस. शर्मा का मानना है कि गोवर्धन पर्वत सा विशाल बनें और सब की सहायता के लिए आपका हाथ उठे।
टी.एस. गौड़ (अध्यक्ष हिन्दू युवा वाहिनी) के अनुसार मिल-जुलकर मनाए जाने वाले ये पर्व पूरे परिवार में नव ऊर्जा, स्मृति एवं खुशहाली का संचार करते हैं। सेक्टर-11 से गौरव शर्मा का कहना है कि खुशी मन की अच्छी होती है, धन की नहीं, क्योंकि धन की खुशी घमंड पैदा करती है और मन की खुशी संस्कार। संस्कार हम बच्चों को तभी दे सकेंगे जब परिवार के साथ बल्कि आस पास मेलजोल रखेंगे। यह भी विडंबना है कि एक तरफ दिवाली, गोवर्धन, भाई दूज त्यौहार सभी मिठाइयों से ही शुरू होने वाले पर्व शुरू होते हैं साथ ही शुरू हो जाता है। नकली दूध, नकली खोया, नकली पनीर का प्रचार।
पेशे से इंजीनियर योगेश वत्स कहते हैं कि गीता के श्लोक में भी लिखा है कि आप अपना कर्म करते रहें, उसका क्या फल मिलेगा या दुनिया क्या कहेगी, इस पर ध्यान ना दें। आज हमारे समाज को जुड़े रहने की अत्यधिक आवश्यकता है। क्योंकि एकल परिवर और उसमें भी एक ही बच्चा इसमें तो समाज का आपस में मिल-जुलकर रहना ही सुरक्षित रहने का विकल्प दिखाई देता है। भगवान विष्णु जब कृष्ण (Krishna) के अवतार में आए तो यह उनका आखिरी अवतार था और उनका ही कहना था कि अपने इस अवतार में मैं जो भी हमारे सुख-दुख व कर्म हैं वह सब मैं इस जन्म में ही खत्म करके जाऊँगा। श्रीकृष्ण का यह भी कहना था कि प्रकृति की पूजा ही सबसे अच्छी पूजा है। हम प्रकृति से प्रेम करेंगे तो हमारा जीवन खुशहाल हो आगे चलेगा।
यही कारण है कि सेक्टरों में जगह-जगह जो हरियाली है। वह प्राधिकरण के उद्यान विभाग के साथ यहां रहने वालों ने ही मिलकर की है। राजस्थान के जाट महाराजा सूरजमल का कहना था कि मेरे हृदय में कृष्ण, और मैं पूजता शिव को। मने घोड़ा गाड़ी का लालच कोयना, मारे तो हृदय में भी शंभू विराजमान हैं। क्योंकि शिव शांत रूप में भोला है पर उग्र रूप में महाकाल। युद्ध में सूरजमल पैदल भागते थे और शत्रु सेना में हाहाकार मचाते थे। आज हर उत्सव को मनाने के लिए युवा शक्ति भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। अत: हर युवा को भी आज हृदय में मधुसूदन को बसा वक्त आने पर शिव का तांडव करना सीखना होगा। यह भी आवश्यक है कि विद्वान लोग आम जनता को सकारात्मक की ओर प्रेषित करें। उत्सव और त्योहार इक_े होकर मनाने में यकीन करें। गलत प्रचार करने वालों को रोकें। इसकी वजह से कर्ज लेकर मिठाइयाँ बनाने वाले हलवाई कभी-कभी बर्बाद ही हो जाते हैं।