
फिर गर्मी आई, और चारों ओर जल संकट की वही पुरानी हाय-तौबा! कहीं गंदा पानी, कहीं थोड़ा-सा साफ पानी, कहीं बहुत कम जल, और कहीं तो बस निर्जल ही निर्जल। यानि गर्मी मतलब पानी के लिए इंतज़ार।
ऐसा नहीं है कि इस पर कुछ किया ही नहीं गया हो। तमाम गोष्ठियाँ हुईं, कार्यक्रम हुए, बैठकें बुलाई गईं, अखबारों में खूब लिखा गया, लोगों ने सुझाव भी दिए। इतने स्तर पर कार्यक्रम करने के बावजूद भी जल समस्या जस की तस बनी हुई है।
"आओ मेघराजा, बजाओ बाजा, पी पी पी, पंप पंप!"
पहले जल का खूब दोहन हुआ, फिर जल संरक्षण की ओर ध्यान नहीं दिया गया, और अब जल ही नहीं बच रहा। जब हम नोएडा में नए-नए आए थे, तब समरसेबल पंप लगाने का बड़ा रिवाज था। जिनके घरों में ये पंप लगे थे, वे तब भी जमकर पानी इस्तेमाल करते थे, और आज भी कर रहे हैं। सुबह होते ही आंगन, दीवारें, गाड़ियाँ — सब मोटी धार से धोई जाती हैं। लेकिन अब समरसेबल पंप भी जवाब देने लगे हैं। कई घरों में धरती के नीचे पानी ही नहीं बचा।
इस बार नोएडा प्राधिकरण ने पार्कों के लिए एसटीपी (STP) जल की आपूर्ति की है, इस कारण अब तक पार्क सूखे नहीं हैं — या शायद इंद्रदेव भी कुछ रहम कर रहे हैं। लेकिन पिछले वर्षों में ग्रीन बेल्ट में जो पेड़ पीले पड़ कर सूख गए थे, उन्हें लगभग काट काट कर ही हटा दिया जा रहा है।
जिसका लगभग 50% हिस्सा रेगिस्तान है — जल संकट का डटकर सामना कर रहा है। उन्होंने 130 किलोमीटर लंबी जल परियोजना बनाकर पानी को देश के सूखे इलाकों तक पहुँचाया है। ड्रिप सिंचाई तकनीक का इस्तेमाल । अपशिष्ट जल को शुद्ध कर लगभग 90% भाग खेती में उपयोग किया जाता है। बाक़ी आवश्यकता वे समुद्री जल के अलवणीकरण से पूरी कर रहे हैं।
भारत, जिसके पास 11,098.81 वर्ग किलोमीटर लंबी तटरेखा है — यहाँ अब भी जल संकट चल ही रहा है?
जल संकट का समाधान केवल योजनाओं और बैठकों से नहीं, बल्कि ज़मीन पर क्रियान्वयन से ही पूरा होगा।
इतनी बड़ी आबादी का देश भारत। इतनी लंबी तट रेखा तथा युवाओं की परसेंटेज ज्यादा। जल से भरी हुई तथा बरसात में उफनति नदियां तथा लोगों का उत्साह हमारे देश से भी जल्दी ही जल संकट को शायद निकाल ही फेंकेगा। Noida News :