गौतमबुद्धनगर की जिला अदालत ने सुनवाई के दौरान पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा है कि जिस स्थान की जिम्मेदारी नोएडा अथॉरिटी की थी, उसे अब तक आरोपी क्यों नहीं बनाया गया? यह सवाल उस वक्त उठा जब गिरफ्तार बिल्डरों की जमानत याचिका पर बहस हो रही थी।

Noida News : नोएडा के सेक्टर-150 में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत से जुड़े मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। गौतमबुद्धनगर की जिला अदालत ने सुनवाई के दौरान पुलिस और प्रशासन की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए पूछा है कि जिस स्थान की जिम्मेदारी नोएडा अथॉरिटी की थी, उसे अब तक आरोपी क्यों नहीं बनाया गया? यह सवाल उस वक्त उठा जब गिरफ्तार बिल्डरों की जमानत याचिका पर बहस हो रही थी। बचाव पक्ष ने दलील दी कि जिस गहरे गड्ढे में युवराज की कार डूबी, उसमें पिछले कई वर्षों से पानी भरा हुआ था। इसके बावजूद, मरम्मत के लिए धन स्वीकृत होने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत उस समय और सख्त हो गई जब जांच अधिकारी ने यह स्वीकार किया कि बिल्डर की ओर से सौंपी गई करीब 500 पन्नों की रिपोर्ट उन्होंने अब तक पढ़ी ही नहीं है। इस बयान पर अदालत ने गहरी नाराजगी जताई और इसे जांच में गंभीर लापरवाही बताया। अब इस मामले की अगली सुनवाई 29 जनवरी और 2 फरवरी को तय की गई है।
16 जनवरी की रात सेक्टर-150 में एक निमार्णाधीन प्लॉट में भरे पानी में युवराज मेहता की कार फंस गई। गाड़ी धीरे-धीरे पानी में डूबती चली गई। युवराज ने मोबाइल की टॉर्च जलाकर यह संकेत देने की कोशिश की कि वह जिंदा है। मौके पर पुलिस, दमकल विभाग और एसडीआरएफ के लगभग 80 कर्मी मौजूद थे, लेकिन प्रभावी रेस्क्यू नहीं हो सका। युवराज के पिता अधिकारियों के सामने गुहार लगाते रहे, लेकिन कोई ठोस पहल नहीं हुई। एक रेस्क्यू कर्मी पानी में उतरा जरूर, पर ठंड और लोहे की सरिया के डर से तुरंत बाहर आ गया। अंतत: एक डिलीवरी एजेंट मुनेंद्र सिंह ने साहस दिखाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
इस घटना ने उत्तर प्रदेश के सबसे विकसित माने जाने वाले जिले की आपदा प्रबंधन व्यवस्था की पोल खोल दी। करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू प्रयासों के दौरान न तो कोई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचा और न ही नोएडा अथॉरिटी का कोई प्रतिनिधि दिखाई दिया। फिलहाल पुलिस ने तीन बिल्डरों को गिरफ्तार किया है, लेकिन सवाल अब भी कायम है कि क्या सिर्फ बिल्डर दोषी हैं, या उस सिस्टम की भी जिम्मेदारी तय होगी जिसने खतरे को वर्षों तक नजरअंदाज किया?