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विशेषज्ञों का कहना है कि यमुना और हिंडन के डूब क्षेत्र प्राकृतिक रूप से बाढ़ के पानी को समाहित करने का काम करते हैं। जब इन क्षेत्रों में पक्के निर्माण हो जाते हैं तो नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होता है और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।

Delhi/Noida News : विशेषज्ञों का कहना है कि यमुना और हिंडन के डूब क्षेत्र प्राकृतिक रूप से बाढ़ के पानी को समाहित करने का काम करते हैं। जब इन क्षेत्रों में पक्के निर्माण हो जाते हैं तो नदी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित होता है और बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है। 2023 और उसके बाद के वर्षों में यमुना के जलस्तर में बढ़ोतरी के दौरान कई फ्लडप्लेन क्षेत्रों में जलभराव और नुकसान की घटनाएं सामने आई थीं। सरकारी एजेंसियां पहले भी चेतावनी दे चुकी हैं कि डूब क्षेत्र में किए गए अवैध निमार्णों को किसी प्रकार की राहत या मुआवजा नहीं दिया जाएगा।
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दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया रुख और एनजीटी के पुराने निदेर्शों के बाद माना जा रहा है कि नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद प्रशासन संयुक्त रूप से बड़े स्तर पर सर्वे, चिन्हांकन और ध्वस्तीकरण अभियान चला सकते हैं। अधिकारियों का मानना है कि पर्यावरण संरक्षण और बाढ़ जोखिम को कम करने के लिए फ्लडप्लेन क्षेत्रों को अतिक्रमण मुक्त कराना आवश्यक है। आने वाले दिनों में हजारों अवैध निमार्णों पर कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक गतिविधियां और तेज होने की संभावना है, जिससे एनसीआर के कई इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ गई है।
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प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के यमुना तटीय क्षेत्रों में बने 5,000 से अधिक फार्म हाउस और अन्य अवैध निर्माण जांच के दायरे में हैं। इससे पहले भी विभिन्न एजेंसियां फ्लडप्लेन क्षेत्र में अवैध निमार्णों को लेकर कार्रवाई कर चुकी हैं और कई फार्म हाउसों को ध्वस्त किया जा चुका है। नोएडा के सेक्टर-94, 124, 125, 127, 128, 131, 133, 134, 135, 150 और 168 के समानांतर बहने वाले यमुना फ्लडप्लेन क्षेत्र में बड़ी संख्या में आलीशान फार्म हाउस बनाए गए हैं। पूर्व में किए गए सर्वेक्षणों में हजारों अवैध फार्म हाउसों की पहचान की जा चुकी है। अगर हाईकोर्ट का आदेश अक्षरश: लागू हुआ तो बहुत बड़ी संख्या में ये अवैध निर्माण ध्वस्त किए जाएंगे। Delhi/Noida News
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