Noida News: नोएडा-ग्रेटर नोएडा के रहने वाले लोग आए दिन साइबर ठगों का शिकार हो रहे हैं। अब जालसाजों ने एक बैंक में निवेश के नाम पर डॉक्टर से लाखों रुपए की ठगी कर ली। जालसाजों ने करीब एक महीने तक ट्रैप में रखा और अलग अलग अकाउंट में लाखों रुपए डलवा लिए। साइबर ठग लगातार रुपयों की डिमांड बढ़ा रहे थे, तो उन्होंने बैंक में इस बारे में जानकारी दी। बैंक से पता करने पर वहां से इस प्रकार का कोई निवेश प्लान नहीं होने के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद बिसरख की एक सोसायटी में रहने वाले प्रमेश चंद्र भटनागर ने नोएडा के साइबर थाने में शिकायत दी है। नोएडा पुलिस केस दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।
जानिए कैसे नोएडा के डॉक्टर से ठगे 42 लाख
नोएडा की साइबर थाना पुलिस के मुताबिक, 65 साल के रिटायर्ड डॉक्टर को जालसाजों ने 2 जून को उन्हें एक व्हाट्सअप ग्रुप में जोड़ा था। ग्रुप से जुड़े जालसाजो ने डॉक्टर को फंसाने का प्लान बनाया। प्लान के मुताबिक, उन्होंने एसबीआई सिक्यॉरिटी की तरफ से ब्लॉक ट्रेडिंग से जुड़ा प्लान ग्रुप पर ही लॉन्च कर दिया। इस डिस्काउंट रेट पर आईपीओ दिए जाएंगे। एक नामी बैंक के कारण उन्होंने इस पर विश्वास किया और 25 हजार रुपये से स्टार्ट किया। ठगों के लिए एक ऐप पर बने उनके अकाउंट में हर दिन 5 से 10 फीसदी का रिटर्न शो हो रहा था। इस दौरान उनका विश्वास जीतने के लिए 2 लाख रुपये निकालने भी दिए। जब उन्होंने 42 लाख 30 हजार रुपये का निवेश कर दिया, तो उनका प्रोफाइल 28 दिनों में ही 3 करोड़ 49 के पास पहुंच गया। प्रमेश के अनुसार करीब साढ़े 3 करोड़ रुपये का प्रोफाइल उन्होंने कुछ रुपये निकालने का प्रयास किया तो ठगों ने 5 फीसदी कमीशन पहले देने की बात कही। जबकि पहले उन्होंने यह कमीशन सिर्फ 0.03 फीसदी लेने की बात कही थी। लगातार गुमराह करने वाली जानकारी देने के बाद पीड़ित ने परिवार के लोगों की मदद से एसबीआई सिक्यॉरिटी में संपर्क किया। जहां से ब्लॉक ट्रेडिंग और हर दिन कमीशन वाली कोई स्कीम नहीं होने की जानकारी दी।
साइबर जागरूकता सुझाव
1- साइबर से सम्बन्धित किसी समस्या के लिये साइबर क्राइम हेल्पलाईन नम्बर 1930 अथवा साइबर क्राइम की वेबसाइट पर अपनी शिकायत दर्ज करें।
2- क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, पैन कार्ड व आधार कार्ड अपडेट करने के लिये बैंक द्वारा कोई लिंक नहीं भेजा जाता है
3- किसी भी कॉरपोरेट सेक्टर की ऐजेन्सी के सक्षम अधिकारी द्वारा उनके अधीन कार्य करने वाले अकॉउन्ट सेक्शन/ई-मेल व सर्वर आदि पर कार्य करने वाले कर्मचारीगणों द्वारा प्रेषित किये जाने वाले ई-मेल, विभिन्न ट्रान्जेक्शन एवं सर्वर की समय समय पर जाँच एवं समीक्षा की जानी चाहियें एवं सर्वर की सुरक्षा से सम्बन्धित फायरवाल को मजबूत रखना चाहिए।