दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में प्रदूषण ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। ग्रैप-2 की पाबंदियों के बीच अब एक पड़ोसी देश से सामने आए सैटेलाइट आंकड़ों ने नई बहस छेड़ दी है।

Noida News : नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली समेत पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। हवा में घुला धुआं और धुंध लोगों की सांसों पर भारी पड़ रहे हैं। कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 400 के पार पहुंचने से हालात और चिंताजनक हो गए हैं। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने दिल्ली-एनसीआर में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण की पाबंदियां लागू कर दी हैं। इसके बावजूद प्रदूषण से राहत मिलती दिखाई नहीं दे रही है। इस बीच पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पराली और फसल अवशेष जलाने की घटनाओं से जुड़ा सैटेलाइट डेटा भी सामने आया है। पर्यावरण निगरानी वेबसाइट ‘हमारी हवा’ के विश्लेषण के अनुसार, अक्टूबर के पहले 29 दिनों में पाकिस्तान के पंजाब में भारतीय पंजाब की तुलना में लगभग 4.2 गुना अधिक आग के स्थान दर्ज किए गए। ऐसे में सीमा पार से आने वाले धुएं को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। हालांकि, इसका दिल्ली-एनसीआर की हवा पर कितना असर पड़ेगा, यह हवा की दिशा, गति और मौसम की परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
दिल्ली-एनसीआर में नवंबर की शुरुआत के साथ ही प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है। नोएडा में AQI 375 तक दर्ज किए जाने की सूचना है, जबकि दिल्ली के कई निगरानी केंद्रों पर यह 400 के पार पहुंच गया। 3 नवंबर की सुबह जारी रिपोर्टों में दिल्ली के जहांगीरपुरी में एक्यूआई 451, रोहिणी में 431 और पंजाबी बाग में 424 दर्ज किया गया। अलग-अलग निगरानी केंद्रों और समय के अनुसार आंकड़ों में अंतर भी सामने आया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक्यूआई वर्गीकरण के अनुसार, 301 से 400 के बीच का स्तर ‘बेहद खराब’ और 401 से 500 के बीच का स्तर ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। इसका मतलब है कि दिल्ली के कई इलाके गंभीर प्रदूषण की चपेट में हैं। नोएडा, ग्रेटर नोएडा और गाजियाबाद में भी हवा की गुणवत्ता खराब बनी हुई है। Noida News
दिल्ली की वायु गुणवत्ता में गिरावट के बाद सीएक्यूएम ने 2 नवंबर को पूरे एनसीआर में ग्रैप के दूसरे चरण की पाबंदियां लागू करने का फैसला लिया। इसके तहत सड़कों की यांत्रिक सफाई, पानी का छिड़काव और धूल नियंत्रण के उपाय तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। निर्माण स्थलों पर निगरानी बढ़ाने, डीजल जनरेटर के इस्तेमाल को नियंत्रित करने और निजी वाहनों के उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए पार्किंग शुल्क बढ़ाने जैसे कदम भी शामिल हैं। ग्रैप-2 के तहत सरकारी और नगर निकाय कार्यालयों के समय में बदलाव जैसे उपायों पर भी जोर दिया गया है। इन कदमों का उद्देश्य प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों को नियंत्रित करना और हवा में धूल तथा धुएं की मात्रा कम करना है। हालांकि, मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों और अलग-अलग स्रोतों से लगातार हो रहे उत्सर्जन के कारण प्रदूषण पर तत्काल नियंत्रण चुनौती बना हुआ है। Noida News
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के बीच पाकिस्तान के पंजाब प्रांत से सामने आए सैटेलाइट आंकड़े भी ध्यान खींच रहे हैं। पर्यावरण निगरानी वेबसाइट ‘हमारी हवा’ के विश्लेषण के मुताबिक, नासा के उपग्रहों ने 1 से 29 अक्टूबर 2026 के बीच पाकिस्तान के पंजाब में आग के 13,241 स्थान दर्ज किए। इसी अवधि में भारतीय पंजाब में 3,158 स्थानों पर आग की गतिविधियां रिकॉर्ड की गईं। इस तुलना के आधार पर पाकिस्तान के पंजाब में दर्ज आग के स्थानों की संख्या भारतीय पंजाब से करीब 4.2 गुना अधिक रही। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के पंजाब में दर्ज आग के लगभग 92 प्रतिशत स्थान खेती की जमीन पर थे और उनके फसल अवशेष जलाने से जुड़े होने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अक्टूबर के अंतिम सात दिनों में पाकिस्तान के पंजाब में 6,655 आग के स्थान दर्ज किए गए। यानी महीने के आखिरी सप्ताह में आग की गतिविधियों में उल्लेखनीय तेजी देखी गई। ओकारा, गुजरांवाला और ननकाना साहिब जैसे जिलों में भी बड़ी संख्या में आग के स्थान रिकॉर्ड किए गए। Noida News
पाकिस्तान के पंजाब में बड़े पैमाने पर फसल अवशेष जलाए जाने की घटनाएं क्षेत्रीय वायु गुणवत्ता के लिहाज से चिंता बढ़ाती हैं। पंजाब के अलग-अलग हिस्सों में खेतों में आग लगने से उठने वाला धुआं हवा के साथ दूसरे क्षेत्रों तक पहुंच सकता है। इसका प्रभाव हवा की दिशा और गति के साथ-साथ वातावरण में मौजूद नमी, तापमान और प्रदूषकों के फैलाव की परिस्थितियों पर निर्भर करता है। दिल्ली-एनसीआर की भौगोलिक स्थिति और सर्दियों की मौसम संबंधी परिस्थितियां प्रदूषण को लंबे समय तक वातावरण में बनाए रखने में भूमिका निभा सकती हैं। यदि हवा की दिशा पाकिस्तान के पंजाब से धुआं लेकर भारत की ओर होती है, तो सीमा पार की आग से निकले प्रदूषक उत्तर भारत की वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। लेकिन केवल सैटेलाइट पर दर्ज आग के स्थानों के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दिल्ली-एनसीआर के मौजूदा प्रदूषण में पाकिस्तान की पराली का कितना योगदान है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि नासा के सैटेलाइट से दर्ज आग के स्थान आग की मौजूदगी के संकेत हैं। ये आंकड़े अपने आप में जली हुई जमीन का क्षेत्रफल, धुएं की मात्रा या किसी शहर तक पहुंचे प्रदूषण का स्तर नहीं बताते। इसलिए पाकिस्तान में आग के अधिक स्थान दर्ज होना एक महत्वपूर्ण संकेत जरूर है, लेकिन दिल्ली-एनसीआर पर उसके वास्तविक प्रभाव का आकलन हवा की दिशा और प्रदूषण के वैज्ञानिक विश्लेषण से ही किया जा सकता है। Noida News
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के कई स्थानीय और क्षेत्रीय कारण हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन, कचरा जलाना और आसपास के कृषि क्षेत्रों में फसल अवशेष जलाना हवा को प्रभावित करते हैं। मौसम में बदलाव और हवा की कम गति इन प्रदूषकों को वातावरण में जमा कर सकती है। ऐसे में केवल दिल्ली-एनसीआर में पाबंदियां लागू करना पर्याप्त नहीं होगा। प्रदूषण के सभी स्रोतों पर प्रभावी नियंत्रण, किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के विकल्प उपलब्ध कराना और क्षेत्रीय स्तर पर समन्वय जरूरी है। पाकिस्तान और भारत के पंजाब क्षेत्रों में खेतों में आग की घटनाओं को कम करने के प्रयास भी उत्तर भारत की हवा को बेहतर बनाने में मददगार हो सकते हैं। फिलहाल दिल्ली-एनसीआर के लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता जहरीली हवा से राहत पाने की है। ग्रैप-2 की पाबंदियों के बीच अब मौसम की परिस्थितियों और प्रदूषण के अलग-अलग स्रोतों पर प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी। Noida News
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