नोएडा कमिश्नरेट सहित प्रदेश के सभी जनपदों को डीजीपी ने एक ऑर्डर जारी किया है। जिसमें कहा गया कि सिविल मामलों को क्रिमिनल केस बनाकर मनमानी न की जाए। ऐसा करने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। डीजीपी के इस ऑर्डर के बाद पुलिस महकमें में हड़कंप मच गया है। आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट की टिप्पड़ी के बाद डीजीपी ने यह ऑर्डर जारी किया है। Noida News
ठोस साक्ष्य होने पर ही हो सकता है क्रिमिनल केस
डीजीपी ने अपने ऑर्डर में कहा कि जब पुलिस के पास कोई ठोस साक्ष्य या कारण न हों, तब तक किसी भी कीमत पर सिविल केस को क्रिमिनल बनाकर मनमानी न करें। ऐसा करने पर संबंधित पुलिसकर्मी पर कार्रवाई भी की जाएगी। उन्होंने अपने आदेश में गौतमबुद्ध नगर के सुप्रीम कोर्ट में गए मामले का जिक्र भी किया गया था। इसमें पुलिस ने एक सिविल मामले को गलत तरीके से क्रिमिनल बना दिया था। इस मामले में कोर्ट टिप्पणी के बाद काफी चर्चा हुई थी। साथ ही डीजीपी से इस मामले में स्थिति को स्पष्ट करने के लिए कहा गया था। इस आदेश के बाद पुलिस की मनमानी कम होगी। इसको लेकर विभाग में भी चर्चाओं का बाजार गर्म है।
डीजीपी की तरफ से जारी किए गए ऑर्डर
डीजीपी ने जारी अपने अपने ऑर्डर में 2024 में नोएडा सेक्टर-39 थाने में दर्ज हुए धारा 406, 506 और 120बी केस का जिक्र किया गया है। इस केस को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद उन्होंने डीजीपी से भी जानकारी मांगी थी। इस ऑर्डर में कहा गया कि इस प्रकार की टिप्पणियों से साफ है कि सिविल मामलों को क्रिमिनल बनाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। साथ ही आईओ इस प्रकार के मामलों को बिना किसी सही जांच के सरसरी तौर पर एफआईआर के आधार पर ही चार्जशीट लगा देते हैं। डीजीपी के सर्कुलर में बताया गया है कि ऐसे मामले में जो सिविल केस हैं, लेकिन वह क्रिमिनल के भी हो सकते हैं, ऐसे में मामलों में सीनियर अधिकारी के आदेश पर 14 दिन में जांच कर सभी जानकारियों को चेक कर रिपोर्ट दर्ज की जाए। कोई मामला अगर सिविल का ही है, इस प्रकार के मामले में केस दर्ज नहीं किया जाना चाहिए। इस प्रकार के मामलों में शिकायत आने पर ऐसा करने वाले पुलिसकर्मी पर एक्शन लिया जाएगा। Noida News