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मेदांता हॉस्पिटल नोएडा में 'रिकरिंग हेडेक' पर जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। विशेषज्ञों ने माइग्रेन, तनाव, न्यूरोलॉजिकल बीमारियों और सिरदर्द के आधुनिक उपचार पर महत्वपूर्ण जानकारी दी।

Noida News : बार-बार होने वाले सिरदर्द को अक्सर लोग सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यही परेशानी गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का संकेत भी हो सकती है। लोगों को इस विषय में जागरूक करने के उद्देश्य से मेदांता हॉस्पिटल, नोएडा के इंस्टीट्यूट आफ न्यूरोसाइंसेस ने रिकरिंग हेडेक (बार-बार होने वाले सिरदर्द) विषय पर एक विशेष जागरूकता सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में 70 से अधिक मरीजों, उनके परिजनों, स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। सत्र का उद्देश्य सिरदर्द के कारणों, इसके लक्षणों, समय पर जांच और आधुनिक उपचार पद्धतियों के बारे में लोगों को जानकारी देना था।
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कार्यक्रम को न्यूरोसाइंसेस विभाग के वरिष्ठ विशेषज्ञों ने संबोधित किया। इनमें डॉ. मनीष वैश (डायरेक्टर एवं हेड, न्यूरोसाइंसेस), डॉ. कपिल सिंघल (डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी), डॉ. यशपाल बुंदेला (डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी) और डॉ. नमिता कौल (डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी) शामिल रहे। विशेषज्ञों ने बताया कि बार-बार होने वाले सिरदर्द के पीछे कई कारण हो सकते हैं। माइग्रेन, टेंशन हेडेक, सर्वाइकल स्पाइन से जुड़ी समस्याएं, तनाव, पर्याप्त नींद न लेना और कुछ न्यूरोलॉजिकल विकार सिरदर्द की प्रमुख वजहों में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि लगातार सिरदर्द होने पर केवल दर्द निवारक दवाओं के भरोसे नहीं रहना चाहिए, बल्कि विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श लेना जरूरी है।
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डॉक्टरों ने चेतावनी दी कि यदि सिरदर्द बार-बार हो रहा है, अचानक बहुत तेज दर्द महसूस हो रहा है या इसके साथ चक्कर, कमजोरी, बोलने में परेशानी अथवा दृष्टि संबंधी समस्याएं दिखाई दे रही हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। विशेषज्ञों के अनुसार समय पर जांच कराने से कई गंभीर न्यूरोलॉजिकल बीमारियों का शुरुआती चरण में पता लगाया जा सकता है, जिससे उपचार अधिक प्रभावी और सफल हो जाता है।
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कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण तनाव प्रबंधन और रिलैक्सेशन सत्र रहा, जिसका संचालन न्यूरो एनेस्थीसिया एंड पेन मेडिसिन विभाग की सीनियर कंसलटेंट डॉ. शिवानी जैन ने किया। उन्होंने बताया कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में तनाव और मानसिक दबाव सिरदर्द की बड़ी वजह बनते जा रहे हैं। उन्होंने प्रतिभागियों को तनाव कम करने के लिए श्वसन क्रियाएं, रिलैक्सेशन तकनीक और दैनिक जीवन में अपनाए जा सकने वाले आसान उपायों की जानकारी दी। डॉ. जैन ने कहा कि नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, संतुलित आहार और मानसिक तनाव को नियंत्रित करने वाली गतिविधियां सिरदर्द की समस्या को काफी हद तक कम कर सकती हैं।
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कार्यक्रम के अंत में इंटरएक्टिव प्रश्न-उत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने सिरदर्द, माइग्रेन, न्यूरोलॉजिकल समस्याओं और उपचार से जुड़े सवाल विशेषज्ञों से सीधे पूछे। डॉक्टरों ने सरल भाषा में सभी सवालों के जवाब देते हुए लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जरूरी सुझाव दिए। मेदांता इंस्टीट्यूट आॅफ न्यूरोसाइंसेस ने कहा कि इस तरह के जागरूकता कार्यक्रमों का उद्देश्य लोगों तक सही और वैज्ञानिक चिकित्सा जानकारी पहुंचाना है। संस्थान समय-समय पर विभिन्न स्वास्थ्य विषयों पर जनजागरूकता अभियान चलाकर प्रिवेंटिव हेल्थकेयर को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सही जानकारी और समय पर चिकित्सा परामर्श के जरिए सिरदर्द जैसी आम दिखने वाली समस्या से जुड़े गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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